कुर्ता-पायजामा पहनने पर कल्बे सादिक का हुआ अपमान
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अंग्रेज चले गए। पर, अंग्रेजियत की छाप है कि मिटती नहीं। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना डॉ. कल्बे सादिक शनिवार को इसी अंग्रेजियत के शिकार हो गए।
उन्हें एमबी क्लब के गार्डों ने सिर्फ इसलिए क्लब में जाने से रोक दिया कि वे कुर्ता-पायजामा पहने थे। तुर्रा यह कि गार्डों ने बड़े ठसक के साथ पहले उन्हें साइन बोर्ड पढ़ने को कहा, जिस पर ड्रेस कोड की पाबंदी लिखी थी।
डॉ. कल्बे सादिक ईश्वर चाइल्ड वेलफेयर फाउंडेशन के स्थापना दिवस को लेकर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे। यह कार्यक्रम एमबी क्लब में रखा गया था। डॉ. सादिक का कहना है कि वे कार्यक्रम के तय समय शाम पांच बजे से पांच मिनट पहले ही एमबी क्लब पहुंच गए। वहां से लौटने के सवाल पर वे कहते हैं-कुछ नहीं हुआ।
बस, वहां गार्ड ने कहा-मियां वह बोर्ड पढ़ लीजिए। उस बोर्ड पर ड्रेस कोड लिखा था। जिसमें लिखा था कि कुर्ता-पायजामा पहन कर कोई अंदर दाखिल नहीं हो सकता। पर डॉ. सादिक इतना कुछ होने के बावजूद बड़ी शालीनता से कहते हैं-कोई बदतमीजी नहीं हुई, बस बोर्ड दिखाकर बाहर कर दिया।
लखनऊ की तहजीब का अपमान
मौलाना के साथ हुए बर्ताव से तिलमिलाई संस्था की अध्यक्ष सपना उपाध्याय ने कहा, कार्यक्रम के कारण मैं हॉल के अंदर थी। इससे डॉ. सादिक के आने का पता नहीं चल पाया।
एमबी क्लब मैनेजमेंट ने डॉ. सादिक को अंदर आने से रोककर लखनऊ की तहजीब का अपमान किया है। धर्मगुरु होने के साथ ही मौलाना की शख्सियत में लखनऊ रचा बसा है, यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
पहले से पता होता तो इजाजत ले ली जाती
मामले पर एमबी क्लब के सचिव रिटायर्ड कर्नल ज्योतिर्मय घोषाल ने कहा कि ईश्वर चाइल्ड वेलफेयर ने बुकिंग के वक्त मुझे गेस्ट की लिस्ट नहीं दी थी।
इस वजह से मुझे नहीं पता था कि कार्यक्रम में किसको आना है। अगर पहले से पता होता तो मैनेजमेंट से इजाजत ली जा सकती थी। क्लब के नियमों के विरुद्ध जाना मेरे भी अधिकार क्षेत्र से बाहर है।