वादा किया पर कश्मीरी पंडितों के लिए मोदी सरकार ने किया कुछ नहीं : फारूख अब्दुल्ला
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राजधानी लखनऊ में शनिवार को ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस (एआईपीसी) की ओर से आयोजित ‘आज का भारत’ विषयक संगोष्ठी में डॉ. फारूख अब्दुल्ला ने कहा, 1988-89 में मैं जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में पाकिस्तान से लड़ रहा था।
संयुक्त मोर्चे की सरकार में मुफ्ती मोहम्मद सईद गृहमंत्री बने। मैंने कहा कि जगमोहन को राज्यपाल बनाकर न भेजा जाए। लेकिन तत्कालीन वीपी सिंह सरकार ने जगमोहन को ही राज्यपाल बनाया। मैने उसी दिन इस्तीफा दे दिया। जगमोहन ने कश्मीरी पंडितों से कहा कि दो महीने अपनी जगह छोड़ दें, कश्मीर में सख्ती करनी है।
कश्मीरी पंडितों ने अपने घर छोड़ दिए, लेकिन वे आज तक वापस नहीं आ सके। केंद्र की मोदी सरकार ने उनकी घर वापसी का वादा किया था, लेकिन साढ़े चार साल में उनके लिए कुछ नहीं किया।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार तालिबान से बात करने रूस जा सकती है, लेकिन कश्मीर में अपनों से बात नहीं कर सकते। अटल विहारी वाजपेयी व लालकृष्ण आडवाणी हुरियत से बात कर सकते हैं, लेकिन मौजूदा सरकार नहीं। कश्मीर समस्या का हल निकालने के लिए हमें पहले अपने घर को ठीक करना होगा।
देवगौड़ा, गुजराल पीएम बन सकते हैं तो फारूख क्यों नहीं?
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एक जमाने में कहा जाता था कि नेहरू के बाद कौन ? कई मौकों पर इस तरह से सवाल उठे। मुल्क व्यक्ति से बड़ा होता है। मोदी जाएंगे तो आने के लिए बहुत लोग तैयार हैं। उन्होंने चुटकी ली कि जब देवगौड़ा और गुजराल प्रधानमंत्री बन सकते हैं तो एक दिन फारूख अब्दुल्ला का नंबर क्यों नहीं आ सकता ? हालांकि वे तुरंत बोले कि पीएम को भागदौड़ बहुत करनी पड़ती है, मुझे राष्ट्रपति भवन में बैठाइए। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों के गठबंधन की उम्मीद जताई। कहा कि संघ व भाजपा देश की डेमोग्राफी में बदलाव करना चाहते हैं। वे संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर रहे हैं।