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Lucknow News: छात्र के आत्महत्या मामले की जांच कराएगा मेडिकल कॉलेज
Sun, 24 Aug 2025 08:59 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sun, 24 Aug 2025 08:59 PM IST
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अयोध्या। एमबीबीएस के छात्र सागर पटेल की आत्महत्या के मामले की जांच कराई जाएगी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने फार्माकोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विनीता की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी बनाई है। टीम से एक सप्ताह में आख्या मांगी गई है।
जौनपुर के मछली शहर के निकामुद्दीनपुर निवासी समर बहादुर पटेल के बेटे सागर ने वर्ष 2024 में एमबीबीएस में दाखिला लिया था। वह गंजा स्थित मेडिकल कॉलेज परिसर में बने छात्रावास में एक सहपाठी के साथ रहते थे। शुक्रवार दोपहर बाद उनका शव छात्रावास के कमरे में फंदे से लटकता मिला था। मामले में परिजनों ने उपस्थिति व पहली परीक्षा में कम होने की बात कहकर उसे परीक्षा से वंचित करने का आरोप लगाया था। हालांकि, इसकी लिखित शिकायत उन्होंने नहीं की थी। फिर भी कॉलेज प्रशासन ने आरोपों का संज्ञान लेकर जांच शुरू कराई है।
प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा ने बताया कि जांच कमेटी में डॉ. विनीता के अलावा बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद शुक्ला, बेहोशी विभागाध्यक्ष डॉ. जेपी तिवारी, कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंजुमन चौधरी व मानसिक रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप यादव शामिल हैं। टीम को सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच करने व निर्धारित अवधि में आख्या देने को कहा गया है। किसी भी विभागाध्यक्ष व संकाय सदस्य की इसमें गलती मिलने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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अमर उजाला से बातचीत में मृतक के पिता समर बहादुर ने आरोप लगाया कि मौत से दो दिन पहले नंबर कम होने के बाद सागर एक विभागाध्यक्ष से मिला था। उनसे स्वयं को परीक्षा में शामिल होने देने का अनुरोध किया। एक मौका देने पर भविष्य में बेहतर अंक मिलने का दावा किया था। साथ ही अपनी बीमारी से भी उन्हें अवगत कराया, लेकिन उन्होंने उसकी एक न सुनी और किसी कीमत पर परीक्षा में शामिल न होने देने का दावा किया। उसने उनका पैर पकड़कर निवेदन किया तो उसे लात मार दी। वह एक अन्य सहायक आचार्य से मिला तो उन्होंने भी पल्ला झाड़ लिया। अपनी बहन को फोन करके उसने सारी बात बताई थी। उनका आरोप है कि अपनी इसी बेइज्जती से वह अवसाद में था। नहीं तो वह परीक्षा को लेकर इतनी जल्दी टूटने वाला व्यक्ति नहीं था।
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जौनपुर के मछली शहर के निकामुद्दीनपुर निवासी समर बहादुर पटेल के बेटे सागर ने वर्ष 2024 में एमबीबीएस में दाखिला लिया था। वह गंजा स्थित मेडिकल कॉलेज परिसर में बने छात्रावास में एक सहपाठी के साथ रहते थे। शुक्रवार दोपहर बाद उनका शव छात्रावास के कमरे में फंदे से लटकता मिला था। मामले में परिजनों ने उपस्थिति व पहली परीक्षा में कम होने की बात कहकर उसे परीक्षा से वंचित करने का आरोप लगाया था। हालांकि, इसकी लिखित शिकायत उन्होंने नहीं की थी। फिर भी कॉलेज प्रशासन ने आरोपों का संज्ञान लेकर जांच शुरू कराई है।
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प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा ने बताया कि जांच कमेटी में डॉ. विनीता के अलावा बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद शुक्ला, बेहोशी विभागाध्यक्ष डॉ. जेपी तिवारी, कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंजुमन चौधरी व मानसिक रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप यादव शामिल हैं। टीम को सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच करने व निर्धारित अवधि में आख्या देने को कहा गया है। किसी भी विभागाध्यक्ष व संकाय सदस्य की इसमें गलती मिलने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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अमर उजाला से बातचीत में मृतक के पिता समर बहादुर ने आरोप लगाया कि मौत से दो दिन पहले नंबर कम होने के बाद सागर एक विभागाध्यक्ष से मिला था। उनसे स्वयं को परीक्षा में शामिल होने देने का अनुरोध किया। एक मौका देने पर भविष्य में बेहतर अंक मिलने का दावा किया था। साथ ही अपनी बीमारी से भी उन्हें अवगत कराया, लेकिन उन्होंने उसकी एक न सुनी और किसी कीमत पर परीक्षा में शामिल न होने देने का दावा किया। उसने उनका पैर पकड़कर निवेदन किया तो उसे लात मार दी। वह एक अन्य सहायक आचार्य से मिला तो उन्होंने भी पल्ला झाड़ लिया। अपनी बहन को फोन करके उसने सारी बात बताई थी। उनका आरोप है कि अपनी इसी बेइज्जती से वह अवसाद में था। नहीं तो वह परीक्षा को लेकर इतनी जल्दी टूटने वाला व्यक्ति नहीं था।