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अलास्का कंपनी का एमडी गिरफ्तार
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गोसाईंगंज में अलास्का रीयल एस्टेट व अलास्का कमोडिटीज कंपनी खोलकर 59 करोड़ रुपये ठगने के आरोपी हरिओम यादव को शनिवार सुबह एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त टीम ने दबोच लिया। हरिओम ने निवेश की गई रकम पर हर साल 60 प्रतिशत लाभ का झांसा देकर 550 से अधिक लोगों को ठगा है। उसके खिलाफ गोसाईंगंज, कृष्णानगर और विकासनगर में कई केस दर्ज हैं। गोसाईंगंज पुलिस ने गत मंगलवार को उसके गिरोह के नौ सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
एसटीएफ के एसपी विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि गोसाईंगंज के सकटू का पुरवा निवासी हरिओम को सुल्तानपुर रोड स्थित चांदपुर सराय गांव से सुबह करीब पांच बजे पकड़ा गया। पूछताछ में उसने बताया कि वर्ष 2018 में अलास्का रीयल एस्टेट, अलास्का कमोडिटीज व अलास्का इंटरप्राइजेज नाम से तीन कंपनियां बनाई थीं। इन कंपनियों के ऑफिस गोसाईंगंज के सदरपुर करोरा स्थित अपनी जमीन पर शुरू किए। कंपनी में रकम निवेश करने पर वह हर साल 60 प्रतिशत लाभ का झांसा देता था। उसके जाल में फंसकर 550 से अधिक निवेशकों ने कुल 59 करोड़ रुपये निवेश किए। उसने दिल्ली, मुंबई और दुबई में भी कंपनियों के ऑफिस शुरू किए थे।
फरवरी 2019 में कृष्णानगर पुलिस ने उसका पांच करोड़ रुपये का कालाधन पकड़ा था। वह मौके से भाग निकला था, लेकिन मार्च में पुलिस की गिरफ्त में आ गया। डेढ़ माह बाद वह जेल से छूटकर आया तो लोग अपने रुपये वापस मांगने लगे। कंपनी में निवेश की रकम भी घट गई। इसी दौरान प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग ने उसकी कंपनियों की जांच शुरू कर दी। निवेशकों ने एफआईआर दर्ज कराई तो वह गायब हो गया। अपनी जमीनें व संपत्तियां बेचकर वह भागने की तैयारी कर रहा था कि पुलिस ने पकड़ लिया।
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हर माह जाता था दुबई
शातिर हरिओम यादव हर माह दुबई जाता था। वह निवेशकों से कहता था कि दुबई में एफजेडई में कंपनी का ऑफिस है। वह निवेशकों को व्यापार का झांसा देता था। उनसे कहता था कि दुबई में कारोबार से जो लाभ मिल रहा है, उससे ही 60 प्रतिशत का लाभ उन्हें दिया जाएगा। हालांकि, वह कारोबार की आड़ में दुबई में मौज-मस्ती और शॉपिंग करता था।
कथित पत्रकार को दिए थे सवा करोड़ रुपये
ठग हरिओम यादव को जब कृष्णानगर पुलिस ने गिरफ्तार किया था, तो उसने मामला मैनेज कराने के लिए एक कथित पत्रकार संतोष मिश्रा से संपर्क किया। ठग ने एसटीएफ को बताया कि संतोष मिश्रा खुद को एक न्यूज चैनल का मालिक बताता था। शासन-प्रशासन में पत्रकारिता का रौब झाड़ता था और दलाली का काम करता था। उसने संतोष को पुलिस-प्रशासन से अपना केस मैनेज कराने के लिए सवा करोड़ रुपये दिए थे।
अब तक 10 गिरफ्तार, पांच फरार
अलास्का कंपनी के नौ अधिकारियों को पुलिस ने 15 सितंबर को गिरफ्तार किया था। इसमें गोसाईंगंज के सेखनापुर निवासी सुभाष चंद्र यादव, हसनापुर गंगाखेड़ा का ललित वर्मा, बरुआ के सुरेंद्र यादव, मुंशीगंज के फजली का पुरवा का गजल सिंह यादव, बस्तौली गांव का आशीष वर्मा, सकटू का पुरवा निवासी ओम सिंह यादव, सुशांत गोल्फ सिटी के लेखनाघाट गजरिया का कौशलेंद्र यादव, बाराबंकी के सुबेहा में पांडेय पुरवा निवासी अवधेश मिश्रा और अमेठी के शिवरतनगंज स्थित डीधिया चिरौली निवासी नंद किशोर यादव शामिल थे। हरिओम यादव को शनिवार को पकड़ लिया गया। अभी हरिओम के पिता राम सिंह यादव, मुंशीगंज की रूपाली गुप्ता, रानीखेड़ा का राकेश कुमार, बाराबंकी के सतरिख स्थित सोहना गांव निवासी शैलेंद्र कुमार और अयोध्या कोतवाली के नियांवा बालक राम कॉलोनी निवासी बृजेंद्र श्रीवास्तव फरार हैं।
निजी बैंक में नौकरी भी कर चुका है शातिर
