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Lucknow News: राजकीय आयुर्वेद कॉलेज में दवाओं का संकट
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राजकीय आयुर्वेद कॉलेज।
लखनऊ। राजकीय आयुर्वेद कॉलेज के अस्पताल में इन दिनों दवाओं का गंभीर संकट छाया हुआ है। मरीजों को सामान्य दवाएं तक नहीं मिल पा रही हैं, जिससे उन्हें निजी मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। कॉलेज प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दवाओं का टेंडर हो चुका है और इसी महीने के भीतर सभी दवाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी।
राजकीय आयुर्वेद कॉलेज में काय चिकित्सा, गठिया, स्त्री रोग, बाल चिकित्सा समेत कई महत्वपूर्ण विभाग संचालित होते हैं। अस्पताल की ओपीडी में हर दिन लगभग 700 से 800 मरीज आते हैं। इन मरीजों को अस्पताल की डिस्पेंसरी से आधी-अधूरी दवाएं ही मिल रही हैं, जिससे उन्हें अपनी जरूरत की दवाएं ऊंची दरों पर बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं।
आयुष विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पहले दवाएं टेंडर के जरिये आरसी रेट पर खरीदी जाती थीं, लेकिन शासन के निर्देश के बाद अब टेंडर प्रक्रिया जेम पोर्टल से पूरी की गई है। अधिकारियों का दावा है कि एक सप्ताह के भीतर ही सभी दवाएं उपलब्ध हो जाएंगी।
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मरीजों ने बयां किया दर्द
खदरा निवासी लियाकत अली और उनकी पत्नी रुखसाना दो वर्षों से कमर व घुटने के दर्द का इलाज करा रहे हैं। सोमवार को उन्होंने ओपीडी में डॉक्टर को दिखाया। उन्होंने बताया कि डॉक्टर ने परचे पर चार से पांच तरह की दवाएं लिखीं, लेकिन अस्पताल से सिर्फ दो दवाएं मिलीं। बाकी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ीं।
इन दवाओं की है भारी कमी
काचनार गुगुल, त्रिफला गुगुल, संजीवनी वटी, लोहासव, अभ्यारिष्ट, योगराज गुगुल, महानारायण तेल, आरोग्यवर्दिनी वटी, चंद्रप्रभा वटी, दशमूलारिष्ठ, लवणभास्कर चूर्ण, हल्दी चूर्ण, आंवला चूर्ण, नीम चूर्ण, और पंचगुण तेल समेत कई आवश्यक दवाओं का स्टॉक अस्पताल की डिस्पेंसरी में खत्म हो चुका है।
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राजकीय आयुर्वेद कॉलेज में काय चिकित्सा, गठिया, स्त्री रोग, बाल चिकित्सा समेत कई महत्वपूर्ण विभाग संचालित होते हैं। अस्पताल की ओपीडी में हर दिन लगभग 700 से 800 मरीज आते हैं। इन मरीजों को अस्पताल की डिस्पेंसरी से आधी-अधूरी दवाएं ही मिल रही हैं, जिससे उन्हें अपनी जरूरत की दवाएं ऊंची दरों पर बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं।
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आयुष विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पहले दवाएं टेंडर के जरिये आरसी रेट पर खरीदी जाती थीं, लेकिन शासन के निर्देश के बाद अब टेंडर प्रक्रिया जेम पोर्टल से पूरी की गई है। अधिकारियों का दावा है कि एक सप्ताह के भीतर ही सभी दवाएं उपलब्ध हो जाएंगी।
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मरीजों ने बयां किया दर्द
खदरा निवासी लियाकत अली और उनकी पत्नी रुखसाना दो वर्षों से कमर व घुटने के दर्द का इलाज करा रहे हैं। सोमवार को उन्होंने ओपीडी में डॉक्टर को दिखाया। उन्होंने बताया कि डॉक्टर ने परचे पर चार से पांच तरह की दवाएं लिखीं, लेकिन अस्पताल से सिर्फ दो दवाएं मिलीं। बाकी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ीं।
इन दवाओं की है भारी कमी
काचनार गुगुल, त्रिफला गुगुल, संजीवनी वटी, लोहासव, अभ्यारिष्ट, योगराज गुगुल, महानारायण तेल, आरोग्यवर्दिनी वटी, चंद्रप्रभा वटी, दशमूलारिष्ठ, लवणभास्कर चूर्ण, हल्दी चूर्ण, आंवला चूर्ण, नीम चूर्ण, और पंचगुण तेल समेत कई आवश्यक दवाओं का स्टॉक अस्पताल की डिस्पेंसरी में खत्म हो चुका है।