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विवि व महाविद्यालय में व्यावसायिक शिक्षा, उच्च शिक्षा विभाग और एमएसएमई के बीच हुआ एमओयू
Mon, 01 Mar 2021 01:55 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 01 Mar 2021 01:55 AM IST
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छात्र-छात्राएं (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : iStock
प्रदेश में विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा दी जाएगी। वहीं, वोकल-लोकल-ग्लोबल की अवधारणा के आधार पर हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी और एक जिला-एक उत्पाद सहित एमएसएमई उत्पादों की बाजार क्षमता में सुधार किया जाएगा। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग और एमएसएमई के बीच एमओयू साइन किया गया है।
उच्च शिक्षा विभाग के मानना है कि विवि व महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा देने से प्रदेश का औद्योगिक विकास होगा। एमओयू के तहत एमएसएमई विभाग हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी, ओडीओपी और अन्य एमएसएमई इकाइयों को अनुसंधान, इंटर्नशिप और परियोजनाओं के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों से जोड़ेगा। दोनों विभाग संयुक्त परियोजनाएं, अनुसंधान और प्रकाशन करेंगे।
संयुक्त सेमिनार और सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। इसमें विवि व शिक्षण संस्थान व्याख्यान व तकनीकी मार्गदर्शन देंगे। वहीं, स्नातक और स्नातकोतर के विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम में एक परियोजना को पूरा करना होगा। इससे उन्हें उद्यमी बनने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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उच्च शिक्षा विभाग की ओर से कारीगरों व शिल्पकारों की क्षमता संवर्धन अल्पकालिक व्यावसायिक पाठ्यक्रम कराया जाएगा। विवि उद्योग संगठनों और प्रतिष्ठित कंपनियों के सीएसआर फंड का उपयोग कर नवाचार के लिए सहयोग करेंगे।
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उच्च शिक्षा विभाग के मानना है कि विवि व महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा देने से प्रदेश का औद्योगिक विकास होगा। एमओयू के तहत एमएसएमई विभाग हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी, ओडीओपी और अन्य एमएसएमई इकाइयों को अनुसंधान, इंटर्नशिप और परियोजनाओं के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों से जोड़ेगा। दोनों विभाग संयुक्त परियोजनाएं, अनुसंधान और प्रकाशन करेंगे।
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संयुक्त सेमिनार और सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। इसमें विवि व शिक्षण संस्थान व्याख्यान व तकनीकी मार्गदर्शन देंगे। वहीं, स्नातक और स्नातकोतर के विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम में एक परियोजना को पूरा करना होगा। इससे उन्हें उद्यमी बनने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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उच्च शिक्षा विभाग की ओर से कारीगरों व शिल्पकारों की क्षमता संवर्धन अल्पकालिक व्यावसायिक पाठ्यक्रम कराया जाएगा। विवि उद्योग संगठनों और प्रतिष्ठित कंपनियों के सीएसआर फंड का उपयोग कर नवाचार के लिए सहयोग करेंगे।