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सांप्रदायिक शक्तियों का मजबूत होना खतरनाक: मायावती
लखनऊ/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क
Updated Sun, 21 Jul 2013 01:53 PM IST
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बसपा सुप्रीमो और प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री
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मायावती ने शनिवार को माल एवेन्यू स्थित पार्टी मुख्यालय में मध्य प्रदेश,
छत्तीसगढ़, राजस्थान और हरियाणा के नेताओं के साथ संगठन और चुनावी
तैयारियों की समीक्षा की।
उन्होंने हरियाणा को छोड़कर शेष तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए अधिकांश प्रत्याशियों को अंतिम रूप दे दिया। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक ताकतों का मजबूत होना देश हित में नहीं है। बसपा को इससे सचेत रहना है।
यूपीए और एनडीए पर भी बरसीं
मायावती ने देश के राजनीतिक हालात पर बोलते हुए यूपीए और एनडीए दोनों पर निशाना साधा। कहा कि, जिन राज्यों में भाजपा सत्ता में है वहां सांप्रदायिक ताकतें मजबूत होती हैं। सेकुलर ताकतें वहां कमजोर होती दिख रही है।
इस खतरनाक रुझान के लिहाज से बसपा को हर स्तर पर सचेत रहते हुए चुनावी तैयारियां करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, भाजपा शासित राज्यों के अलावा केंद्र में एनडीए सरकार का कार्यकाल भी संतोषजनक नहीं रहा।
एनडीए शासन में डॉ. अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान को बदलने का प्रयास किया गया था। बसपा ने इसका तीव्र विरोध किया तभी सरकार ने संविधान बदलने का इरादा त्यागा। इन बातों को लोगों तक सही रूप में पहुंचाने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है।
बसपा सुप्रीमो ने कहा, केंद्र की यूपीए सरकार हर मोर्चे पर विफल है। यूपीए शासन में व्यापक भ्रष्टाचार हुआ और जनहित एवं देशहित की अनदेखी की गई। सरकार के फैसलों से गरीब एवं कमजोर वर्ग ही नहीं सभी तबकों के लोग दुखी हैं।
मुस्लिमों के प्रति केंद्र सरकार उदासीन
मुस्लिमों के प्रति यूपीए सरकार का रवैया उदासीन रहा है। किसान, मजदूर, व्यापारी, कर्मचारी और अन्य पेशों में लगे लोग सरकार की गलत नीतियों से समस्याओं से घिरे हैं। युवा वर्ग बेचैन है। इसे ध्यान में रखकर अगली रणनीति तैयार की जाए।
उन्होंने कहा, बसपा सर्वसमाज की पार्टी है। पार्टी से ज्यादा बसपा एक मिशन है जिसका उद्देश्य सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त कर देश में ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ के नारे पर चलते हुए समतामूलक समाज की स्थापना करना है।
उन्होंने कहा कि यूपी में बसपा का मूवमेंट काफी मजबूत है। लक्ष्य आने वाले विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और हरियाणा में बेहतर रिजल्ट लाना है।
उन्होंने हरियाणा को छोड़कर शेष तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए अधिकांश प्रत्याशियों को अंतिम रूप दे दिया। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक ताकतों का मजबूत होना देश हित में नहीं है। बसपा को इससे सचेत रहना है।
यूपीए और एनडीए पर भी बरसीं
मायावती ने देश के राजनीतिक हालात पर बोलते हुए यूपीए और एनडीए दोनों पर निशाना साधा। कहा कि, जिन राज्यों में भाजपा सत्ता में है वहां सांप्रदायिक ताकतें मजबूत होती हैं। सेकुलर ताकतें वहां कमजोर होती दिख रही है।
इस खतरनाक रुझान के लिहाज से बसपा को हर स्तर पर सचेत रहते हुए चुनावी तैयारियां करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, भाजपा शासित राज्यों के अलावा केंद्र में एनडीए सरकार का कार्यकाल भी संतोषजनक नहीं रहा।
एनडीए शासन में डॉ. अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान को बदलने का प्रयास किया गया था। बसपा ने इसका तीव्र विरोध किया तभी सरकार ने संविधान बदलने का इरादा त्यागा। इन बातों को लोगों तक सही रूप में पहुंचाने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है।
बसपा सुप्रीमो ने कहा, केंद्र की यूपीए सरकार हर मोर्चे पर विफल है। यूपीए शासन में व्यापक भ्रष्टाचार हुआ और जनहित एवं देशहित की अनदेखी की गई। सरकार के फैसलों से गरीब एवं कमजोर वर्ग ही नहीं सभी तबकों के लोग दुखी हैं।
मुस्लिमों के प्रति केंद्र सरकार उदासीन
मुस्लिमों के प्रति यूपीए सरकार का रवैया उदासीन रहा है। किसान, मजदूर, व्यापारी, कर्मचारी और अन्य पेशों में लगे लोग सरकार की गलत नीतियों से समस्याओं से घिरे हैं। युवा वर्ग बेचैन है। इसे ध्यान में रखकर अगली रणनीति तैयार की जाए।
उन्होंने कहा, बसपा सर्वसमाज की पार्टी है। पार्टी से ज्यादा बसपा एक मिशन है जिसका उद्देश्य सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त कर देश में ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ के नारे पर चलते हुए समतामूलक समाज की स्थापना करना है।
उन्होंने कहा कि यूपी में बसपा का मूवमेंट काफी मजबूत है। लक्ष्य आने वाले विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और हरियाणा में बेहतर रिजल्ट लाना है।