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UP: मरीजों तक नहीं पहुंचीं जीवनरक्षक दवाएं, KGMU में पांच लाख की दवा बर्बाद, अब मामले में पर्दा डालने की कोशिश
Mon, 08 Jun 2026 01:57 PM IST
Bhupendra Singh
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Bhupendra Singh
Updated Mon, 08 Jun 2026 01:57 PM IST
सार
राजधानी में मरीजों तक जीवनरक्षक दवाएं नहीं पहुंचीं। लेकिन, KGMU में 5 लाख की दवाएं बर्बाद हो गईं। अब मामले में पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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लिंब सेंटर के बाहर फेंकी गई दवाएं।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के लिंब सेंटर स्थित एचआरएफ स्टोर से लगभग पांच लाख रुपये मूल्य की जीवनरक्षक और आवश्यक दवाएं स्टोर के बाहर खुले में कबाड़ की तरह फेंक दी गईं। इनमें से अधिकांश दवाओं की एक्सपायरी डेट इसी महीने (जून 2026) समाप्त हो रही है।
अधिकारियों ने नियमों के तहत समय रहते इन दवाओं का मरीजों में वितरण कराने या उन्हें वापस करने के बजाय खुले में फेंक दिया। इससे सरकारी धन की भारी बर्बादी हुई है। अब इस मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, एचआरएफ प्रबंधन और डॉक्टरों के बीच तालमेल की कमी के कारण ये दवाएं समय पर मरीजों तक नहीं पहुंच सकीं और एक्सपायर होने के कगार पर पहुंच गईं। नियमानुसार, जो दवाएं इस्तेमाल नहीं हो पातीं, उन्हें एक्सपायरी डेट से तीन महीने पहले ही संबंधित दवा कंपनियों को वापस कर देना चाहिए था, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते ऐसा नहीं किया गया। इसके अलावा, दवाओं के सुरक्षित निस्तारण के लिए तय सरकारी मानकों का भी पूरी तरह उल्लंघन किया गया है।
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मामला गंभीर है और इसकी पूरी जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच में यदि लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. केके सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयू
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अधिकारियों ने नियमों के तहत समय रहते इन दवाओं का मरीजों में वितरण कराने या उन्हें वापस करने के बजाय खुले में फेंक दिया। इससे सरकारी धन की भारी बर्बादी हुई है। अब इस मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है।
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सूत्रों के अनुसार, एचआरएफ प्रबंधन और डॉक्टरों के बीच तालमेल की कमी के कारण ये दवाएं समय पर मरीजों तक नहीं पहुंच सकीं और एक्सपायर होने के कगार पर पहुंच गईं। नियमानुसार, जो दवाएं इस्तेमाल नहीं हो पातीं, उन्हें एक्सपायरी डेट से तीन महीने पहले ही संबंधित दवा कंपनियों को वापस कर देना चाहिए था, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते ऐसा नहीं किया गया। इसके अलावा, दवाओं के सुरक्षित निस्तारण के लिए तय सरकारी मानकों का भी पूरी तरह उल्लंघन किया गया है।
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खुले में फेंकी गईं मुख्य दवाएं
- क्यूओग्रेस कैप्सूल्स : बैच नंबर-PKNHM 11 (उत्पादन : जुलाई 2024, एक्सपायरी : जून 2026)
- अमीनो एसिड इंजेक्शन : बैच नंबर-Lp 2405 (उत्पादन : अगस्त 2024, एक्सपायरी : जून 2026)
- क्लोटिन इंजेक्शन : बैच नंबर-V627104 (उत्पादन : जुलाई 2024, एक्सपायरी : जून 2026)
- मेगटम नोवो 1500 : बैच नंबर-24180529 (उत्पादन : जून 2024, एक्सपायरी : मई 2026)
- मैग्टम नोवो इंजेक्शन : (एक्सपायरी : जून 2026)
- नोक्साविट-10 : बैच एएमटी-6399
मामला गंभीर है और इसकी पूरी जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच में यदि लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. केके सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयू