भाजपा के लिए घातक 'मोदी इफेक्ट'
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बुधवार को लखनऊ में मतदान के दिन मोदी की हिंदुत्ववादी शख्सियत के कारण मुस्लिम वोट कांग्रेस और सपा की तरफ मुड़ता दिखाई दिया।
अटल बिहारी वाजपेयी के घर भी नरेंद्र मोदी लड़ते दिखे। प्रत्याशी चाहे राजनाथ सिंह हों या फिर रीता बहुगुणा जोशी, अभिषेक मिश्र, नकुल दुबे, जावेद जाफरी या फिर कोई अन्य, बहुत चर्चा में नहीं दिखा।
इन्हें जिताने-हराने की चिंता भी सार्वजनिक होती नहीं दिखी। अगर कुछ दिखा तो एक तरफ अटल की विरासत बचाने और नरेंद्र मोदी को पीएम बनाने की चिंता तो दूसरी तरफ मोदी को गद्दी पाने से रोकने की जद्दोजहद।
वह चाहे पोलिंग बूथों पर तेज धूप में धैर्य के साथ मतदान के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे लोग हों या फिर सड़कों पर जहां-तहां बिखरे लोगों के समूह।
बसपा को भी मिला लाभ
सुबह सात बजे मतदान शुरू होने से लेकर शाम छह बजे मतदान खत्म होने तक बूथों पर लगी लाइनें लखनऊ में राजनीतिक दलों के नेताओं के दिलों की धड़कनें घटाती-बढ़ाती रहीं। प्रत्याशियों की हवा बनाती-बिगाड़ती रहीं।
कई जगह मतदान केंद्रों के बाहर कांग्रेस और सपा के समर्थक मुस्लिम मतदाताओं को यह समझाने की कोशिश करते नजर आए कि भाजपा के मुकाबले में उनकी पार्टी ही है।
गोमतीनगर, अलीगंज और डालीगंज की तरफ कुछ मुस्लिम मोहल्लों में इसका असर भी दिखा।
मुस्लिम मतदाताओं के बीच साइकिल व पंजा दोनों चला, पर अलीगंज में ही आईटीआई जैसे बड़े मतदान केंद्र पर साइकिल के साथ हाथी भी रफ्तार में दिखाई दिया। हालांकि मोदी वाली पार्टी को पीछे करने की यह होड़ भाजपा को राहत ही दे गई।
सपा बैकफुट पर
पुराने लखनऊ की तरफ नजारा बदला हुआ दिखा। मुस्लिम बहुल इलाकों से सपा को खासी उम्मीदें थीं। दो वर्ष पहले विधानसभा चुनाव में सपा को इस इलाके से काफी बढ़त मिली थी।
उसने पश्चिम, उत्तर व मध्य सीट जीती थी। पर, इस बार सपा की उम्मीदों पर पानी फिरता दिखा।
यूनिटी कॉलेज के पास कई महिलाओं को लेकर बैठी एक बुजुर्ग महिला इस संवाददाता को देखकर बोलीं, ‘हमार वोट साइकिल पर ही जात है।’
पर, मुड़ते ही उसी महिला की आवाज कान में पड़ी, ‘देखौ, वोट पंजा का ही देइक है।’ यहां से आगे चौक में भी कई जगह मोदी को हराने की होड़ कांग्रेस को ऑक्सीजन देती मिली।
कांग्रेस को लाभ
बताया जाता है कि चौक से लेकर बुलाकी अड्डा, ठाकुरगंज व बालागंज जैसे इलाकों में कई जगह इस होड़ ने सपा को कड़े झटके दिए।
बालागंज के पास एक युवक ने तो बेबाकी से बताया कि उसके पिता ने मोदी को रोकने की खातिर ‘पंजा’ को वोट देने को कहा है।
इस सूचना और मोदी को हराने की होड़ की प्रतिक्रिया राजाजीपुरम, सआदतगंज, आलमबाग, कैंट, हजरतगंज से लेकर ट्रांसगोमती के गोमतीनगर, इंदिरानगर व विकासनगर में मोदी की मंजिल आसान बनाने के रूप में सामने आई।
शाम 4 बजे बाद मतदान केंद्रों पर फिर भीड़ बढ़ गई।
'आप' का असर नहीं
अगर मतदान केंद्रों के माहौल को कसौटी मानें तो ‘आप’ का बहुत असर नहीं दिखा। हालांकि यह अपने आप में ताज्जुब था, क्योंकि लखनऊ उन शहरों में शामिल है जहां अन्ना के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की लंबे समय तक गूंज रही है।
उम्मीद थी कि ‘आप’ के उम्मीदवार जावेद जाफरी पुराने लखनऊ में मुस्लिम मतदाताओं में सेंध लगाएंगे, पर ऐसा होता नहीं दिखा।
राजधानी के विभिन्न इलाकों में बसे उत्तराखंडी और कुछ ब्राह्मणों के वोट रीता के पक्ष में जाने की खबरें पुराने लखनऊ में फैलीं तो मुस्लिमों को सपा और बसपा की तुलना में कांग्रेस के पक्ष में जाने में मोदी को रोकने का मकसद कामयाब होता दिखा।
सो वे उधर मुड़ते दिखाई दिए। हालांकि त्रिवेणीनगर, विकासनगर, पुराने लखनऊ व कैंट के ब्राह्मण बहुल इलाकों में भी मोदी को मंजिल तक पहुंचाने की चर्चा राजनाथ सिंह के लिए राहत वाली रही, क्योंकि वैश्य व कायस्थ वोट भी मोदी के लिए ही माहौल बनाता नजर आया।