माया का सीबीआई जांच पर चालाकी भरा तर्क
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बसपा सुप्रीमो मायावती ने बदायूं रेप कांड में राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाने पर चालाकी भरा जवाब दिया है वहीं सपा को भी कठघरे में खड़ा किया।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने बदायूं दौरे का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि वह वहां राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि पीड़ित परिवारों को न्याय में मदद के लिए जा रही हैं।
मायावती ने तर्क दिया कि सीबीआई जांच को लेकर ढुलमुल रवैया अख्तियार कर रही सपा सरकार ने सीबीआई जांच का तब आदेश किया जब उसे उनके बदायूं जाने के कार्यक्रम की जानकारी मिली।
इसलिए नहीं जाती थीं दुखद घटनाओं पर
मायावती ने बदायूं जाने के पहले माल एवेन्यू स्थित सरकारी आवास पर पत्रकारों को खासतौर से यह बताने की कोशिश की कि वह सपा सरकार को राजनीतिक लाभ का आरोप लगाने का मौका न देने की वजह से अति दु:खद घटनाओं पर भी जाने से बचती रही हैं।
केवल मीडिया के जरिए अपनी बात रखकर या पार्टी नेताओं को भेजकर पार्टी की प्रतिक्रिया का इजहार करती रही हैं।
यही तरीका उन्होंने बदायूं में दो नाबालिग बहनों के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या की घटना पर भी अपनाया।
पर, जब सपा सरकार पीड़ित परिवारों की मांग के बावजूद सीबीआई जांच पर ढुलमुल रवैया अख्तियार किए रही तो मजबूरी में इस नियम को तोड़कर वहां जाने का फैसला करना पड़ा।
सपा करती है बलात्कारियों का बचाव
मायावती ने कहा कि वह इसलिए वहां जा रही हैं ताकि सरकार सीबीआई जांच को लटका न सके और केंद्र सरकार इस मामले की जल्द से जल्द समयबद्ध सीबीआई जांच करवाकर इसके मुख्य दोषियों को फांसी की सजा दिलाए।
मायावती ने कहा कि पीड़ित परिवार इसलिए सीबीआई जांच की मांग कर रहा है क्योंकि उसे एहसास है कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव बलात्कारियों की खुलेआम वकालत और दोषियों को फांसी की सजा का विरोध करते हैं। ऐसे में सपा सरकार में उन्हें न्याय नहीं मिल सकता।
बसपा अध्यक्ष ने कहा कि केवल अधिकारियों के तबादले, निलंबन या बर्खास्तगी से कानून-व्यवस्था सुधरने वाली नहीं है। यदि सरकार प्रदेश के हालात में बदलाव लाना चाहती है तो उसे अपनी पार्टी के आपराधिक तत्वों व गलत लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी।
यदि वह ऐसा नहीं कर सकती तो उसे इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सपा सरकार ऐसा न करे तो राज्यपाल को राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करनी चाहिए।
सपा अफसरों का राजनीतिकरण करती है
मायावती ने निवर्तमान मुख्य सचिव जावेद उस्मानी व नवनियुक्त मुख्य सचिव आलोक रंजन को अच्छा अफसर बताते हुए कहा है कि सरकार अधिकारियों का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि हटाए गए मुख्य सचिव में सभी खूबियां हैं। पर, सरकार ने उनको तैनात कर लोकसभा चुनाव में मुस्लिम वर्ग से स्वार्थ हासिल कर उन्हें हटा दिया।
नए मुख्य सचिव भी अच्छे अफसर हैं लेकिन सपा सरकार जिस तरह अधिकारियों का राजनीतिकरण कर रही है वह ठीक नहीं है। इससे अधिकारियों का मनोबल गिरता है।