मायावती ने दलितों से ज्यादा ब्राह्मणों को दिए टिकट
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मायावती ने गुरुवार को लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेंस के जरिए सफाई दी कि वह पूर्वांचल से लड़ने नहीं जा रही हैं।
उन्होंने यह भी साफ किया कि सतीश चंद्र मिश्रा या नसीमुद्दीन सिद्दीकी जैसे नेता भी आजमगढ़ या वाराणसी से चुनाव नहीं लड़ेंगे।
उन्होंने बताया कि लालगंज सीट से पहले ही बसपा ने डॉ. बलीराम का टिकट पक्का किया हुआ है। इसके आलावा, वाराणसी से माया विजय प्रकाश जायसवाल को ही चुनाव मैदान में उतारेंगी।
मायावती ने यह भी कहा कि वह जिन प्रत्याशियों के टिकट तय कर चुकी हैं, उनके टिकट नहीं काटे जाएंगे।
हिंदू-मुस्लिम रंग दे रहे दोनों
मायावती ने कहा कि समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल को हिंदू-मुस्लिम रंग देने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं।
माया ने अपनी स्थिति साफ करते हुए कहा कि उन्हें अकेले दम पर ही केंद्र में विकल्प के तौर पर उभरना है और सांप्रदायिक ताकतों से दूर रहना है।
उन्होंने कहा कि दोनों ही पार्टियां सिर्फ दंगे फैलाने का काम करती हैं। मायावती ने लोगों से भी अपील की कि वे सपा और भाजपा की चाल को समझकर सही जगह अपने वोट का इस्तेमाल करें।
मायावती ने कहा कि मैं सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की ही विचारधारा पर चुनाव लड़ूंगी और उम्मीद है कि बसपा बेहतर प्रदर्शन भी करेगी।
पढ़िए, किस जाति को मिले कितने टिकट
मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि उन्होंने टिकट का बंटवारा करते हुए हर वर्ग का ख्याल रखा है। बकौल मायावती, 'हमने 21 ब्राह्मणों को टिकट दिया है और 8 क्षत्रिय भी टिकट हासिल करने वालों में शामिल हैं।'
इसके अलावा, मायावती ने 18 मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट बांटे हैं। उन्होंने 15 ओबीसी प्रत्याशियों और 17 एससी प्रत्याशियों को भी प्रत्याशी बनाया है।
मायावती ने महिलाओं का भी खासा ख्याल रखते हुए सात महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह टिकट वितरण प्रत्याशियों की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए दिया गया है।
22 से शुरू होगा प्रचार अभियान
मायावती ने अपने चुनाव प्रचार का भी एलान कर दिया है। उन्होंने बताया कि 22 मार्च से वह देशभर के चुनाव प्रचार पर निकल रही हैं।
मायावती ने बताया कि उनका यह अभियान बिना रुके 9 मई तक जारी रहेगा। दिलचस्प बात यह है कि इस चुनाव अभियान का 90 फीसदी वक्त मायावती उत्तर प्रदेश को ही देगी।
मायावती की पहली चुनावी जनसभा तीन अप्रैल को उत्तर प्रदेश के बिजनौर में होगी। इसका भी एलान मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस में कर दिया।
मायावती ने इस मौके पर अपनी पार्टी की अपील भी जारी कर दी। उन्होंने कहा, 'हमारी पार्टी दूसरों की तरह मेनिफेस्टो जारी नहीं करती, लेकिन लोगों के लिए वोट की अपील जरूर जारी करते हैं।'
लालगंज सीट से उतरने की थी अटकलें
भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवर नरेंद्र मोदी के वाराणसी और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के आजमगढ़ से चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद, बसपा सुप्रीमो मायावती के भी आजमगढ़ से सटे लालगंज (सु.) संसदीय सीट से उतरने की अटकलें तेज हो गई थीं।
चर्चा यह भी थी कि वह मोदी व भाजपा अध्यक्ष राजनाथ
सिंह के सामने तगड़ा उम्मीदवार उतारकर मुसलमानों को यह मैसेज देने की
कोशिश कर सकती हैं कि भाजपा जैसे दल को रोकने में वास्तविक रूप से बसपा ही
गंभीर है।
ऐसे में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीशचंद्र मिश्र,
नसीमुद्दीन सिद्दीकी, स्वामी प्रसाद मौर्य व रामअचल राजभर जैसे
पदाधिकारियों को भी विपक्ष के बड़े कद वाले प्रत्याशियों के सामने आजमाया
जा सकता है।
मायावती के लखनऊ पहुंचते ही यह चर्चा तेज हो गई कि सतीशचंद्र मिश्र को वाराणसी व सिद्दीकी लखनऊ से प्रत्याशी हो सकते हैं।
लगातार हो रही हैं जनसभाएं
कई राज्यों के प्रत्याशी भी तय किए जा चुके हैं। प्रदेश में भी लोकसभा प्रभारी के रूप में समस्त सीटों पर प्रत्याशी चुनाव तैयारी में जुटे हैं। अब आधिकारिक तौर पर प्रत्याशियों का एलान भी हो चुका है।
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, स्वामी प्रसाद मौर्य व प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर की प्रदेश में लगातार जनसभाएं हो रही हैं, इसमें माया के एलान से और तेजी आने की उम्मीद है।
पार्टी नेता भी मानते हैं कि बसपा कार्यकर्ताओं में जोश भरने वाला माहौल पार्टी सुप्रीमो की जनसभाएं शुरू होने के बाद ही आएगा। यानी तीन अप्रैल के बाद।
इसके उलट भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव प्रदेश में कई बड़ी जनसभाएं पहले ही कर चुके हैं।