{"_id":"5de4c9cb8ebc3e55061a9eb3","slug":"monthly-reports-of-the-up-pollution-control-board-about-air-pollution-in-lucknow","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"लखनऊः सालभर में सिर्फ दो माह ही हवा सांस लेने लायक, जानें- कब कितनी बिगड़ी हवा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लखनऊः सालभर में सिर्फ दो माह ही हवा सांस लेने लायक, जानें- कब कितनी बिगड़ी हवा
Mon, 02 Dec 2019 01:52 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 02 Dec 2019 01:52 PM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वायु प्रदूषण ने लखनऊ को गैस चैंबर बना दिया है। पूरे साल में सिर्फ दो माह ही हवा सांस लेने लायक है। खुद यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की पूरे साल की अलग-अलग मासिक रिपोर्ट यह हकीकत सामने रख दी है।
विज्ञापन
ऐसे में जरूरत यह है कि सर्दियों के दिनों की जगह पूरे साल हवा को साफ रखने के लिए कदम उठाए जाएं। लखनऊ में यूपीपीसीबी सात जगहों पर निगरानी करता है। यहां हवा के नमूने की मैन्युअल तरीके से लैब में जांच की जाती है। यह स्टेशन सीपीसीबी के चार ऑनलाइन स्टेशनों से अलग हैं।
विज्ञापन
इन सात स्टेशनों की रिपोर्ट का औसत आंकड़ा देखें तो एक्यूआई 10 महीने में 101 से 300 के बीच बनी हुई है।यानी, हवा सुधरी हुई से लेकर खराब बनी हुई है। वहीं सीपीसीबी की डेली बुलेटिन में अलग-अलग दिनों में यह आंकड़ा 400 से ऊपर तक पहुंच गया। इसका मतलब हवा के खतरनाक हो जाने की तरफ इशारा है।
विज्ञापन
बारिश पर निर्भर साफ हवा
लखनऊ के वायु प्रदूषण के आंकड़ों का हाल देखें तो सिर्फ अगस्त और सितंबर में हवा संतोषजनक मिली है। अच्छी हवा इस बीच भी नहीं मिली है। यह दोनों महीने बारिश से आंकड़ों में सुधार रहा। गर्मियों में तेज हवा ने मामूली गिरावट की लेकिन सूक्ष्म कण पीएम10 के धूल की वजह से मौजूद रहने से बहुत अधिक अंतर नहीं आया।
मेट्रो में वीआईपी भी चलें तो समाज में जाए अच्छा संदेश
(ये आंकड़े यूपीपीसीबी के सात स्टेशनों के हैं जिनमें गोमतीनगर, अंसल एपीआई, तालकटोरा, सराय माली खां, अलीगंज, महानगर, नगर निगम कार्यालय लालबाग शामिल हैं।)
निदेशक आईआईटीआर डॉ. आलोक धवन का कहना है कि मुझे जब एयरपोर्ट या मेट्रो रूट पर दूसरी जगह जाना होता है। मैं मेट्रो का उपयोग करता हूं। सरकारी अफसर समेत शहर के प्रमुख लोग मेट्रो का उपयोग शुरू करेंगे तो बाकी नागरिकों में अच्छा संदेश जाएगा। लोग अपनी कार का उपयोग न्यूनतम करेंगे। इससे प्रदूषण और सड़कों पर जाम कम होगा।
विशेषज्ञ की सलाह कि सर्दियों की जगह पूरे साल एक्शन प्लान पर काम करना होगा।
पूरे साल के लिए बने एक्शन प्लान
अभी केवल सर्दियों के लिए ही एक्शन प्लान लागू है। मेट्रो के काम के पूरा होने से कुछ हालात सुधरे हैं। बड़े निर्माण भी अब कवर करके हो रहे हैं। बड़ी चुनौती वाहनों से होने वाला प्रदूषण है। इससे भी हम निपट रहे हैं। - डॉ. राम करन, क्षेत्रीय अधिकारी, यूपीपीसीबी
प्रोत्साहन पर काम करना होगा
कार पूल कर अगर एक साथ चार लोग जा रहे हैं तो अमेरिका में उनके लिए अलग से लेन बनी होती है। उन्हें जाम में फंसने की जरूरत नहीं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बस के गुजरने के लिए अलग लेन कई देशों में देखने को मिलेगी। इस तरह के प्रोत्साहन हमें भी अपने यहां देने होंगे। नई कॉलोनियों में इस उपयोग के लिए डेडीकेटेड लेन अनिवार्य की जाए, जिससे भविष्य की जरूरत पूरी हो। निगरानी के लिए स्टेशन भी चार से बढ़ाकर कम से कम 50 किए जाएं। आईआईटीआर इनके संचालन की जिम्मेदारी उठा लेगा। - डॉ. आलोक धवन, निदेशक, आईआईटीआर