प्रियंका वाड्रा में दम हो तो आएं सामने: सदस्यता खत्म करने की याचिका देने पर बिफरे पूर्व कांग्रेसी
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रायबरेली में अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा में शामिल होने वाले दिनेश सिंह ने एमएलसी सदस्यता खत्म करने के लिए कांग्रेस की ओर से दी गई याचिका को लेकर शनिवार को प्रियंका वाड्रा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस व रायबरेली जिले के लोकसभा प्रभारी प्रियंका वाड्रा को खरी खोटी सुनाई। एमएलसी ने कहा कि भाई राकेश सिंह को हरचंदपुर विधानसभा सीट से टिकट के बदले प्रियंका वाड्रा ने पहले ही उनसे इस्तीफा ले लिया था। अब सदस्यता के खिलाफ विधानपरिषद में याचिका दायर करने की क्या जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रियंका में दम हो तो सामने आएं और कहें कि उन्होंने एमएलसी पद का इस्तीफा नहीं लिया था।
जिला पंचायत सभागार में शनिवार को पत्रकारों से मुखातिब एमएलसी दिनेश सिंह ने कहा कि नसीमुद्दीन को कांग्रेस ने पार्टी में शामिल कर लिया लेकिन वह एमएलसी बने हुए हैं। ऐसे में कांग्रेस दोगली राजनीति कर रही है। क्या पूरे देश में ऐसी कोई नजीर है, जिसमें अब तक दो सदस्यों के दो तिहाई भाग का निर्धारण हो सका है।
उन्होंने कहा कि जब प्रियंका ने हमसे इस्तीफा ले ही लिया है तो उस इस्तीफे को क्यों नहीं सभापति के पास भेज देतीं। अगर उनमें नैतिकता है तो सभापति के समक्ष वह इस्तीफे को भेजें। मैं सभापति के यहां स्वीकार करूंगा कि ये हमारा इस्तीफा है।
एमएलसी ने दी बड़ा चुनाव लड़ने की आहट
एमएलसी दिनेश सिंह ने कहा कि मैं तो भाजपा जॉइन करने से पहले ही इस्तीफा देना चाहता था, लेकिन कुछ लोगों की सलाह से नहीं दे सका। रायबरेली के लोग अब एमएलसी के बजाय कोई बड़ा चुनाव लड़ाने का मन बना रहे हैं। वैसे मैं चाहता हूं, अगर पार्टी का आदेश होगा तो एक बार एमएलसी का चुनाव लड़कर लोकसभा चुनाव से पहले यह स्पष्ट कर दूंगा कि मैं कांग्रेस की बदौलत एमएलसी था या अपनी सेवाओं की बदौलत। उन्होंने कहा कि जिले से कांग्रेस अब साफ हो चुकी है।
'बडे़ नेताओं का नाम लेकर अपने पाप को छिपाने की कोशिश करना बंद करें'
कांग्रेस के जिलाध्यक्ष वीके शुक्ला ने एमएलसी दिनेश सिंह के आरोपों को झूठा करार दिया। जिलाध्यक्ष ने कहा कि दिनेश सिंह के भाई को टिकट देने के नाम पर प्रियंका ने कोई इस्तीफा नहीं लिया था। इस्तीफा विधान परिषद के सभापति को दिया जाता है। एमएलसी की सदस्यता चंद दिनों की है, इसी कारण वह हड़बड़ाए हुए हैं।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने अपने बयान में कहा कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी को बसपा ने पार्टी से निकाल दिया था, जिसकी वजह से विधान परिषद में असंबद्ध सदस्य के रूप में उन्हें मान्यता प्रदान की जा चुकी है। जबकि दिनेश सिंह को पार्टी से निकाला नहीं गया है। उन्होंने स्वयं भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां दो सदस्यों में एक सदस्य के पार्टी बदलने के कारण दल परिवर्तन के आधार पर सदस्यता समाप्त हो गई है।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि दिनेश सिंह कांग्रेस के बडे़ नेताओं का नाम लेकर अपने पाप को छिपाने की कोशिश करना बंद करें। वे शीघ्र ही बेनकाब हो जाएंगे। दिनेश सिंह अमेठी के एमएलसी दीपक सिंह की बात कर रहे हैं। उनको यह नहीं पता कि दीपक चुनाव लड़कर एमएलसी बने हैं। इससे पहले वे तीन बार क्षेत्र पंचायत सदस्य व दो बार ब्लॉक प्रमुख भी रह चुके हैं। उनकी पत्नी भी प्रमुख रह चुकी हैं। जिलाध्यक्ष ने कहा कि दिनेश सिंह अगला जो भी चुनाव लड़ेंगे, उसमें उनकी हैसियत जिले की जनता बता देगी।