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Lucknow News: साहित्य, सिनेमा और संगीत से सजा मेटाफर
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साहित्य, सिनेमा और संगीत के साथ ही बैंतबाजी, दास्तानगोई व किताबों पर चर्चा के बीच दो दिवसीय मे
लखनऊ। साहित्य, सिनेमा और संगीत के साथ ही बैंतबाजी, दास्तानगोई व किताबों पर चर्चा के बीच दो दिवसीय मेटाफर लिटफेस्ट के 13वें संस्करण का शनिवार को आगाज हुआ। हजरतगंज में नवल किशोर रोड पर स्थित ली प्रेस में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उद्घाटन सत्र का शुभारंभ किया। इस दौरान एक ही प्रांगण में बने तीन अलग-अलग मंचों पर 23 सत्रों का आयोजन किया गया।
ब्रजेश पाठक ने कहा कि तेजी से बदलाव के बावजूद लखनऊ ने कभी अपनी आत्मा और सांस्कृतिक संसार को नहीं भुलाया। शहर ने तांगे की सवारी से लेकर मेट्रो युग तक की यात्रा की है लेकिन यहां के लोगों के दिल में सांस्कृतिक मूल्य आज भी धरोहर की तरह बसे हैं। ब्रजेश पाठक ने पूर्व आईएएस अधिकारी व बाल साहित्यकार डॉ. अनिता भटनागर जैन की बाल कहानी कब्बू की उड़ान के हिंदी व अंग्रेजी संस्करण का विमोचन किया। यह एक कबूतर की कहानी है। इस अवसर पर फिल्म निर्देशक सुधीर मिश्रा, मेटाफर लिटरेरी फेस्टिवल की संस्थापक कनक रेखा चौहान और लखनऊ एक्सप्रेशन समिति के अध्यक्ष जयदीप नारायण माथुर आदि मौजूद रहे।
एक सत्र में बैटल्स ऑफ लैंड्स के विमोचन के साथ ही डॉ. वंदिता ने मन के भीतर चलने वाले ऊहापोह और बचपन के आघात पर चर्चा के साथ ही पर्यावरणीय चिंताओं, अनियंत्रित भूमि अधिग्रहण और बढ़ते उपभोक्तावाद पर भी चिंता व्यक्त की। एक सत्र में डॉ. संदीप कुमार की पुस्तक हाफ डॉक्टर पर चर्चा हुई, जिसमें उनके साथ सेवानिवृत्त डीजीपी सीआरपीएफ एपी माहेश्वरी और वरिष्ठ पत्रकार सुधीर मिश्रा मौजूद रहे। तीसरे सत्र ‘बातें गजलों-नज़्मों की’ में शायर अमिताभ सिंह बघेल, चंद्रशेखर वर्मा और अनीसुर रहमान ने उर्दू शायरी की रिवायतों, इतिहास और रूहानियत पर बातचीत की।
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अनिता भटनागर जैन ने किया बच्चों से संवाद
प्रेक्षागृह में आयोजित स्टोरी टेलिंग सत्र के दौरान सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. अनीता भटनागर जैन ने अपनी बाल पुस्तकों की शृंखला कब्बू की उड़ान, कुकुरुक्कू और पृथ्वी हमारी भी है... का परिचय बच्चों से कराया। उन्होंने कब्बू की उड़ान के अंश पढ़े। मनुष्य की तरह पशु-पक्षियों के भी परिवार होते हैं। केडी सिंह बाबू स्टेडियम से आए बच्चे कब्बू की कहानी बड़े ध्यान से सुनते रहे।
रिक्रिएटर होता है ट्रांसलेटर : यतींद्र मिश्र
जिंदगी गुलजार है... सत्र के दौरान लेखक यतींद्र मिश्र और सत्या सरन ने गीतकार गुलजार के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की। यतींद्र मिश्र ने कहा कि मेरी सभी किताबों का अनुवाद महिलाओं ने ही किया। ट्रांसलेटर, रिक्रिएटर होता है। गुलजार ने अपनी टूटन और तकलीफों को अपने लेखन में भी पिरोया। कनक रेखा चौहान के साथ बातचीत में गुलजार की फिल्मों बंदिनी से लेकर आंधी तक की चर्चा हुई। एक अन्य सत्र मिथ, मार्केट एंड मीनिंग : बिल्डिंग ब्रांड्स दैट इनड्युर में फिल्म मेकर ओपी श्रीवास्तव के साथ चर्चा की सत्या सरन, दिव्या भारद्वाज और डाॅ. सुदेश श्रीवास्तव ने। दास्तान-ए-कैफी में दास्तानगो हिमांशु बाजपेयी ने शिरकत की। अंतिम सत्र आलोकनामा में मशहूर शायर आलोक श्रीवास्तव ने गजलों के साथ ही संगीत व लिरिक्स पर चर्चा की।
सिनेमा सिखाता है जीने का तरीका : सुधीर मिश्रा
मशहूर फिल्म निर्देशक सुधीर मिश्रा और जयदीप नारायण मिश्रा ने सिनेमा पर चर्चा की। सुधीर मिश्रा ने चार्ली चैपलिन और वर्स पर कहा कि सिनेमा हमें जीने का तरीका सिखाता है, जो हमारे स्वयं के जीवन से निकलता है। उन्होंने दर्शकों को सिनेमा की स्टीयरिंग बताया। युवाओं से उन्होंने जिज्ञासा बनाए रखने, प्रश्न पूछने और अपनी राह स्वयं तलाशने की अपील की। इसके अलावा शिवमूर्ति की रचनात्मक दुनिया में लेखक से बातचीत हुई। इस्मत चुगताई पर चर्चा में शामिल रहीं आयशा अयूब। वाजिद अली शाह : ए लिटरेरी एंड कल्चरल लिगेसी किताब पर चर्चा में डॉ. अम्मार रिजवी, तलत फातिमा, डॉ. रोशनी तकी और चंदर प्रकाश शामिल हुए। बैंतबाजी में करामत गर्ल्स कॉलेज के विद्यार्थियों ने हुनर दिखाया।
