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दवाइयों का पड़ने वाला है टोटा, जल्द ही खरीद लें जरूरी दवा

Mon, 12 Oct 2015 12:16 PM IST
Updated Mon, 12 Oct 2015 12:16 PM IST
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medical shops are closed on 14 october

अगर आपको दवाओं की जरूरत है तो उसे खरीद लें क्योंकि 14 अक्तूबर को दवा की थोक व फुटकर दुकानें बंद रहेंगी। केंद्र सरकार की दवाओं की ऑनलाइन बिक्री शुरू करने की तैयारी के विरोध में दवा कारोबारियों ने बंद का एलान किया है।

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दुकानें बंद करने के साथ ही अमीनाबाद से कैसरबाग होते हुए जीपीओ तक रैली भी निकाली जाएगी। हालांकि नर्सिंग होम और अस्पतालों के अंदर की दुकानें बंद से अलग रहेंगी। फिर भी परेशानी से बचने के लिए अपनी जरूरत की दवाएं पहले खरीद लें।
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केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के सरंक्षक गिरिराज रस्तोगी के मुताबिक राजधानी में दवा की कुल 72 हजार दुकानें हैं। इसमें 18 हजार थोक और 54 हजार फुटकर विक्रेता हैं। सभी दवा की दुकानें बुधवार को बंद रहेंगी।
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एसोसिएशन के प्रवक्ता विकास रस्तोगी का कहना है कि एक दिन दवा दुकान बंद रहने से पूरे देश में 230 करोड़ का कारोबार प्रभावित होगा। इसके बावजूद ऑनलाइन दवा बिक्री नहीं रोकी गई तो अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए दवा व्यापारियों को मजबूर होना पड़ेगा।

उन्होंने बताया कि भारत में आठ लाख दवा दुकानें हैं जिनमें ढाई लाख थोक और साढ़े पांच लाख फुटकर विक्रेता हैं। उत्तर प्रदेश में कुल दवा दुकानों की संख्या 1.12 लाख है। इनमें 72 हजार होलसेल और 40 हजार खुदरा दुकानें हैं।

नर्सिंग होम और अस्पतालों की दुकानें नहीं रहेंगी बंद

medical shops are closed on 14 october

केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के प्रवक्ता विकास रस्तोगी ने बताया कि रविवार को सभी रिटेलर की बैठक कर फैसला किया गया कि बंद में नर्सिंग होम और अस्पतालों के अंदर की दुकानों को शामिल नहीं किया जाएगा।

ये दुकानें खुली रहेंगी, बुधवार को बंद के साथ ही लखनऊ सहित रायबरेली, उन्नाव, फतेहपुर, लखीमपुर, हरदोई, गोंडा, श्रावस्ती, बलरामपुर आदि जिलों के दवा व्यापारी अमीनाबाद में इकट्ठा होंगे और जुलूस के रूप में कैसरबाग होते हुए जीपीओ हजरतगंज तक जाएंगे। इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष दिवाकर सिंह भी मौजूद रहेंगे।

क्यों है विरोध


केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन गिरिराज रस्तोगी ने बताया कि मोदी सरकार दवा की ब्रिकी ऑनलाइन करने की तैयारी में है। ये फैसला मरीजों की जान के साथ ही दवा व्यापार पर भी बुरा प्रभाव डालेगा।

इसमें कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन दवा मंगाने के लिए डॉक्टर के लिखे गए पर्चे की स्कैन कॉपी से ऑर्डर प्लेस कर देगा और उसकी दवा घर पहुंच जाएगी। इस नई व्यवस्था से दवाओं की कालाबाजारी तो बढ़ेगी ही उनकी गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा। इससे नशे के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं का कारोबार तेजी से बढ़ेगा। क्योंकि इस पर रोक लगाने की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है।

ऑनलाइन दवा बिक्री में बची दवा की वापसी संभव नहीं है जिसका सीधा नुकसान मरीजों को होगा। दवा दुकानों पर काम करने वाले करोड़ों लोग बेरोजगार होंगे।

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