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आवास विकास मेट्रो के लिए पैसा देगी मगर जमीन नहीं

Thu, 14 Nov 2013 02:09 AM IST
ऋषि मिश्र/लखनऊ
ऋषि मिश्र/लखनऊ Updated Thu, 14 Nov 2013 02:09 AM IST
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money for metro but not land

आवास विकास परिषद मेट्रो के लिए 200 करोड़ रुपए तो देगी मगर जमीन नहीं देगी। मेट्रो के लिए आवास विकास परिषद की वृंदावन योजना में 150 एकड़ जमीन की मांगी गई थी।

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मुफ्त में जमीन दिए जाने को लेकर परिषद कर्मचारियों के बढ़ते विरोध और योजना पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए आवास विकास परिषद ने जमीन न देने का निर्णय लिया है।
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शासन को भी इस बारे में बता दिया गया है। अवध विहार योजना में जमीन का रेट 13000 रुपए प्रति वर्ग मीटर (200 करोड़ रुपए दिए जाने को लेकर योजना पर लोड बढ़ाने से पहले था।
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इस हिसाब से आवास विकास परिषद को मेट्रो केलिए मुफ्त जमीन पर देने पर 8.19 अरब रुपए का घाटा होता। जिसको पूरा करने के लिए परिषद को इसी योजना पर लोड करना पड़ता।

इससे जमीन की कीमत करीब 8000 रुपए प्रति वर्ग मीटर और बढ़ानी पड़ती। मेट्रो के लिए 200 करोड़ रुपए देने केचलते परिषद को अवध विहार योजना में जमीन की कीमत 2000 रुपए प्रति वर्ग मीटर बढ़ाकर 15000 रुपए प्रति वर्ग मीटर करनी पड़ी है।

जमीन का नया रेट चालू पंजीकरण पर लागू नही होगा लेकिन अब जो नए पंजीकरण योजना में खोले जाएंगे उनमें जमीन की बढ़ी हुई दर ही लगाई जाएगी।

आवास विकास परिषद की इंजीनियर्स एसोसिएशन ने भी दो दिन पहले बैठक कर मेट्रो को मुफ्त जमीन दिए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई थी।

एसोसिएशन के महासचिव ज्ञानेश्वर प्रसाद ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा था कि  शासन सिर्फ परिषद का दोहन कर रहा है।

मेट्रो के लिए करोड़ों रुपए देने और बिना प्रतिकर लिए जमीन दिए जाने से परिषद कर्मचारियों को भविष्य में आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि शासन परिषद कर्मचारियों की न्यायोचित मांगों को नहीं मान रहा है  मगर उस पर बोझ बढ़ा रहा है।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद भी परिषद कर्मचारियों को पेंशन नहीं दी जा रही है। मुख्य अभियंता का पद कई सालों से खाली है।

पूर्व में  अवस्थापना मद केतहत रजिस्ट्री से प्राप्त राजस्व में दो प्रतिशत आवास विकास को मिलता था जिसे कम करे 0.25 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे परिषद के विकास कार्य प्रभावित होंगे।


जमीन दी जाती तो फेल होती योजना
आवास विकास परिषद के ही इंजीनियरों का मानना है यदि योजना केलिए मुफ्त में 150 एकड़ जमीन दी जाती तो योजना पर इसका खराब असर पड़ता।

पूरी योजना की तस्वीर ही बिगड़ जाती है। जमीन दी जाती तो इसका भार भी योजना पर  ही लोड करना पड़ता। इससे योजना में आम लोगों केघर का सपना और महंगा हो जाता।

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