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किसानों की 59 फीसदी तक बढ़ी मासिक आय : ब्रजेश पाठक
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कार्यक्रम में उपस्थित इंजीनियर और संबोधित करते ब्रजेश पाठक।
लखनऊ। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि कृषि सदैव भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। पहले किसानों की आय बहुत सीमित थी, मगर समय के साथ उनकी मासिक आय में 59 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि हुई है। यह प्रगति कृषि इंजीनियरिंग, आधुनिक तकनीकों और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का परिणाम है।
शुक्रवार को वह एग्रीकल्चरल इंजीनियर्स के 37वें राष्ट्रीय अधिवेशन को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) की ओर से आयोजित अधिवेशन में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का सकल घरेलू उत्पाद वर्ष 2047 तक 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। वर्तमान में लगभग 43 फीसदी जनसंख्या कृषि से जुड़ी है, मगर इस क्षेत्र की वृद्धि दर वर्तमान में 3.5 फीसदी से भी कम है। विकसित भारत का सपना साकार करने के लिए कृषि क्षेत्र को 7 फीसदी की दर से बढ़ाना आवश्यक है, जिसके लिए कृषि इंजीनियर्स मुख्य भूमिका निभाएंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीबी सिंह ने कहा कि विविधीकृत कृषि आय, बेहतर फसल मूल्य और सहायक क्षेत्रों के योगदान से संभव हुआ है। विशिष्ट अतिथि के रूप में इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति एसडब्ल्यू अख्तर ने कहा कि भारत सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए संकल्पित है। वर्ष 2015-16 में औसत मासिक कृषक परिवार की आय लगभग 8,059 रुपये थी।
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अधिवेशन में कृषि इंजीनियरिंग विशेषज्ञों व शोधकर्ताओं ने शोधपत्र भी प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में उप महानिदेशक (इंजीनियरिंग) डॉ. एसएन झा, वसंतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ के कुलपति डॉ. आईएम मिश्रा, डॉ. सीवी रमन यूनिवर्सिटी वैशाली (बिहार) के कुलपति डॉ. एमएल गौर सहित बड़ी संख्या में अभियंताओं और संयोजक डॉ. जसवंत सिंह, यूपी स्टेट सेंटर चेयरमैन सत्य प्रकाश, केपी त्रिपाठी ने शिरकत की।
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शुक्रवार को वह एग्रीकल्चरल इंजीनियर्स के 37वें राष्ट्रीय अधिवेशन को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) की ओर से आयोजित अधिवेशन में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का सकल घरेलू उत्पाद वर्ष 2047 तक 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। वर्तमान में लगभग 43 फीसदी जनसंख्या कृषि से जुड़ी है, मगर इस क्षेत्र की वृद्धि दर वर्तमान में 3.5 फीसदी से भी कम है। विकसित भारत का सपना साकार करने के लिए कृषि क्षेत्र को 7 फीसदी की दर से बढ़ाना आवश्यक है, जिसके लिए कृषि इंजीनियर्स मुख्य भूमिका निभाएंगे।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीबी सिंह ने कहा कि विविधीकृत कृषि आय, बेहतर फसल मूल्य और सहायक क्षेत्रों के योगदान से संभव हुआ है। विशिष्ट अतिथि के रूप में इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति एसडब्ल्यू अख्तर ने कहा कि भारत सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए संकल्पित है। वर्ष 2015-16 में औसत मासिक कृषक परिवार की आय लगभग 8,059 रुपये थी।
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अधिवेशन में कृषि इंजीनियरिंग विशेषज्ञों व शोधकर्ताओं ने शोधपत्र भी प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में उप महानिदेशक (इंजीनियरिंग) डॉ. एसएन झा, वसंतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ के कुलपति डॉ. आईएम मिश्रा, डॉ. सीवी रमन यूनिवर्सिटी वैशाली (बिहार) के कुलपति डॉ. एमएल गौर सहित बड़ी संख्या में अभियंताओं और संयोजक डॉ. जसवंत सिंह, यूपी स्टेट सेंटर चेयरमैन सत्य प्रकाश, केपी त्रिपाठी ने शिरकत की।

कार्यक्रम में उपस्थित इंजीनियर और संबोधित करते ब्रजेश पाठक।

कार्यक्रम में उपस्थित इंजीनियर और संबोधित करते ब्रजेश पाठक।