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करबला के शहीदों को दिया पुरसा, किया मातम
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Sat, 16 Nov 2013 02:30 PM IST
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करबला के शहीदों को पुरसा देते हुए अजादारों ने दसवीं मोहर्रम का परंपरागत जुलूस विक्टोरिया स्ट्रीट स्थित नाजिम साहब के इमामबाड़े से पूरे अकीदे के साथ निकाला।
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जुलूस में अंजुमनों ने नौहाख्वानी और मातम किया। जुलूस शाम को करबला तालकटोरा जाकर संपन्न हुआ।
उधर, सुन्नी समुदाय के अकीदतमंदों ने बादशाहनगर, निशातगंज, अलीगंज, डालीगंज के अलावा शहर भर में करबला में अपने ताजिये देर शाम तक दफन किये।
या हुसैन...या हुसैन की सदाओं के साथ अलम ताजियों के इस मातमी जुलूस में गम में डूबे अजादार शुक्रवार को शहर भर में करबला के शहीदों को पुरसा दे रहे थे और अपने हजरत इमाम हुसैन व उनके साथियों का मातम कर रहे थे।
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इस दौरान अधिकतर अंजुमनों ने जंजीर, कमा, छुरी का मातम कर अपने को लहूलुहान कर लिया।
जुलूस के मद्देनजर जिला प्रशासन और पुलिस ने जुलूस में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कये। आईजी सुभाष चंद्र, डीआईजी नवनीत सिकेरा, डीएम अनुराग यादव, एसएसपी जे. रविंदर गौड़ समेत शिया धर्मगुरू मौलाना कल्बे जव्वाद ने भी जुलूस में शिरकत की।
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उधर, बादशाहनगर स्थित करबला निशातगंज में सुन्नी अकीदतमंदों ने करबला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की।
शाम-ए-गरीबां में रोए अजादार
अंधेरी शाम, गम का गुबार और स्याह माहौल के बीच दसवीं मोहर्रम की रात शहर भर में शाम-ए-गरीबां मनाई गई। इस मौके पर अजाखाना-ए-शब्बीर की लाइट बंद कर दी गई। अंधेरे में आयोजित होने वाली इस शाम ए गरीबां की मजलिस में स्याह माहौल तारी रहा। इमामबाड़ा गुफराम्आब में शाम ए गरीबा की मजलिस शुक्रवार को मौलाना कल्बे जव्वाद ने संबोधित की।
अकबरी गेट पर मनाया गया यौम ए हुसैन
करबला के शहीदों की याद में शुक्रवार को अकबरी गेट पर यौम ए हुसैन मनाया गया। इस मौके बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की।
दसवीं मोहर्रम को होने वाले इस जलसे में मौलाना अब्दुल अली फारूकी ने हजरत हुसैन की शहादत का जिक्र करते हुए कहा कि हजरत हुसैन जन्नत का फूल हैं और जन्नत के सरदार हैं। शहादते हुसैन का बयान करते हुए कहा कि इस्लाम में शहीदों का मरतबा सबसे ऊंचा है।
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