फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›     More than 45 thousand illegal constructions identified in the state

प्रदेश में 45 हजार से ज्यादा अवैध निर्माणों की हुई पहचान, लखनऊ में भरमार

Mon, 20 Jul 2020 12:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 20 Jul 2020 12:28 AM IST
विज्ञापन
   More than 45 thousand illegal constructions identified in the state
demo pic - फोटो : Social media

अवैध निर्माण के शमन के लिए सरकार ने छह महीने के लिए भले ही नई शमन नीति लागू कर दी हो, लेकिन प्रदेश में हजारों ऐसे अवैध निर्माण हैं जिनको इस नीति का लाभ नहीं मिल पाएगा। नई नीति के मानकों के मुताबिक इन अवैध निर्माणों को वैध नहीं किया जा सकेगा। नई नीति में कई ऐसे मानक हैं जो तमाम अवैध निर्माणों के शमन में आड़े आएंगे। राजधानी समेत विभिन्न शहरों में ऐसे अवैध निर्माणों की संख्या 45 हजार से भी अधिक है।

विज्ञापन


एक अनुमान के मुताबिक 20 हजार से अधिक अवैध निर्माण सिर्फ लखनऊ में ही चिह्नित हैं। वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर, आगरा, गाजियाबाद व गोरखपुर जैसे शहरों में भी अनाधिकृत निर्माणों की संख्या हजारों में है। इसी के मद्देनजर सरकार ने 6 महीने के लिए नई ‘शमन नीति-2020’ लागू किया है। पहले की नीतियों की तुलना में नई नीति में काफी रियायत दी गई है। 
विज्ञापन


नीति के मानक को भी काफी सरल किया गया है। ताकि अधिक से अधिक अवैध निर्माणों को नियमित किया जा सके। लेकिन सूत्रों का कहना है कि नई नीति में काफी रियायत होने के बावजूद 50 प्रतिशत अवैध निर्माणों का शमन नहीं हो सकेगा। मुख्य नगर नियोजन मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल नई नीति के मानक की परिधि में आने वाले अवैध निर्माणों को नियमित करने की कार्यवाही होगी। इसके बाद उन निर्माणों का आंकड़ा  तैयार किया जाएगा, जो शमन नीति के मानक पर खरे नहीं उतर रहे हैं। बाद में नीति से छूटे निर्माणों के बारे रणनीति तैयार की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसे अवैध निर्माणों में होगी दिक्कत
जिन अवैध निर्माणों का शमन नहीं हो पाएगा वे ऐसे निर्माण हैं जो भू-उपयोग के विपरीत बने हैं। बहुत से ऐसे अवैध निर्माण हैं जो आवासीय जमीन पर व्यावसायिक या कार्यालय के रूप में बने हैं। इसी तरह बहुत से आवासीय जमीन पर अपार्टमेंट, क्लीनिक, बारात घर, होटल  मेडिकल स्टोर, पैथोलॉजी आदि बनाए गए हैं। ऐसे निर्माणों को नियमित करने के संबंध में नई नीति में कोई प्रावधान नहीं है। लिहाजा ऐसे अवैध निर्माणों को हटाने के लिए ध्वस्तीकरण ही एकमात्र विकल्प बचा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed