पाक, अफगानिस्तान व बांग्लादेश से आए अल्पसंख्यकों को देंगे नागरिकता : राजनाथ
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केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मजहब के आधार पर देश का विभाजन दुर्भाग्यपूर्ण था। इसकी वजह से तमाम विषम परिस्थितियां उत्पन्न हो गईं। पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान से बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक भारत आने को मजबूर हुए।
इनमें से कई के पास तो वीजा और पासपोर्ट भी नहीं बचा है। किसी का खो गया तो किसी की तारीख ही निकल गई। इनको राहत देने के लिए इनके पासपोर्ट व वीजा लीगलाइज कर दिए गए हैं। जो लोग लौटकर नहीं जाना चाहते हैं, उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी। इसके लिए संसद में विधेयक लाया गया है।
राजनाथ शनिवार को यहां गोमतीनगर स्थित सीएमएस स्कूल में अधिवक्ता परिषद के रजत जयंती सम्मेलन में बोल रहे थे। ‘भारतीय संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता : आंतरिक सुरक्षा के संदर्भ में’ विषयक सम्मेलन में गृहमंत्री ने सबको सस्ता, सुलभ तथा त्वरित न्याय दिलाने के लिए नेशनल लिटिगेशन पॉलिसी बनाने की भी घोषणा की।
सजा की आधी अवधि जेल में काट चुके विचाराधीन बंदी रिहा होंगे
गृहमंत्री ने कहा कि देश की जेलों में लगभग चार लाख बंदी हैं। इनमें लगभग दो तिहाई विचाराधीन हैं। सरकार ने फैसला किया है कि जिन विचाराधीन बंदियों ने निर्धारित सजा का आधा समय जेल में काट लिया है, उन्हें रिहा कर दिया जाए। इससे जेलों और न्यायालयों पर बोझ कम होगा। इसके लिए सभी मुख्यमंत्रियों को पत्र भेजा गया है। अधिवक्ता परिषद के लोग देखें कि उत्तर प्रदेश में भी इस पर अमल हो जाए।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जरूरी, लेकिन राष्ट्र की सुरक्षा की कीमत पर नहीं
राष्ट्रीय विधि आयोग के अध्यक्ष और सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ. बलवीर चौहान ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन राष्ट्र की सुरक्षा और समाज की अशांति की कीमत पर इसे नहीं दिया जा सकता।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति एपी शाही ने कहा कि स्वतंत्रता और स्वच्छंदता में भेद बहुत जरूरी है। प्रचार और प्रसार माध्यमों से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग करते वक्त आत्मनियंत्रण रखा जाना चाहिए।
परिषद के संरक्षक लालबहादुर सिंह ने कहा कि भारतीय संविधान में आज भारत की आत्मा के दर्शन नहीं होते। बीच में बनी सरकारों ने संविधान में भारतीय संस्कृति के दर्शन कराने वाले 12 चित्रों को हटा दिया। उन्होंने इन चित्रों को फिर से संविधान में शामिल कराने का आग्रह किया।
सम्मेलन को अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष शशिप्रकाश सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश सिंह ने भी संबोधित किया। इससे पहले अधिवक्ता हरगोविंद उपाध्याय व कुलदीप पति त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया।