नहीं लगाने पड़ेगे कोर्ट के चक्कर, घर पहुंचेगे मोबाइल कोर्ट
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अब आपको छोटे-मोटे झगड़े व विवाद में न्याय के लिए जिलों में स्थित न्यायालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। न्यायालय खुद आपके द्वार पहुंचकर न्याय देगा।
यह सब संभव होगा मोबाइल कोर्ट के जरिये। सूबे में जल्द ही ऐसे मोबाइल कोर्ट अस्तित्व में आने जा रहे हैं। इनके आने के बाद गांव के झगड़े गांव में ही सुलझाए जा सकेंगे।
प्रदेश सरकार ने 250 ग्रामीण न्यायालयों को मंजूरी दे दी है। अभियोजन निदेशालय ने सरकार के पास इन्हीं ग्रामीण न्यायालयों को मोबाइल कोर्ट में तब्दील करने का प्रस्ताव भेजा है।
इसके तहत निदेशालय ने सभी ग्रामीण कोर्ट को एक-एक वाहन भी मुहैया कराने का प्रस्ताव दिया है। हर कोर्ट में एक ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट तैनात होंगे।
महानिदेशक अभियोजन डॉ. सूर्य कुमार ने बताया कि गांव में जमीन-जायदाद के झगड़े बहुत होते हैं। इनके निपटारे के लिए लोगों को जिला मुख्यालयों पर आना पड़ता है। इससे समय व पैसा दोनों बर्बाद होता है।
सरकार ने दी ग्रामीण न्यायालय को मंजूरी
साथ ही छोटे-छोटे झगड़ों के कारण न्यायालयों में वादों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। इसलिए सरकार ने गांव के झगड़े गांव में ही सुलझाने के लिए ग्रामीण न्यायालय मंजूर किए हैं।
ये न्यायालय ब्लॉक एवं तहसीलों में कोर्ट लगाकर दोनों पक्षों की सुनवाई करने के बाद मौके पर ही फैसला सुनाएंगे। डीजी अभियोजन सूर्य कुमार ने बताया कि मोबाइल कोर्ट की अवधारणा इस तरह से तैयार की गई है कि जरूरत पड़ने पर यह घटनास्थल तक पहुंचे।
कई बार मौके पर चीजों को देखने के बाद स्थिति एकदम साफ हो जाती है। इन कोर्ट के जरिये लोगों को बहुत कम समय में न्याय मिल सकेगा।