माया ने बताया, यूपी में हाथी ने क्यों दिया 'अंडा'
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2009 में 20 लोकसभा सीटों से 2014 में एक भी सीट हासिल न कर पाने वाली बसपा सुप्रीमो ने अपनी करारी शिकस्त पर सफाई पेश करते हुए मुस्लिम व ब्राह्मणों पर जमकर निशाना साधा।
जातिगत राजनीति और सोशल इंजीनियरिंग की माहिर मानी जाने वाली मायावती ने कहा कि इस चुनाव में अपर कास्ट और मुसलमान गुमराह हो गए।
उन्होंने इसके लिए भाजपा के यूपी प्रभारी अमित शाह को जिम्मेदार बताया। मायावती ने शाह के प्रचार अभियान को झूठा और घिनौना बताते हुए उन पर जमकर निशाना साधा।
उन्होंने यहां तक कह डाला कि अमित शाह के भड़काऊ भाषण की वजह से चुनाव को सांप्रदायिक रंग मिला और शाह के षड्यंत्र की वजह से भी हमारी हार हुई है।
गुस्सा यूपीए पर, नुकसान हुआ हमारा
मायावती ने यह भी बताया कि लोगों के दिल में यूपीए सरकार के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा भरा हुआ था। इसका खामियाजा दूसरे दलों को भी भुगतना पड़ा।
हालांकि, भाजपा की अप्रत्याशित जीत पर भी मायावती ने बधाई न देते हुए कहा कि उन्हें तो 58 फीसदी लोगों ने नापसंद किया है।
मायावती ने कहा कि भाजपा को सिर्फ 42 फीसदी वोट हासिल हुए हैं, जिसका मतलब एक बड़ा वर्ग उन्हें सत्ता नहीं सौंपना चाहता था।
मायावती ने अपने वोटबैंक पर भी सफाई दी और बताया कि 2002 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले हमारे वोट बैंक में काफी वृद्घि हुई है। मायावती के मुताबिक, 2009 लोकसभा चुनाव के मुकाबले भी बसपा को नौ लाख वोट ज्यादा हासिल हुए हैं।
...और अब पछताएंगे मुस्लिम
मायावती ने कहा, 'हर सभा में मैंने मुस्लिमों से कहा था कि अपना वोट मत बांटना। लेकिन, दुख इस बात का है कि मेरे बार बार समझाने के बाद भी मुस्लिमों ने हमारी पार्टी की सलाह पर गौर नहीं किया।'
मायावती ने कहा कि मेरी बात को न सुनने का खामियाजा यह हुआ कि भाजपा को यूपी में अप्रत्याशित रूप से 71 सीटों पर जीत हासिल हुई।
मैंने कहा था कि 18 फीसदी मुस्लिम वोट यूपी में निर्णायक भूमिका अदा कर सकता है, लेकिन अब मुस्लिम समाज पछताएगा।
मायावती ने यह भी बताया कि 20 मई को उन्होंने चुनावी समीक्षा करने व अगले रिवाइवल मॉडल पर काम करने के लिए लखनऊ में बेहद अहम मीटिंग भी बुलाई है।
अपर कास्ट पर फोड़ा ठीकरा
मायावती ने अपर कास्ट के मतदाताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अपर कास्ट के लोग भी मोदी के साथ चले गए।
उन्होंने बताया कि भाजपा ने मेरे खिलाफ घिनौने और शैतानी भरे हथकंडे अपनाए। भाजपा ने जाति-धर्म के ध्रुवीकरण में अपर कास्ट के लोगों को बहलाकर अपने साथ जोड़ लिया।
गौरतलब है कि मायावती ने इस चुनाव में 21 सीटों पर ब्राह्मण जाति के प्रत्याशियों को टिकट दिया था। माना जा रहा था कि मायावती का सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला कारगर साबित होगा।
यह बुरी तरह फेल हुआ तो मायावती ने ठीकरा भी अपर कास्ट के नेताओं और वोटर्स के सिर पर फोड़ दिया।
दलितों पर जताया भरोसा
मायावती ने भजपा और कांग्रेस की सांठ-गांठ का आरोप लगाया और कहा कि दलितों को तोड़ने के लिए इन लोगों ने गलत प्रचार किया।
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी पिछड़ी जाति का नहीं है, फिर भी यह प्रचारित किया जाता रहा कि दलित भी अब जाति से ऊपर उठकर हिंदू होने के नाते मोदी को वोट दिया।
मायावती ने कहा कि दलित-हिंदू प्रचार सरासर गलत था और दलित मेरे साथ चट्टान की तरह खड़ा है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि बसपा यूपी में फिर वापसी करेगी।