खोए मूक-बधिर बच्चे ने ‘बजरंगी भाईजान’ स्टाइल में पहचाना घर
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फिल्म बजरंगी भाईजान में कलेंडर की तस्वीर देखकर मुन्नी के घर पहुंचने जैसी ही है 10 साल के मूक-बधिर बच्चे अंश की कहानी। जौनपुरका रहने वाला अंश 4 दिन पहले गायब हो गया था।
दो दिन पहले लखनऊ में लावारिश हालत में मिला। चाइल्डलाइन के कार्यकर्ताओं ने उसकी काउंसलिंग की तो उसने पेपर पर कुछ शब्द लिखे जिनमें उन्हें जौनपुर ही समझ आया।
कार्यकर्ता अमरेंद्र कुमार ने इन शब्दों को गूगल पर डालकर सर्च किया तो ‘उर्दू बाजार चौक जौनपुर’ के नाम से 17 सेकंड का एक वीडियो मिला, उन्होंने इसे अंश को दिखाया तो वह अपनी गलियां देखकर चहक उठा।
तब पुलिस की मदद से जौनपुर से उसके माता-पिता तको बुलाकर अंश को उसको सौंप दिया गया। अंश लखनऊ की इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों को रास्ते में मिला था।
उन्होंने उसे गुंडबा थाना पहुंचाया जहां से चाइल्ड लाइन के सुपुर्द किया गया। चाइल्ड लाइन ने उससे बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन वह ज्यादा कुछ समझा नहीं पा रहा था।
उसका मूक और बधिर होना बड़ी परेशानी बन रहा था। शुक्रवार को अमरेंद्र कुमार ने उससे बात करने की फिर से कोशिश की। उन्होंने उसे एक पेपर-पेन दिया, जिस पर अंश ने ‘कुर्दू बाजा जुनुपर’ लिखा। साथ ही अपने पिता का नाम ‘विनोद’ लिखा। अमरेंद्र ने अपनी अकल लड़ाई और अंश के इस कोड में से ‘जौनपुर’ को क्रैक कर दिया।
इशारों में समझाया घर का पता
हालांकि उन्हें आसानी से यकीन नहीं हुआ कि अपने घर से कोई बच्चा भटक कर इतनी दूर आ सकता है। अपने स्मार्ट फोन में उन्होंने ‘कुर्दू बाजा जौनपुर’ लिखकर सर्च किया तो गूगल ने कुछ ऑटो करेक्शन के साथ ‘उर्दू बाजार चौक जौनपुर’ के रिजल्ट दिए।
उसमें एक वीडियो भी नजर आया। अमरेंद्र ने इसे चला दिया। अंश भी पास ही बैठा था, तो उसे भी दिखाया। 17 सेकंड के इस वीडियो में वही गलियां दिखाई गई थीं, जहां से अंश भटक कर लखनऊ आ गया था। वीडियो में जैसे ही पंजाब नेशनल बैंक के एक एटीएम की झलक मिली, अंश खुशी से उलझने लगा।
अमरेंद्र ने वीडियो को बार बार रिपीट करके अंश को दिखाया, उससे और मालूमात करने लगा। अंश ने किसी तरह इशारों में समझाया कि एटीएम के पास एक गली है जहां उसका घर है।
इतना क्लू अमरेंद्र के लिए काफी था, उन्होंने तुरंत जौनपुर कोतवाली में फोन किया, जहां से उर्दू बाजार चौक की पुलिस चौकी का नंबर मिला।
पुलिस भी हैरान
अमरेंद्र ने चौकी के पुलिसकर्मियों से कहा कि वे चौक पर मौजूद पीएनबी के एटीएम के पास एक गली में विनोद नामक व्यक्ति के रहने और उसके मूक बधिर बच्चे के गुमशुदा होने के बारे पता करके बताएं।
पुलिसवाले हक्के-बक्के रह गए कि लखनऊ से कोई व्यक्ति किसी गली के बारे में कैसे बता सकता है। इस पर अमरेंद्र ने उन्हें यू-ट्यूब वीडियो और अमरेंद्र की कहानी समझाई।
पुलिस टीम तुरंत उस गली में गई और अंश के परिवार का पता लग गया। चार दिन से परेशान अंश की मां प्रेमलता और दादी संतोष देवी की बेटा मिलने की बात सुनकर जान में जान आई। वे लोग तुरंत लखनऊ के लिए रवाना हुए और शाम को यहां प्राग नारायण रोड स्थित बाल गृह में पहुंचे।
अमरेंद्र ने पहले भी गूगल से तलाशा है एक और घर
अंश को लेने उसकी दादी और पिता आए, उन्होंने बताया कि वह क्लास दो में विशेष स्कूल में पढ़ता है। वह मंगलवार को अपने घर से आईसक्रीम लेने के लिए निकला था और उसके बाद से लापता हो गया था। उन्होंने वादा किया कि वे अब उसे कभी घर से अकेला नहीं निकलने देंगे।
चाइल्ड लाइन कार्यकर्ता अमरेंद्र 2013 में एक बच्चे को इसी तरह उसके घर पहुंचा चुके हैं। उस दौरान एक बच्चे का अडॉप्शन किया जाने वाला था। वह बच्चा अपने घर के बारे में केवल सिरकुंडा बता पाया था।
अमरेंद्र ने काफी समय इंटरनेट पर इसे सर्च किया और उन्हें राजस्थान, यूपी के सीतापुर, मप्र के भोपाल सिरकुंडा नामक गांव मिले। यहां से पता कराया लेकिन उस बच्चे के अभिभावकों का पता नहीं चल सका था।
लेकिन फिर झारखंड में एक और सिरकुंडा का गांव मिला जहां से पड़ताल कराई गई तो बच्चे के अभिभावक उसे मिले। उन अभिभावकों के अनुसार वे अपने बच्चे को मृत मान चुके थे, लेकिन उसके वापस मिलने पर बेहद खुश हुए।