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नवाचार से बदला गणित : लोहा काटने की लखटकिया मशीन अब 13 हजार में
Sat, 07 Jun 2025 01:51 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sat, 07 Jun 2025 01:51 AM IST
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लखनऊ विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग के छात्रों ने बनाई मशीन। स्रोत: विवि
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी एवं तकनीकी संकाय में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्रों ने बेहद कम लागत में अब्रासिव जेट मशीन (लोहे की कटाई के लिए) का निर्माण किया है। यह मशीन विशेष रूप से कठोर और भंगुर पदार्थों की सटीक कटाई के लिए विकसित की गई है। इस परियोजना का मार्गदर्शन डॉ. प्रवीण कुमार राय ने किया है। उन्होंने दावा किया कि बाजार में जहां इस प्रकार की मशीन की कीमत 1 से 1.5 लाख रुपये तक होती है, वहीं छात्रों ने इसे महज 13 हजार रुपये की लागत में तैयार किया है।
तकनीकी दक्षता और नवाचार का उदाहरण
प्रोजेक्ट को डॉ. प्रवीण कुमार राय के मार्गदर्शन में बीटेक छात्रों – जागृत प्रताप सिंह, अमितेश, शशांक शेखर, लक्ष्य राजपूत और मानवेंद्र प्रताप ने तैयार किया है। लविवि के न्यू कैंपस में प्लेसमेंट सेल के अपर निदेशक डॉ. हिमांशु पांडेय ने बताया कि इस परियोजना से छात्रों की तकनीकी दक्षता और लागत प्रभावी सोच का परिचय मिलता है। कुलपति प्रो. आलोक राय ने टीम को इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं दी हैं।
प्रयोगशाला प्रशिक्षण में आएगी उपयोगी
डीन प्रो. ए.के. सिंह ने बताया कि इस मशीन का उपयोग विभागीय प्रयोगशालाओं में प्रदर्शन और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग के लिए किया जाएगा। इससे आने वाले छात्रों को आधुनिक निर्माण तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी मिलेगी। यह प्रोटोटाइप विश्वविद्यालय के अनुसंधान कार्यों में सहायक उपकरण के रूप में भी कार्य करेगा।
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इस तरह हुआ निर्माण
डॉ. हिमांशु के अनुसार, मशीन के निर्माण में वायुसंपीडक, मिक्सिंग चेंबर, उच्च दबाव नोजल, प्रेशर गेज, ब्लो वाल्व और वायु वाहक पाइप जैसे यंत्रों का समावेश किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य नॉन-कॉन्वेंशनल मशीनिंग तकनीकों से छात्रों को जोड़ना है।
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तकनीकी दक्षता और नवाचार का उदाहरण
प्रोजेक्ट को डॉ. प्रवीण कुमार राय के मार्गदर्शन में बीटेक छात्रों – जागृत प्रताप सिंह, अमितेश, शशांक शेखर, लक्ष्य राजपूत और मानवेंद्र प्रताप ने तैयार किया है। लविवि के न्यू कैंपस में प्लेसमेंट सेल के अपर निदेशक डॉ. हिमांशु पांडेय ने बताया कि इस परियोजना से छात्रों की तकनीकी दक्षता और लागत प्रभावी सोच का परिचय मिलता है। कुलपति प्रो. आलोक राय ने टीम को इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं दी हैं।
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प्रयोगशाला प्रशिक्षण में आएगी उपयोगी
डीन प्रो. ए.के. सिंह ने बताया कि इस मशीन का उपयोग विभागीय प्रयोगशालाओं में प्रदर्शन और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग के लिए किया जाएगा। इससे आने वाले छात्रों को आधुनिक निर्माण तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी मिलेगी। यह प्रोटोटाइप विश्वविद्यालय के अनुसंधान कार्यों में सहायक उपकरण के रूप में भी कार्य करेगा।
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इस तरह हुआ निर्माण
डॉ. हिमांशु के अनुसार, मशीन के निर्माण में वायुसंपीडक, मिक्सिंग चेंबर, उच्च दबाव नोजल, प्रेशर गेज, ब्लो वाल्व और वायु वाहक पाइप जैसे यंत्रों का समावेश किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य नॉन-कॉन्वेंशनल मशीनिंग तकनीकों से छात्रों को जोड़ना है।