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सपा के साथ हो रही है घुटन: तौकीर रजा
राजेंद्र सिंह/लखनऊ
Updated Fri, 06 Dec 2013 12:09 PM IST
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इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग के सलाहकार मौलाना तौकीर रजा खान फिर सरकार से खफा हैं।
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उन्होंने गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलकर अपनी नाराजगी जाहिर भी कर दी।
तौकीर रजा ने कहा कि मौजूदा हालात में मुसलमानों में बेचैनी है। पुलिस-प्रशासन के सौतेले व्यवहार से उनमें असुरक्षा की भावना बढ़ी है। समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो लोकसभा चुनाव में भारी नुकसान हो सकता है।
सीएम से बोले, हो चुके हैं सौ दंगे
मौलाना तौकीर रजा सरकार के कामकाज पर पहले भी उंगली उठाते रहे हैं। गुरुवार को उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें पत्र भी सौंपा। कहा, कोसी कलां से मुजफ्फरनगर तक प्रदेश में छोटे-बड़े सौ दंगे हो चुके हैं। प्रदेश की अनेक मस्जिदों में तालाबंदी है, झूठी शिकायतों पर जिला प्रशासन ने नमाज पढ़ने पर रोक लगा रखी है।
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मुसलमानों से संबंधित निगम, बोर्ड और ट्रस्टों में नियुक्तियां नहीं की गई हैं। इससे लोगों का नुकसान हो रहा है। उर्दू मोअल्लिम वालों की समस्या का समाधान नहीं हो पाया।
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अदीब हाईस्कूल के समकक्ष हैं, फिर भी दसवीं पास होने का प्रमाणपत्र मांगा जाता है। केंद्र सरकार से धन उपलब्ध होने के बावजूद मदरसा मॉडर्न शिक्षकों के वेतन का वितरण नहीं हो रहा है। सपा के घोषणापत्र में मुस्लिमों को रिजर्वेशन देने की बात कही गई थी, उस पर अभी तक कुछ नहीं हुआ।
लोग सवाल करते हैं, जवाब नहीं दे पाता
तौकीर रजा ने कहा कि जिलों के दौरों के समय उनसे ये सारे सवाल पूछे जाते हैं। लेकिन, वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते। दंगा पीड़ित कैंपों में रहने वाले लोगों से मुआवजे के लिए फार्म भरवाए गए कि वे मदद मिलने के बाद वे गांवों में नहीं लौटेंगे।
आपत्ति होने पर संशोधित शासनादेश जारी कर दिया गया, लेकिन सरकार की नीति और नीयत को लेकर लोग आशंकित हैं।
उन्होंने कहा, बरेली में छह ऐसी मस्जिद हैं, जहां नमाज पढ़ने से रोका गया है या मरम्मत पर पाबंदी लगाई गई है। इससे समझा जा सकता है कि पूरे प्रदेश में कितना अन्याय हो रहा है।
उन्होंने कहा, इन तमाम चीजों को जल्द ठीक न किया गया तो लोकसभा चुनाव में भारी नुकसान का अंदेशा है।
गठबंधन की शर्तों पर अमल नहीं, हो रही घुटन
तौकीर रजा खान ने मुख्यमंत्री से यह भी कहा कि इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल और समाजवादी पार्टी के बीच फिरकापरस्त ताकतों को रोकने और सेकुलर आइडियोलॉजी को बढ़ावा देने को लोकसभा चुनाव के लिए तीन शर्तों पर गठबंधन हुआ था।
इनमें से किसी भी शर्त पर अमल नहीं किया गया। मौलाना ने कहा कि न तो दंगा जांच आयोग का गठन हुआ है और न ही पीसीएस (जे) में चालू वर्ष में उर्दू के पेपर को बहाल किया गया।
बेकसूर लोगों से मुकदमें भी वापस नहीं हुए। तीन शर्तों पर अभी तक सिर्फ आश्वासन मिले हैं। इन हालातों में इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल को घुटन महसूस हो रही है।
मौलाना ने कहा, नहीं दिया इस्तीफा
मौलाना तौकीर ने सपा सरकार के कामकाज पर उंगली उठाते हुए नाखुशी जरूर जाहिर की है, लेकिन अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है। मोबाइल पर बातचीत में उन्होंने कहा, पता नहीं कैसे दिन भर अफवाह फैली रही कि मैंने इस्तीफा दे दिया है। मैंने इस्तीफा नहीं दिया है।