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UP: वेद, पुराण और कुरान पर कार्यक्रम करते हैं मौलाना चतुर्वेदी, बोले- कोई यूं ही नहीं बनता मर्यादा पुरुषोत्तम

Sun, 21 Jan 2024 02:04 PM IST
ishwar ashish मोहम्मद इरफान, अमर उजाला, लखनऊ
मोहम्मद इरफान, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 21 Jan 2024 02:04 PM IST
सार

मौलाना वहीदुल्लाह अंसारी चतुर्वेदी ने  1980 में वेद पढ़ना शुरू किया। चारों वेंदों का पूर्ण ज्ञान होने पर उन्हें चतुर्वेदी नाम दिया गया। वो वेद, पुराण और कुरान की समानता पर आधारित कार्यक्रम करते हैं। उन्होंने सऊदी अरब में भी इस तरह के कार्यक्रम किए हैं।

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Maulana Wahidullah Ansari Chaturvedi speaks about Lord Ram.
मौलाना वहीदुल्लाह अंसारी चतुर्वेदी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

कोई यूं ही मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं बन जाता है। अपनी सौतेली मां को दिए पिता के वचन को निभाने के लिये श्रीराम ने ऐश-ओ-आराम की जिंदगी छोड़कर तकलीफों से भरी जिंदगी बिताने को बेझिझक 14 साल के वनवास को अपना लिया। उन्होंने पैगाम दे दिया कि दुनिया में मां-बाप से बढ़कर दूसरा कोई नहीं होता। हमें श्रीराम से मां-बाप की आज्ञा का पालन करना सीखना चाहिए। ये कहते-कहते वेद, पुराण और कुरान की आयतों की समानता के जरिये मोहब्बत का पैगाम देने वाले मौलाना वहीदुल्लाह अंसारी चतुर्वेदी भावुक हो गए।

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उन्होंने पंडित बृज नारायण चकबस्त की रामायण की उन पंक्तियों से अपनी बात को आगे बढ़ाया, जब वनवास जाने से पहले श्रीराम अंतिम बार अपने माता-पिता से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने रुखसत हुआ वो बाप से लेकर खुदा का नाम, राहे वफा की मंजिलें-अव्वल हुई तमाम...। उन्होंने कहा कि सभी धार्मिक किताबें मोहब्बत का पैगाम देती हैं लेकिन धर्म के ठेकेदारों ने धर्म में मिलावट कर लोगों को गुमराह किया है।
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चारों वेदों और 18 पुराणों के जानकार है चतुर्वेदी
मौलाना वहीदुल्लाह अंसारी चतुर्वेदी अपने नाम में छिपे राज के बारे में कहते हैं कि वर्ष 1980 से वेद पढ़ना शुरू किया और चारों वेदों का पूर्ण ज्ञान हासिल करने के बाद चाहने वालों ने चतुर्वेदी नाम दे दिया। मौलाना ने चारों वेदों के बाद 18 पुराणों पर भी महारत हासिल की है। विभिन्न लेखकों की रामायण, गीता और बाइबिल का भी ज्ञान अर्जित कर रखा है। उन्हें हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी, अरबी और संस्कृत भाषाओं में महारत है।


कल्कि पुराण में आखिरी नबी का विवरण
वेद, पुराण और कुरान में समानताओं का जिक्र करते हुये मौलाना चतुर्वेदी ने कहा कि कल्कि पुराण में कल्कि अवतार के रूप में मुसलमानों के आखिरी नबी मोहम्मद साहब का जिक्र है। उन्होंने आदम-हौवा, मनु-शतरूपा, एडम-ईव एक ही है। इसी तरह से अल्लाह की बड़ाई करने वाली अरबी में जहां सात आयत हैं तो वहीं संस्कृत में भी सात श्लोक हैं।

गीता का कर रहे उर्दू अनुवाद
मौलाना वहीदुल्लाह चतुर्वेदी मौजूदा वक्त में बाबूराव कुमठेकर की ज्ञानेश्वरी गीता का उर्दू अनुवाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश्वरी गीता असली भगवतगीता के काफी करीब है।

वेद-कुरान में समानता पर विदेश में भी किए कार्यक्रम
मौलाना चतुर्वेदी वेद, पुराण और कुरान में समानता को लेकर सऊदी अरब में भी कार्यक्रम कर चुके हैं। बताया, 2008 में कार्यक्रम में उन्हें डेढ़ लाख रुपये का पुरस्कार मिला था।

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