{"_id":"a7e8badfbde2a97be00435dbd7a1f258","slug":"md-in-ayurveda-from-up","type":"story","status":"publish","title_hn":"टूटने की कगार पर आयुर्वेद छात्रों का सपना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टूटने की कगार पर आयुर्वेद छात्रों का सपना
अमित यादव/लखनऊ
Updated Sat, 05 Oct 2013 02:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आयुर्वेद से एमडी करने का छात्रों का सपना एक बार फिर टूटने की कगार पर है। राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज लखनऊ में एमडी पाठ्यक्रम में प्रवेश की अनुमति देर से मिलने के कारण यह नौबत आई है।
विज्ञापन
आयुष विभाग से अनुमति पत्र मिलने के बाद सिर्फ एक माह का समय ही प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने के लिए बचा है। ऐसे में चिकित्सा शिक्षा और आयुर्वेद विभाग के अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं।
विज्ञापन
ऐसे में आयुर्वेद से पीजी करने का सपना देख रहे सूबे के छात्रों को एक बार फिर अन्य प्रदेशों के मेडिकल कॉलेजों में जाना होगा।
यूपी के इन शहरों को आज से मिली जीएनपी सुविधा
विज्ञापन
राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज लखनऊ में एमडी की 14 और पीलीभीत में 6 सीटें हैं। 2013-14 सत्र के लिए केंद्रीय भारतीय चिकित्सा परिषद (सीसीआईएम) ने लखनऊ मेडिकल कॉलेज की 14 सीटों पर प्रवेश की अनुमति दी है।
इन सीटों पर लगभग छह साल के लंबे अंतराल के बाद वर्ष 2012 में प्रवेश हुए थे। उस समय सोचा गया था कि आयुर्वेद में एमडी पाठ्यक्रम पर लंबे समय तक रहे संकट के बादल अब छंट गए हैं, लेकिन आयुष विभाग की लेटलतीफी और चिकित्सा शिक्षा विभाग की लापरवाही से 2013-14 में एमडी का सत्र शून्य होने की संभावना पैदा हो गई है।
सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार के आयुष विभाग और सीसीआईएम ने जून के पहले हफ्ते में राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज लखनऊ और पीलीभीत का निरीक्षण किया था। इसी के आधार पर एमडी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए हरी झंडी मिलनी थी।
निरीक्षण के बाद सीसीआईएम के अधिकारी रिपोर्ट दबाकर बैठ गए। वहीं प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने एक बार भी सीसीआईएम व आयुष विभाग के अधिकारियों से एमडी पाठ्यक्रम की अनुमति मिलने में देरी का कारण नहीं पूछा।
इसका नतीजा हुआ कि आयुष विभाग से गत 29 सितंबर को अनुमति का पत्र आयुर्वेद निदेशालय को मिला। पत्र मिलने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया, क्योंकि नियमानुसार मेडिकल कॉलेजों में पीजी प्रवेश की अंतिम तिथि 31 अक्तूबर है।
एक माह के अंदर प्रवेश के लिए विज्ञापन, परीक्षा और फिर प्रवेश प्रक्रिया पूरी कराने में अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। इसलिए आयुष विभाग से मिले अनुमति पत्र के मामले को दबा दिया गया। इसी बीच एक सप्ताह का समय और बीत गया। अब 2013-14 सत्र को शून्य करने की तैयारी चल रही है।
एमडी की 20 सीटें रह जाएंगी खाली
प्रदेश के राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों के 300 से अधिक छात्र-छात्राएं एमडी पाठ्यक्रम का सत्र नियमित होने का इंतजार कर रहे हैं।
राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज लखनऊ में 14 और पीलीभीत में छह सीटें होने के कारण एमडी पाठ्यक्रम के लिए छात्र-छात्राओं में जबर्दस्त प्रतिस्पर्धा रहती है।
इसके बावजूद चिकित्सा शिक्षा विभाग और आयुर्वेद निदेशालय के अधिकारी लगातार लापरवाही कर रहे हैं। वर्ष 2006 से दोनों कॉलेजों में एमडी में एडमिशन नहीं हुए।
2006 सत्र की प्रवेश परीक्षा के प्रवेश 2010 में किए गए थे। 2011-12 सत्र को शून्य घोषित कर दिया गया था। 2012-13 सत्र में किसी तरह 18 सीटों पर प्रवेश हुए।
इससे छात्रों को आशा बंधी कि 2013-14 में भी एमडी में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो जाएगी लेकिन चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही इस सत्र को भी शून्य की तरफ ले जा रही है।
चार आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों में दाखिले को हरी झंडी
बरेली, इलाहाबाद, लखनऊ और बांदा के राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों को 2013-14 सत्र में बीएएमएस पाठ्यक्रम शुरू करने की हरी झंडी मिल गई है।
केंद्रीय भारतीय चिकित्सा परिषद (सीसीआईएम) से अनुमति मिलने के बाद अब 170 सीटों पर छात्र-छात्राओं के प्रवेश लिए जा सकेंगे। इन सीटों पर सीपीएमटी-2013 से नए छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा या फिर 2011 बैच के छात्रों को, यह अभी तय नहीं हुआ है।
प्रदेश में लखनऊ, बांदा, झांसी, पीलीभीत, मुजफ्फरनगर, इलाहाबाद, वाराणसी और बरेली में आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज हैं।
इनमें से झांसी, इलाहाबाद, अतर्रा बांदा, मुजफ्फरनगर और पीलीभीत के मेडिकल कॉलेजों को 2011 से मान्यता नहीं है, जबकि लखनऊ, वाराणसी, इलाहाबाद और बरेली के निरीक्षण की रिपोर्ट जारी नहीं की गई थी।
इसी कारण सीपीएमटी-2013 की काउंसलिंग में इन आठों आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों की सीटों को शामिल नहीं किया गया था। निदेशक आयुर्वेद प्रो. आरआर चौधरी ने बताया कि जिन चार मेडिकल कॉलेजों को मान्यता मिल गई है, वहां बीएएमएस में प्रवेश लिए जाएंगे।
इन सीटों पर 2011 से मान्यता न होने के कारण जिन 200 छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में है, उन्हें प्रवेश देने का प्रस्ताव है। कोर्ट ने इन छात्र-छात्राओं को नए सत्र में प्रवेश देने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि झांसी, इलाहाबाद, अतर्रा बांदा, मुजफ्फरनगर और पीलीभीत के मेडिकल कॉलेजों को 2011 से मान्यता नहीं है, जबकि वहां छात्र-छात्राओं को प्रवेश दे दिए गए थे।
लखनऊ की और खबरें पढ़ें यहां...