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Mission Election : भाजपा ने बनाई है सपा-रालोद गठबंधन में सेंध लगाने की रणनीति, निगाहें जाट लैंड पर

Mon, 29 Aug 2022 11:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा सचिन मुद्गल, लखनऊ
सचिन मुद्गल, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 29 Aug 2022 11:55 AM IST
सार

Mission Election: चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करने से लोकसभा चुनाव में सपा और रालोद गठबंधन से संभावित नुकसान को कम किया जा सकेगा। आठ सीटों पर जाट वोट बैंक का बड़ा महत्व है। 
 

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Mission Election: BJP has made a strategy to break into the SP-RLD alliance
भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

भाजपा ने भूपेंद्र चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर ना केवल जाट वोट बैंक को साधा है बल्कि पश्चिमी यूपी में सपा-रालोद गठबंधन के असर को कम कर लोकसभा चुनाव 2024 में मिशन 80 की राह आसान करने की रणनीति रची है। पार्टी को इसका फायदा यूपी ही नहीं बल्कि प्रदेश की सीमा से जुड़े हरियाणा और राजस्थान के जाट लैंड में भी होगा।

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चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करने से लोकसभा चुनाव में सपा और रालोद गठबंधन से संभावित नुकसान को कम किया जा सकेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद, मेरठ, अलीगढ़, आगरा मंडल करीब दो दर्जन लोकसभा क्षेत्रों में जाट निर्णायक भूमिका अदा करते हैं जबकि करीब आठ सीटों पर जाट वोट बैंक का बड़ा महत्व है। 
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2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन ने 80 में से 64 सीटें जीती थी और 16 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी को जिन 16 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था उनमें आठ सीटें पश्चिमी यूपी की सहारनपुर, बिजनौर, नगीना, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, संभल और मैनपुरी सीट थी। वहीं पश्चिमी यूपी की बदायूं, फिरोजाबाद, मेरठ, बागपत और मुजफ्फर नगर सीट भाजपा ने चार हजार से 30 हजार मतों के करीबी अंतर से जीती थी। जानकारों का मानना है कि भूपेंद्र चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने से भाजपा को जाट वोट बैंक में बढ़त मिलेगी। इससे पश्चिमी यूपी में रालोद-सपा गठबंधन के असर को कम करने में मदद मिलेगी। इसका सीधा फायदा लोकसभा चुनाव 2024 में पार्टी को मिलेगा।
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क्षेत्रीय संतुलन बनाया
भाजपा ने पश्चिमी यूपी के नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर क्षेत्रीय संतुलन बनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूर्वांचल के गोरखपुर क्षेत्र से हैं वहीं अब प्रदेश अध्यक्ष पश्चिमी यूपी की प्रमुख जाटलैंड मुरादाबाद से बनाए गए हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि लगातार दूसरी बार पिछड़े वर्ग से प्रदेश अध्यक्ष बनाने का फायदा पश्चिमी यूपी के साथ अवध, बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्र में भी पार्टी को मिलेगा। करीब 31 वर्ष से पार्टी में सक्रिय रहने के कारण भूपेंद्र चौधरी को पूरे प्रदेश के सामाजिक, राजनीतिक और जातीय समीकरण की जानकारी है। 

पश्चिमी यूपी की राजनीति में पकड़ है
भूपेंद्र चौधरी की जाट समाज में पकड़ होने के साथ उन्हें पश्चिमी यूपी की राजनीति और सामाजिक समीकरण पर गहरी पकड़ है। गुर्जर, त्यागी, ब्राह्मण और सैनी समाज के नेताओं में उनकी पकड़ है। विधानसभा चुनाव से पहले जाट समाज की नाराजगी दूर करने की जिम्मेदारी चौधरी को सौंपी गई थी। शीर्ष नेताओं का मानना है कि पश्चिमी यूपी में सपा-रालोद गठबंधन के बावजूद जाट वोट भाजपा को दिलाने में भूपेंद्र चौधरी की भी बड़ी भूमिका रही।

तीन राज्यों में जाट के हाथ कमान
भाजपा ने उत्तरी भारत के तीन राज्यों में पार्टी की कमान जाट नेताओं को सौंपी है। राजस्थान में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां, हरियाणा में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ के बाद अब यूपी में भी भूपेंद्र चौधरी को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। साफ संकेत है कि लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर  पार्टी तीनों प्रदेशों में जाट वोट बैंक पर कब्जा जमाना चाहती है।

चुनौतियों से होगी चौधरी के सफर की शुरुआत
भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष पद के सफर की शुरुआत चुनौतियों के साथ होगी। चौधरी की पहली चुनौती क्षेत्रीय और जातीय संतुलन बनाते हुए अपनी नई टीम का गठन करना होगी। उसके बाद आगामी नगरीय निकाय चुनाव में पार्टी का परचम फहराना होगी।


प्रदेश में लगातार दूसरी बार भाजपा की सरकार बनने से कार्यकर्ताओं की सरकार और संगठन से बड़ी अपेक्षाएं हैं ऐसे में उनकी वाजिब अपेक्षाओं को पूरा करते हुए कार्यकर्ताओं को संतुष्ट भी करना होगा। सरकार के साथ आरएसएस और विचार परिवार के संगठनों से तालमेल बनाते हुए 2024 में केंद्रीय नेतृत्व की अपेक्षा के अनुसार सभी 80 सीटों पर भाजपा का परचम फहराना भी चौधरी के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।

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