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शहीद की मां वापस करेगी बेटे को मिला शौर्य चक्र, कहा-अब बता रहे लखनऊ...

Tue, 06 Oct 2020 11:10 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 06 Oct 2020 11:10 PM IST
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Martyr's mother will return son got Shaurya Chakra, said- Now telling Lucknow ...
शौर्य चक्र
मणिपुर के चंदेल जिले में आतंकियों से लोहा लेते हुए 8 जनवरी 2003 को शहीद हुए बीएसएफ के सहायक कमांडेंट विवेक सक्सेना के परिवार ने सरकार की ओर से मरणोपरांत दिया गया शौर्य चक्र व अन्य सम्मान पत्र लौटाने के लिए कहा है। परिवार शौर्य चक्र सम्मान के साथ दी जाने वाली सम्मान राशि अब तक न मिलने और प्रशासन व अधिकारियों के रवैये से आहत है। कई वर्षों तक इसके लिए लड़ाई लड़ने के बाद अब शहीद की मां ने इस संबंध में उप जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर सम्मान वापसी की इच्छा जतायी है।
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शौर्य चक्र सम्मान शहीद के पिता स्व. राम स्वरूप सक्सेना ने तत्कालीन राष्ट्रपति के हाथों से लिया था। परिवार का आरोप है कि शहादत के 17 वर्ष बाद भी शौर्य चक्र के साथ मिलने वाली सम्मान राशि नहीं मिली। मां सावित्री सक्सेना ने बताया कि वर्ष 1967 से वे लोग कृष्णा लोक कॉलोनी कानपुर रोड में रह रहे हैं। यहीं से उनका बेटा सीमा सुरक्षा बल में भर्ती हुआ था। 12 वर्षों के प्रयास के बाद 2014 में शासन ने स्मारक के लिए भूमि दी। उसके बाद उनके पति स्वर्गीय राम स्वरूप सक्सेना ने जो कि सेना में थे, उन्होंने अपनी पेंशन से बेटे के स्मारक का निर्माण करवाया। वर्ष 2017 में तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक शहीद स्मारक के अनावरण में आए थे।
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अब बता रहे हम लखनऊ के मूल निवासी नहीं
पिछले माह राजस्व की टीम ने स्पष्ट कर दिया कि आप लोग यहां के मूल निवासी नहीं हैं। राशि मिलना संभव नहीं है। मां का कहना है कि लखनऊ में इतने वर्ष रहने व बेटे की यहीं शिक्षा-दीक्षा होने के बाद अब हमें यहां का मूल निवासी नहीं बताया जा रहा। उन्होंने मंगलवार को उप जिलाधिकारी सरोजनीनगर प्रफुल्ल त्रिपाठी को एक पत्र सौंपते हुए कहा कि वह शासन के रवैये से दुखी हैं। बेटे को शौर्य पदक व पुलिस पदक, राष्ट्रपति प्रशस्ति पत्र जो भी मिला था, वह सब वापस करना चाहती हैं। इससे संबंधित एक पत्र उप जिलाधिकारी को दे दिया।
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शासन से निर्देश पर ही होगा निर्णय
शहीद की मां ने मंगलवार को एक पत्र सौंप कर बेटे को मिला वीरता सम्मान उपेक्षा से खिन्न हो कर वापस करने की बात कही हैं। मामला 2003 का है। परिवार की मांग को पूरा कराने के लिए लगातार शासन को रिपोर्ट भेज कर निर्देश मांगा जा रहा है। इसके आधार पर ही आगे कोई निर्णय होगा।
प्रफुल्ल त्रिपाठी, एसडीएम सरोजनीनगर
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