बसपा को बहुमत में आने से रोकने के लिए हुआ है सपा-कांग्रेस गठबंधन: मायावती
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सपा व कांग्रेस में चुनावी गठबंधन ‘दिल मिले ना मिले, हाथ मिलाते रहिए’ के तर्ज पर किया गया है। यह भाजपा को परोक्ष रूप से लाभ पहुंचाने और बसपा को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने से रोकने की साजिश है।
ये बातें बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहीं। वह कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और सपा सुप्रीमो व सीएम अखिलेश यादव की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस और रोड पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रही थीं।
उन्होंने कहा, सपा-कांग्रेस गठबंधन को भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के कदम के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। पर, यह पूरी तरह से छलावा है। वास्तव में यह एक नापाक गठबंधन है। यह भाजपा के नफा-नुकसान को देखते हुए, उसी के इशारे पर किया गया है। सपा ने खास प्रयास कर बसपा को दोबारा पूर्ण बहुमत से सत्ता में आने से रोकने के लिए यह गठबंधन किया है।
सपा नेतृत्व सीबीआई के शिकंजे में
उन्होंने कहा कि सपा नेतृत्व सीबीआई के मार्फ त भाजपा के शिकंजे में है। यह बात सपा के पूर्व प्रमुख मुलायम सिंह यादव कई बार सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं। इसके अलावा सपा व भाजपा की मिलीभगत भी किसी से छिपी नहीं है।
यही वजह है कि प्रदेश में पिछले पांच वर्षों तक गुंडों, बदमाशों, माफि याओं, भ्रष्टाचारियों, अराजक, आपराधिक व सांप्रदायिक तत्वों का पूरी तरह से ‘जंगलराज’ रहा।
मायावती ने कहा कि प्रदेश की सपा सरकार में काम कम और अपराध व सांप्रदायिक दंगे ही ज्यादा बोलते रहे हैं। इसके कारण सपा सरकार का मुखिया एक दागी चेहरा घोषित हुआ, लेकिन कांग्रेस पार्टी उसी दागी चेहरे को अपना चेहरा बनाकर, उसके आगे घुटने टेक कर गठबंधन कर चुनाव लड़ रही है। यह अवसरवादी राजनीति बसपा के खिलाफ साजिश नहीं तो और क्या है?