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बजरंग बली विवाद में कूदीं मायावती, बिना नाम लिए सीएम योगी पर किया हमला
Sat, 13 Apr 2019 12:02 PM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 13 Apr 2019 12:02 PM IST
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मायावती
- फोटो : अमर उजाला
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लोकसभा चुनाव में 'अली' और 'बजरंग बली' पर विवाद बढ़ता ही जा रही है। अब आजम खान के बाद बसपा सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी इस विवाद में कूद पड़ी हैं। हालांकि सीएम योगी ने शुक्रवार को चुनाव आयोग में दिए अपने बयान में सफाई दी है।
दरअसल, बसपा सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को रामनवमी पर ट्वीट किया। इस ट्वीट के जरिए मायावती ने बिना नाम लिए सीएम योगी पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि 'रामनवमी की देश और प्रदेशवासियों को बधाई व शुभकामनाएं, उनके जीवन में सुख और शान्ति की कुदरत से प्रार्थना। ऐसे समय में जब लोग श्रीराम के आदर्शों का स्मरण कर रहे हैं तब चुनावी स्वार्थ हेतु बजरंग बली व अली का विवाद व टकराव पैदा करने वाली सत्ताधारी ताकतों से सावधान रहना है।
इसके अलावा एक अन्य ट्वीट में मायावती ने जलियावाला बाग त्रासदी के 100 साल पूरे होने पर आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों को श्रद्घांजलि दी है। आगे उन्होंने कहा कि काश भारत सरकार इस अतिदुखद घटना के लिए ब्रिटिश सरकार से माफी मंगवाकर देश को संतोष दिलाने में सफल हो पाती।
वहीं, चुनाव आयोग में दिए जवाब में सीएम योगी ने कहा कि उनकी मंशा गलत नहीं थी। वह भविष्य में इस तरह के बयान देने में एहतियात बरतेंगे। योगी ने जवाब लखनऊ में मुख्य चुनाव अधिकारी को सौंपा। सीएम ने कहा, वह आयोग के बयान को लेकर आपत्ति और दिए नोटिस के आधार पर विश्वास दिलाते हैं कि भविष्य में सावधानी बरतेंगे और ऐसे बयानों से बचेंगे।
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दरअसल, बसपा सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को रामनवमी पर ट्वीट किया। इस ट्वीट के जरिए मायावती ने बिना नाम लिए सीएम योगी पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि 'रामनवमी की देश और प्रदेशवासियों को बधाई व शुभकामनाएं, उनके जीवन में सुख और शान्ति की कुदरत से प्रार्थना। ऐसे समय में जब लोग श्रीराम के आदर्शों का स्मरण कर रहे हैं तब चुनावी स्वार्थ हेतु बजरंग बली व अली का विवाद व टकराव पैदा करने वाली सत्ताधारी ताकतों से सावधान रहना है।
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रामनवमी की देश व प्रदेशवासियों को बधाई व शुभकामनायें तथा उनके जीवन में सुख व शान्ति की कुदरत से प्रार्थना। ऐसे समय में जब लोग श्रीराम के आदर्शों का स्मरण कर रहे हैं तब चुनावी स्वार्थ हेतु बजरंग बली व अली का विवाद व टकराव पैदा करने वाली सत्ताधारी ताकतों से सावधान रहना है।
विज्ञापन विज्ञापन— Mayawati (@Mayawati) April 13, 2019
इसके अलावा एक अन्य ट्वीट में मायावती ने जलियावाला बाग त्रासदी के 100 साल पूरे होने पर आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों को श्रद्घांजलि दी है। आगे उन्होंने कहा कि काश भारत सरकार इस अतिदुखद घटना के लिए ब्रिटिश सरकार से माफी मंगवाकर देश को संतोष दिलाने में सफल हो पाती।
जलियाँवाला बाग़ त्रासदी के आज 100 वर्ष पूरे हो गए। आजादी के लिए अपने प्राण की आहूति देने वाले शहीदों को श्रद्धा-सुमन अर्पित एवं उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना। काश भारत सरकार इस अति-दुःखद घटना के लिए ब्रिटिश सरकार से माफी मंगवाकर देश को संतोष दिलाने में सफल हो पाती।
— Mayawati (@Mayawati) April 13, 2019
वहीं, चुनाव आयोग में दिए जवाब में सीएम योगी ने कहा कि उनकी मंशा गलत नहीं थी। वह भविष्य में इस तरह के बयान देने में एहतियात बरतेंगे। योगी ने जवाब लखनऊ में मुख्य चुनाव अधिकारी को सौंपा। सीएम ने कहा, वह आयोग के बयान को लेकर आपत्ति और दिए नोटिस के आधार पर विश्वास दिलाते हैं कि भविष्य में सावधानी बरतेंगे और ऐसे बयानों से बचेंगे।
योगी के जवाब के बाद अब आयोग को तय करना है कि वह योगी पर क्या कार्रवाई करता है। योगी ने मेरठ की एक चुनावी रैली में कहा था कि यदि सपा, बसपा और उनके गठबंधन को अली पर भरोसा है तो उन्हें बजरंग बली पर भरोसा है।
वहीं गुरुवार की रात को सपा नेता आजम खान ने भी अली-बजरंग बली विवाद पर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि अली और बजरंग में झगड़ा मत कराओ, मैं तो एक नाम दे देता हूं। बजरंग अली मेरा तो दीन कमजोर नहीं हुआ। योगी जी आपने कहा था के हनुमान जी दलित थे, फिर आपके किसी साथी ने कहा कि हनुमान जी ठाकुर थे, फिर पता चला कि नहीं वह ठाकुर नहीं थे।
वह जाट थे, फिर किसी ने कहा वह हिंदुस्तान के थे ही नहीं, श्रीलंका के थे, लेकिन बाद में एक मुसलमान ने कहा कि हनुमान जी मुसलमान थे। झगड़ा ही खत्म हो गया। अब हम अली और बजरंगी कहें बजरंग अली तोड़ दे दुश्मन की नली। बजरंग अली ले लो जालिमों की बलि, ले लो बली बजरंग अली।
वहीं गुरुवार की रात को सपा नेता आजम खान ने भी अली-बजरंग बली विवाद पर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि अली और बजरंग में झगड़ा मत कराओ, मैं तो एक नाम दे देता हूं। बजरंग अली मेरा तो दीन कमजोर नहीं हुआ। योगी जी आपने कहा था के हनुमान जी दलित थे, फिर आपके किसी साथी ने कहा कि हनुमान जी ठाकुर थे, फिर पता चला कि नहीं वह ठाकुर नहीं थे।
वह जाट थे, फिर किसी ने कहा वह हिंदुस्तान के थे ही नहीं, श्रीलंका के थे, लेकिन बाद में एक मुसलमान ने कहा कि हनुमान जी मुसलमान थे। झगड़ा ही खत्म हो गया। अब हम अली और बजरंगी कहें बजरंग अली तोड़ दे दुश्मन की नली। बजरंग अली ले लो जालिमों की बलि, ले लो बली बजरंग अली।