हरिओम यादव ने बताया कि वर्ष 2000 में उसने गोसाईंगंज चौराहा पर चाय और मिठाई की दुकान खोली थी। दुकान नहीं चली तो उसने 2003 में इलाके में ही सुपर पैथोलॉजी में 3500 रुपये महीने की नौकरी की। वर्ष 2010 में उसने सिविल अस्पताल के पास स्थित एक निजी बैंक में सेल्स एडवाइजर के रूप में काम किया। वर्ष 2016 में उसने अथर्व इन्फ्रा रीयल एस्टेट कंपनी शुरू की और किसानों की जमीन को कमीशन पर बेचने लगा। वर्ष 2018 में उसने अलास्का कंपनी बनाई थी।
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एसटीएफ के एसपी विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि गोसाईंगंज के सकटू का पुरवा निवासी हरिओम को सुल्तानपुर रोड स्थित चांदपुर सराय गांव से सुबह करीब पांच बजे पकड़ा गया। पूछताछ में उसने बताया कि वर्ष 2018 में अलास्का रीयल एस्टेट, अलास्का कमोडिटीज व अलास्का इंटरप्राइजेज नाम से तीन कंपनियां बनाई थीं। इन कंपनियों के ऑफिस गोसाईंगंज के सदरपुर करोरा स्थित अपनी जमीन पर शुरू किए। कंपनी में रकम निवेश करने पर वह हर साल 60 प्रतिशत लाभ का झांसा देता था। उसके जाल में फंसकर 550 से अधिक निवेशकों ने कुल 59 करोड़ रुपये निवेश किए। उसने दिल्ली, मुंबई और दुबई में भी कंपनियों के ऑफिस शुरू किए थे।
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फरवरी 2019 में कृष्णानगर पुलिस ने उसका पांच करोड़ रुपये का कालाधन पकड़ा था। वह मौके से भाग निकला था, लेकिन मार्च में पुलिस की गिरफ्त में आ गया। डेढ़ माह बाद वह जेल से छूटकर आया तो लोग अपने रुपये वापस मांगने लगे। कंपनी में निवेश की रकम भी घट गई। इसी दौरान प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग ने उसकी कंपनियों की जांच शुरू कर दी। निवेशकों ने एफआईआर दर्ज कराई तो वह गायब हो गया। अपनी जमीनें व संपत्तियां बेचकर वह भागने की तैयारी कर रहा था कि पुलिस ने पकड़ लिया।
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हर माह जाता था दुबई
शातिर हरिओम यादव हर माह दुबई जाता था। वह निवेशकों से कहता था कि दुबई में एफजेडई में कंपनी का ऑफिस है। वह निवेशकों को व्यापार का झांसा देता था। उनसे कहता था कि दुबई में कारोबार से जो लाभ मिल रहा है, उससे ही 60 प्रतिशत का लाभ उन्हें दिया जाएगा। हालांकि, वह कारोबार की आड़ में दुबई में मौज-मस्ती और शॉपिंग करता था।
कथित पत्रकार को दिए थे सवा करोड़ रुपये
ठग हरिओम यादव को जब कृष्णानगर पुलिस ने गिरफ्तार किया था, तो उसने मामला मैनेज कराने के लिए एक कथित पत्रकार संतोष मिश्रा से संपर्क किया। ठग ने एसटीएफ को बताया कि संतोष मिश्रा खुद को एक न्यूज चैनल का मालिक बताता था। शासन-प्रशासन में पत्रकारिता का रौब झाड़ता था और दलाली का काम करता था। उसने संतोष को पुलिस-प्रशासन से अपना केस मैनेज कराने के लिए सवा करोड़ रुपये दिए थे।
अब तक 10 गिरफ्तार, पांच फरार
अलास्का कंपनी के नौ अधिकारियों को पुलिस ने 15 सितंबर को गिरफ्तार किया था। इसमें गोसाईंगंज के सेखनापुर निवासी सुभाष चंद्र यादव, हसनापुर गंगाखेड़ा का ललित वर्मा, बरुआ के सुरेंद्र यादव, मुंशीगंज के फजली का पुरवा का गजल सिंह यादव, बस्तौली गांव का आशीष वर्मा, सकटू का पुरवा निवासी ओम सिंह यादव, सुशांत गोल्फ सिटी के लेखनाघाट गजरिया का कौशलेंद्र यादव, बाराबंकी के सुबेहा में पांडेय पुरवा निवासी अवधेश मिश्रा और अमेठी के शिवरतनगंज स्थित डीधिया चिरौली निवासी नंद किशोर यादव शामिल थे। हरिओम यादव को शनिवार को पकड़ लिया गया। अभी हरिओम के पिता राम सिंह यादव, मुंशीगंज की रूपाली गुप्ता, रानीखेड़ा का राकेश कुमार, बाराबंकी के सतरिख स्थित सोहना गांव निवासी शैलेंद्र कुमार और अयोध्या कोतवाली के नियांवा बालक राम कॉलोनी निवासी बृजेंद्र श्रीवास्तव फरार हैं।
निजी बैंक में नौकरी भी कर चुका है शातिर
हरिओम यादव ने बताया कि वर्ष 2000 में उसने गोसाईंगंज चौराहा पर चाय और मिठाई की दुकान खोली थी। दुकान नहीं चली तो उसने 2003 में इलाके में ही सुपर पैथोलॉजी में 3500 रुपये महीने की नौकरी की। वर्ष 2010 में उसने सिविल अस्पताल के पास स्थित एक निजी बैंक में सेल्स एडवाइजर के रूप में काम किया। वर्ष 2016 में उसने अथर्व इन्फ्रा रीयल एस्टेट कंपनी शुरू की और किसानों की जमीन को कमीशन पर बेचने लगा। वर्ष 2018 में उसने अलास्का कंपनी बनाई थी।