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कोरोना वैक्सीन विवाद पर बोले मौलाना- जान है तो जहान है

Sun, 27 Dec 2020 09:09 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sun, 27 Dec 2020 09:09 PM IST
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Maulana speaks on Corona vaccine controversy - Jaan hai to jahan hai
कल्बे जवाद - फोटो : अमर उजाला
कोविड-19 के वैक्सीन में पोर्क (सूअर का मांस) जिलेटिन के उपयोग को लेकर पूरी दुनिया में इसके हराम व हलाल होने की चर्चा तेज हो गई है। वहीं इस मुद्दे पर प्रदेश के मौलानाओं का कहना है कि सबसे अहम इंसानों की जिंदगी है। वैक्सीन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। ऐसे में वैक्सीन का इस्तेमाल पूरी तरह जायज है। 
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इंसान की जान बचाना जरूरी
शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद का कहना है कि इस्लाम में इंसान की जान बचाने को वाजिब किया गया है। इस्लाम मजहब में तमाम चीजें हैंए जिसे हराम करार दिया गया है लेकिन वही चीजें जब किसी इंसान की जान बचाने के लिए जरूरी हो और उसका कोई विकल्प भी न हो तो वो हराम चीज भी इस्लाम की नजर में हलाल हो जाती है। ऐसे में कोरोना वैक्सीन हराम कैसे हो सकती हैए क्योंकि कोरोना से बचने का कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है और न ही किसी को ये मालूम है कि वैक्सीन किस चीज से बनाई गई है।
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विकल्प नहीं तो दवा में हराम चीज भी हलाल 
सुन्नी धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली का कहना है कि इस्लाम मे सुनी सुनाई बातों पर फैसला लेना ही नाजायज है। बगैर किसी तस्दीक के किसी चीज को हराम या हलाल कैसे कह जा सकता है। जो लोग कोरोना वैक्सीन को हराम कह रहे हैं, उन्हें ये बताना चाहिए कि उन्होंने किस डाक्टर से जानकारी ली है। इस्लाम मजहब में जान की हिफाजत को सबसे अहम बताया गया है। पैगम्बरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब ने दवा के जरिये इलाज कराने का हुक्म दिया है। कोरोना बीमारी से दुनिया भर में तमाम लोग मर चुके है। इस बीमारी के इलाज का कोई विकल्प भी नहीं है। अगर किसी दवा में कोई हराम चीज भी शामिल हो और जान बचाने के लिए उसका कोई विकल्प न हो तो वो ली जा सकती है। मेरी सभी से गुजारिश है कि पोलियो वैक्सीन की तरह कोरोना वैक्सीन के लिए अफवाह न फैलाएं बल्कि वैक्सीन का इंतजार करें और डॉक्टर की सलाह लें।
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अभी कुछ कहना जल्दबाजी

Maulana speaks on Corona vaccine controversy - Jaan hai to jahan hai
दारुल उलूम देवबंद
दारुल उलूम देवबंद के नायब मोहतमिम अब्दुल खालिक मद्रासी का कहना है कि अभी वैक्सीन को लेकर हमारे सामने ऐसी कोई बात नहीं आई है, लिहाजा अभी इस पर कुछ कहना उचित नहीं है। वहीं फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मुफती अरशद फारूकी का कहना है कि अमेरिका, फ्रंास, चीन और रूस सहित कोविड-19 वैक्सीन बनाने का दावा कर रहे हैं। इसमें उन्हें सफलता भी मिलेगी। लेकिन वैक्सीन में पोर्क के उपयोग को लेकर जिस तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं, उसके लिए जरूरी है कि उलमा-ए-शरीयत इस बात से वाकिफ हों कि उसे किन चीजों से तैयार किया गया है। वे हराम है या हलाल इन शंकाओं को दूर करना होगा। इसके लिए एक बोर्ड का गठन हो जिसमें शरीयत के जानकारों को शामिल किया जाए। ताकि मुस्लिम समाज उसकी जांच पर भरोसा कर सके। 

हालात पर निर्भर करेगा फैसला
वैक्सीन मामले में बरेलवी उलमा का मानना है कि अभी इस मुद्दे पर कोई फैसला लेना या कुछ कहना जल्दबाजी होगी। आला हजरत दरगाह स्थित मरकजी दारुल इफ्ता के मुफ्ती अब्दुर्रहीम नश्तर फारूकी का कहना है कि अभी चूंकि कोरोना वैक्सीन के बारे में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है इसलिए कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। वैसे अगर वैक्सीन में नाजायज जानवरी की चर्बी का इस्तेमाल हुआ है तो यह जायज नहीं हो सकता, लेकिन अगर इसका कोई विकल्प नहीं है और जान बचाने के लिए जरूरी है तो गौर किया जा सकता है।

 फिर भी अंतिम तौर पर कुछ भी कहना मुनासिब नही होगा क्योंकि यह भी देखना है कि बाजार में वैक्सीन आती कौन सी है। वहीं आला हजरत दरगाह स्थित इस्लामिक रिसर्च सेंटर के अध्यक्ष मुफ्ती मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का कहना है कि इस्लामी लिहाज से अगर कोई भी दवा जिसमें नाजायज चीज की मिलावट की गई है तो ऐसी दवा को खाना-पीना या टीका लगाना नाजायज है। हालांकि इसके इस्तेमाल के लिए अभी एकदम मना कर देना भी जल्दबाजी होगी।
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