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ब्रजेश पाठक ने कहा कि तेजी से बदलाव के बावजूद लखनऊ ने कभी अपनी आत्मा और सांस्कृतिक संसार को नहीं भुलाया। शहर ने तांगे की सवारी से लेकर मेट्रो युग तक की यात्रा की है लेकिन यहां के लोगों के दिल में सांस्कृतिक मूल्य आज भी धरोहर की तरह बसे हैं। ब्रजेश पाठक ने पूर्व आईएएस अधिकारी व बाल साहित्यकार डॉ. अनिता भटनागर जैन की बाल कहानी कब्बू की उड़ान के हिंदी व अंग्रेजी संस्करण का विमोचन किया। यह एक कबूतर की कहानी है। इस अवसर पर फिल्म निर्देशक सुधीर मिश्रा, मेटाफर लिटरेरी फेस्टिवल की संस्थापक कनक रेखा चौहान और लखनऊ एक्सप्रेशन समिति के अध्यक्ष जयदीप नारायण माथुर आदि मौजूद रहे।
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एक सत्र में बैटल्स ऑफ लैंड्स के विमोचन के साथ ही डॉ. वंदिता ने मन के भीतर चलने वाले ऊहापोह और बचपन के आघात पर चर्चा के साथ ही पर्यावरणीय चिंताओं, अनियंत्रित भूमि अधिग्रहण और बढ़ते उपभोक्तावाद पर भी चिंता व्यक्त की। एक सत्र में डॉ. संदीप कुमार की पुस्तक हाफ डॉक्टर पर चर्चा हुई, जिसमें उनके साथ सेवानिवृत्त डीजीपी सीआरपीएफ एपी माहेश्वरी और वरिष्ठ पत्रकार सुधीर मिश्रा मौजूद रहे। तीसरे सत्र ‘बातें गजलों-नज़्मों की’ में शायर अमिताभ सिंह बघेल, चंद्रशेखर वर्मा और अनीसुर रहमान ने उर्दू शायरी की रिवायतों, इतिहास और रूहानियत पर बातचीत की।
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अनिता भटनागर जैन ने किया बच्चों से संवाद
प्रेक्षागृह में आयोजित स्टोरी टेलिंग सत्र के दौरान सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. अनीता भटनागर जैन ने अपनी बाल पुस्तकों की शृंखला कब्बू की उड़ान, कुकुरुक्कू और पृथ्वी हमारी भी है... का परिचय बच्चों से कराया। उन्होंने कब्बू की उड़ान के अंश पढ़े। मनुष्य की तरह पशु-पक्षियों के भी परिवार होते हैं। केडी सिंह बाबू स्टेडियम से आए बच्चे कब्बू की कहानी बड़े ध्यान से सुनते रहे।
रिक्रिएटर होता है ट्रांसलेटर : यतींद्र मिश्र
जिंदगी गुलजार है... सत्र के दौरान लेखक यतींद्र मिश्र और सत्या सरन ने गीतकार गुलजार के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की। यतींद्र मिश्र ने कहा कि मेरी सभी किताबों का अनुवाद महिलाओं ने ही किया। ट्रांसलेटर, रिक्रिएटर होता है। गुलजार ने अपनी टूटन और तकलीफों को अपने लेखन में भी पिरोया। कनक रेखा चौहान के साथ बातचीत में गुलजार की फिल्मों बंदिनी से लेकर आंधी तक की चर्चा हुई। एक अन्य सत्र मिथ, मार्केट एंड मीनिंग : बिल्डिंग ब्रांड्स दैट इनड्युर में फिल्म मेकर ओपी श्रीवास्तव के साथ चर्चा की सत्या सरन, दिव्या भारद्वाज और डाॅ. सुदेश श्रीवास्तव ने। दास्तान-ए-कैफी में दास्तानगो हिमांशु बाजपेयी ने शिरकत की। अंतिम सत्र आलोकनामा में मशहूर शायर आलोक श्रीवास्तव ने गजलों के साथ ही संगीत व लिरिक्स पर चर्चा की।
सिनेमा सिखाता है जीने का तरीका : सुधीर मिश्रा
मशहूर फिल्म निर्देशक सुधीर मिश्रा और जयदीप नारायण मिश्रा ने सिनेमा पर चर्चा की। सुधीर मिश्रा ने चार्ली चैपलिन और वर्स पर कहा कि सिनेमा हमें जीने का तरीका सिखाता है, जो हमारे स्वयं के जीवन से निकलता है। उन्होंने दर्शकों को सिनेमा की स्टीयरिंग बताया। युवाओं से उन्होंने जिज्ञासा बनाए रखने, प्रश्न पूछने और अपनी राह स्वयं तलाशने की अपील की। इसके अलावा शिवमूर्ति की रचनात्मक दुनिया में लेखक से बातचीत हुई। इस्मत चुगताई पर चर्चा में शामिल रहीं आयशा अयूब। वाजिद अली शाह : ए लिटरेरी एंड कल्चरल लिगेसी किताब पर चर्चा में डॉ. अम्मार रिजवी, तलत फातिमा, डॉ. रोशनी तकी और चंदर प्रकाश शामिल हुए। बैंतबाजी में करामत गर्ल्स कॉलेज के विद्यार्थियों ने हुनर दिखाया।

साहित्य, सिनेमा और संगीत के साथ ही बैंतबाजी, दास्तानगोई व किताबों पर चर्चा के बीच दो दिवसीय मे