दिल्ली हार के बाद संघ हुआ 'भाषणबाजी' के खिलाफ
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संघ को लेकर लोग तरह-तरह की कल्पनाएं करते हैं। इस तरह के आयोजन को अक्सर शक्ति प्रदर्शन कहा जाता है। जबकि यह हमारा आत्म दर्शन है। लड़ाई बाहर से कम, हमारे अंदर से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि शक्ति प्रदर्शन तो शक्तिहीन लोग करते हैं।
हमें इसकी आवश्यकता नहीं है। उन्होंने गांव-गांव संघ का विस्तार करने पर जोर दिया। साथ ही इसमें गुणात्मक सुधार की भी आवश्यकता जताई।
हिंदुओं के लिए लड़ता है संघ
निराला नगर के रेलवे मैदान में रविवार को आयोजित कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि संघ हिंदुओं को देश के लिए लड़ने वाला और करने वाला बनाता है, बयानबाजी करने वाला नहीं। इसलिए हमें हमेशा काम करने की आदत डालनी होगी। सत्ता व राजनीतिक दलों में बैठे अच्छे लोग काम करेंगे तभी देश बदलेगा।
ऐसे कार्यक्रमों से स्वयंसेवक अनुशासन, समय पालन, नियम पालन सीखते हैं। उन्होंने कहा कि हम अपने भाग्य के निर्माता हैं। हम ही इसे बना और बिगाड़ सकते हैं। यही बात देश के निर्माण पर भी लागू होती है। उनका कहना है कि केवल पढ़-लिख लेने से कुछ नहीं होता है। हमारी दृष्टि एक महिला के प्रति कैसी है, आचरण कैसा है, इस पर ध्यान देना होगा।