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चुनावी गणित में तीन तलाक विरोधी महिलाओं के साथ खड़ी होने में झिझकीं माया

Thu, 27 Oct 2016 01:51 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Thu, 27 Oct 2016 01:51 PM IST
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mayawati plays safe game in three talaq matter
मायावती - फोटो : amar ujala

मुस्लिम महिलाओं के तीन तलाक के मामले में बसपा सुप्रीमों मायावती काफी दिन तक चुप्पी साधे रहीं। उनका बयान तब भी नहीं आया जब मुस्लिम महिलाएं सुप्रीमकोर्ट पहुंच गईं। वे तब भी नहीं बोलीं जब सुप्रीमकोर्ट में केंद्र सरकार ने तीन तलाक के खिलाफ अपनी राय दे दी। 

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वे तब बोलीं, जब सपा में सियासी घमासान चरम पर पहुंच गया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महोबा की खुली रैली में तीन तलाक  पर मुस्लिम महिलाओं का साथ देने का एलान कर दिया। 
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माना जा रहा है कि भाजपा के साथ खड़ी न नजर आने और थोक मुस्लिम वोटों को सहेजने के चक्कर में मायावती तीन तलाक की विरोधी मुस्लिम महिलाओं के साथ खड़ी नहीं हो पाईं।
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दलित चितंकों का मायावती के स्टैंड पर अलग-अलग नजरिया है। विश्लेषक बताते हैं कि सूबे के आम मुस्लिम मतदाता समाजवादी पार्टी के साथ अपने को ज्यादा जुड़ा हुआ पाता है।

लेकिन मायावती का 2017 के विधानसभा चुनाव का पूरा गणित ही मुस्लिमों के साथ पर टिका हुआ है। बेस दलित वोट बैंक में भाजपा की सेंधमारी से बेचैन बसपा किसी भी कीमत पर मुस्लिमों का पूरा साथ चाहती हैं। 

इसीलिए वह कई प्रत्याशियों का टिकट काटकर मुस्लिमों को दे चुकी हैं। वह यह भी कह चुकी हैं कि जितने मुसलमानों को बसपा ने टिकट दिया है, उतना सपा देकर तो दिखाए। संकेत है कि बसपा 100 से ज्यादा मुस्लिम प्रत्याशी विधानसभा चुनाव में उतार सकती है। 

मुसलमानों को कर रही है अपनी ओर आकृष्ट

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मायावती - फोटो : amar ujala

मुसलमानों को अपनी ओर आकृष्ट करने के लिहाज से हाल के दिनों में बसपा नेतृत्व ने कई  कदम उठाए जो ऐसे ही संकेत देते हैं। मसलन, राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी को बसपा में सबसे ज्यादा महत्व देने का संदेश दिया। 

भाजपा के निष्कासित नेता दयाशंकर सिंह के  बच्चों के खिलाफ आपत्तिजनक बयानबाजी को लेकर एफआईआर होने के बावजूद उन्होंने सिद्दीकी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

परिवारवाद का विरोध करने के बावजूद सिद्दीकी के एक बेटे को कई मंडलों में मुस्लिमों को जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी। इसके अलावा सिद्दीकी ही हैं जिन्हें हाल में अपने घर पर पत्रकारों से बात करने की इजाजत दी।

सिद्दीकी पार्टी के निर्विवाद मुस्लिम चेहरा पहले से हैं। इधर सपा में पारिवारिक कलह बढ़ने के बाद मुसलमानों में उलझन और मुस्लिम वोटों को लेकर मायावती की उम्मीदें बढ़ी हैं।

मायावती मुस्लिमों को दो खेमों में बांटने वाला बयान देकर अपनी गणित को कमजोर नहीं करना चाहतीं।दूसरा, वह ऐसा कोई संदेश नहीं देना चाहती हैं जिससे भाजपा के साथ खड़े होने का संदेश जाता हो। तीन तलाक का मुद्दा तो भाजपा ने ही उठाया है।
 

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