मोबाइल एप की मदद से सूबे में छेड़छाड़ रोकेगी पुलिस
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सूबे में युवतियों को छेड़खानी की घटनाओं से बचाने या फिर इमरजेंसी में मदद के लिए ‘निर्भया’ अब हथियार बनेगी।
‘निर्भया’ यूपी पुलिस की ओर से तैयार किया गया एक मोबाइल एप है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हाल ही इसे नोएडा में लॉन्च किया गया था।
वहां की सफलता के बाद इसे जल्द ही लखनऊ सहित प्रदेश के सभी बड़े शहरों में लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है।
दिल्ली में निर्भया कांड के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने इसी नाम से एक मोबाइल एप्लीकेशन तैयार करवाया है। इसे युवतियां अपने एंड्रायड फोन पर डाउनलोड कर सकती हैं।
ऐसे काम करेगा
संकट के क्षणों में बस एक क्लिक करते ही युवती की लोकेशन का पता पुलिस कंट्रोल रूम को चल जाएगा और कुछ ही मिनटों में पुलिस उस लोकेशन पर मदद के लिए पहुंच जाएगी।
इसके साथ ही युवती के पांच परिचितों के पास भी युवती की लोकेशन का इमरजेंसी एसएमएस पहुंच जाएगा। यह मोबाइल एप गूगल प्ले या फिर यूपी पुलिस की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है। इसके बाद इसे यूपी पुलिस के पोर्टल पर रजिस्टर करना होता है।
रजिस्ट्रेशन में युवती को अपना नाम, फोन नंबर, पता, ई-मेल, जन्मतिथि व पांच परिचितों के मोबाइल नंबर पंजीकृत करने होते हैं। रजिस्टर का बटन दबाते ही मोबाइल पर एक यूनिक रजिस्ट्रेशन आईडी एसएमएस से मिलेगी।
इसको डालने पर यह मोबाइल एप काम करने लगता है। इसके लिए एंड्रायड ऑपरेटिंग सिस्टम 3 या इससे ऊपर के मोबाइल फोन होना जरूरी है।
ऐसे पता चलती है लोकेशन
-इस एप के लिए जीपीएस, इंटरनेट डाटा पैक व एसएमएस पैक एक्टिव होना जरूरी है।
-मोबाइल में यदि जीपीएस फंक्शन एक्टिव है तो कंट्रोल रूम व यूपी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को युवती की एकदम सही लोकेशन मिल जाती है।
-यदि मोबाइल में जीपीएस बंद है तो निर्भया एप उस टॉवर की लोकेशन बता देता है, जहां से एप का इस्तेमाल किया गया है। इसमें लोकेशन एरिया कोड भी आ जाता है। इससे लोकेशन तक पहुंचने में आसानी होती है।
यूपी पुलिस की पहल पर एसटीएफ आईजी आशीष कुमार गुप्ता का कहना है कि निर्भया मोबाइल एप को नोएडा में बतौर पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। वहां इसे अच्छा रेस्पांस मिल रहा है। शीघ्र ही प्रदेश के अन्य बड़े शहरों की युवतियां भी इसका इस्तेमाल कर सकेंगी। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।