{"_id":"29f30e339311e2698a9faf67a7a131f4","slug":"merciless-doctor-ignore-pain","type":"story","status":"publish","title_hn":"गर्भवती को लगवाए अस्पतालों के चक्कर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गर्भवती को लगवाए अस्पतालों के चक्कर
मनीष कुमार सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 07 Jan 2014 09:10 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गर्भवती प्रसव पीड़ा से तड़पती रही लेकिन सरकारी महिला अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे भर्ती करने से मना कर दिया। घरवाले महिला को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए चक्कर लगाते रहे लेकिन डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा।
विज्ञापन
घबरा कर परिवार वाले महिला को लेकर प्राइवेट अस्पताल पहुंचे, जहां उसने ऑपरेशन से बच्चे को जन्म दिया।
मोहनलालगंज के सिसेंडी गांव के रहने वाले शंकर पाल ने पत्नी रीमा (23) को कुछ दिन पहले क्षेत्र के ही प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में डॉक्टरों ने चार तारीख को ऑपरेशन की बात कहकर सात हजार रुपये जमा करवा लिए।
विज्ञापन
सोमवार सुबह साढ़े छह बजे रीमा को प्रसव पीड़ा हुई तो अस्पताल में मौजूद इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर ने हालत खराब होने की बात कहकर उसे डफरिन अस्पताल भेज दिया।
घर वाले उसे प्राइवेट एंबुलेंस की मदद से रीमा को लेकर सुबह आठ बजे डफरिन अस्पताल पहुंचे लेकिन वहां मौजूद महिला डॉक्टर ने रीमा की गंभीर हालत के बावजूद उसे क्वीन मेरी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
विज्ञापन
घर वाले उसे लेकर क्वीन मेरी अस्पताल पहुंचे तो गार्डों ने उसे यह कहकर वापस कर दिया कि अभी कोई डॉक्टर नहीं है।
रीमा की गंभीर हालत देखते हुए एंबुलेंस ड्राइवर संजय ने चिनहट स्थित एक नर्सिंग होम में मरीज को भर्ती कराने की सलाह दी।
इसके बाद गर्भवती को गंभीर हालत में चिनहट के नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया जहां उसने ऑपरेशन के बाद एक शिशु को जन्म दिया।
शंकर पाल के चाचा सुरेश पाल और मां रमावती ने बताया कि डफरिन और क्वीन मेरी अस्पताल के डॉक्टरों ने गंभीर हालत के बावजूद उसे भर्ती नहीं किया गया।
घरवालों ने बताया कि वे लोग सीएमओ कार्यालय में शिकायत करने गए थे लेकिन वहां उनकी सुनवाई नहीं हुई।
दौड़भाग में खर्च हुए हजारों रुपये
परिजनों का आरोप था कि डॉक्टरों की लापरवाही से गर्भवती को सरकारी अस्पतालों में मिलने वाला मुफ्त इलाज नहीं मिल सका। परिजनों का आरोप था कि पहले तो इलाज के नाम पर सिसेंडी के अस्पताल ने सात हजार रुपए ले लिए।
अस्पतालों के चक्कर लगाने में एंबुलेंस को आठ सौ रुपये देने पड़े। इसके बाद चिनहट के प्राइवेट अस्पताल में ऑपरेशन के लिए नौ हजार रुपये देने पड़े।
सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों की लापरवाही के चलते करीब सत्रह हजार रुपये खर्च हो गए। शिकायत करने आए तो अधिकारियों ने सुनवाई करने की बजाय उसे वापस कर दिया।