यूपी में फिर से व्हाट्सएप पर मेडिकल का पेपर लीक
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के फार्मेसी विभाग में डिप्लोमा इन फार्मेसी (डी फार्मा) द्वितीय वर्ष का चौथा पेपर मंगलवार को आउट हो गया। परीक्षा शुरू होने से लगभग साढ़े तीन घंटे पहले ही प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार के मोबाइल पर व्हाट्सएप पर किसी ने पेपर भेजा।
प्रिंसिपल ने पेपर को गोपनीय रखा और परीक्षा शुरू होते ही एलटी वन स्थित एग्जामिनेशन रूम में परीक्षा अधीक्षक डॉ. पुनीत अवस्थी के साथ छापा मारा। स्टूडेंट के पास जो पेपर थे, वह हूबहू प्रिंसिपल को मिले पेपर से मिल रहा था। इसके बाद प्रिंसिपल ने पेपर निरस्त कर जांच का आदेश दे दिया।
फार्मेसी विभाग में द्वितीय वर्ष के स्टूडेंट का सेकेंड टर्मिनल एग्जाम 13 जुलाई से चल रहे हैं। मंगलवार दोपहर 2:30 बजे से ड्रग स्टोर इन बिजनेस मैनेजमेंट (डीएसबीएम) का पेपर होना था।
सुबह 11:08 बजे जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार के मोबाइल पर डीएसबीएम का पेपर आ गया। प्रिंसिपल ने पूरे मामले को गोपनीय रखा और परीक्षा शुरू होते ही छापा मारा। छापेमारी से पेपर दे रहे साठ स्टूडेंटों में हड़कंप मच गया। पेपर आउट की पुष्टि होने के बाद प्रिंसिपल ने परीक्षा निरस्त कर दी।
विभागाध्यक्ष ने लगाए लेक्चरर पर आरोप
फार्मेसी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आरएन ठाकुर ने पेपर लीक होने का सारा ठीकरा फार्मेसी विभाग के ही लेक्चरर डॉ. अजय कुमार शर्मा और लिपिक रवि सिंह पर लगाया है। उन्होंने बताया कि रवि सिंह ने जनगणना ड्यूटी पर जाने की बात कही और चला गया।
बाद में पता चला कि रवि उनके कक्ष में गया और वहां पेपर की हो रही फोटोकॉपी को देखने लगा। वहां मौजूद महिला कर्मी सुनीता ने बताया कि रवि कक्ष में आए थे और पेपर की फोटोकॉपी देख रहे थे। आरोप है कि डॉ. अजय कुमार शर्मा की शह पर रवि ने पेपर की फोटो खींची और बाद में इसे प्रिंसिपल के पास पहुंचा दिया गया।
विभागाध्यक्ष ने कहा कि दोपहर 2:34 बजे और 2:37 बजे उनके मोबाइल पर डॉ. अजय कुमार शर्मा का मैसेज आया कि वह समाज कल्याण विभाग जा रहे हैं। एग्जामिनेशन हॉल में ड्यूटी के दौरान वह बाहर चले गए।
कुछ देर बाद जब प्रिंसिपल छापा मारने आए तो डॉ. अजय शर्मा भी आ गए। इस संबंध में लेक्चरर डॉ. अजय कुमार शर्मा ने कुछ भी कहने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि वह अधिकृत नहीं हैं। इस बारे में उच्चाधिकारियों से बात करें।
मामला गंभीर, जांच होगी
प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार ने कहा कि पेपर सुबह ही आउट हो गया था। उन्होंने एग्जाम शुरू होने का इंतजार किया और फिर छापा मारा। पेपर को निरस्त कर दिया गया है। बुधवार की परीक्षाएं तय शेड्यूल पर ही होंगी। निरस्त पेपर बाद में कराया जाएगा।
इसकी डेट जल्द घोषित की जाएगी। प्रिंसिपल ने कहा कि विभागाध्यक्ष चाहे जो भी आरोप लगाएं, पेपर लीक होने की जिम्मेदारी तो विभागाध्यक्ष की ही होती है। बुधवार को जांच अधिकारी तय कर दिए जाएंगे। पूरी जानकारी उच्चाधिकारियों को भी दी जाएगी।
फार्मेसी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आरएन ठाकुर तीन सितंबर 2010 को डी फार्मा अंतिम वर्ष की परीक्षा में सामूहिक नकल कराने के आरोप में गिरफ्तार भी हो चुके हैं। इसके बाद प्रो. ठाकुर सस्पेंड हुए थे और उनकी खिलाफ जांच बैठा दी गई थी। बाद में प्रो. ठाकुर बहाल हो गए, लेकिन जांच की रिपोर्ट के बारे में आज तक किसी को पता नहीं चला।