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Ayodhya News: वट सावित्री व्रत को लेकर सुहागिनों में उत्साह, शनि अमावस्या का भी संयोग
Fri, 15 May 2026 09:54 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Fri, 15 May 2026 09:54 PM IST
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अयोध्या। पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि का प्रतीक वट सावित्री व्रत शनिवार को मनाया जाएगा। इसकी तैयारियों में महिलाएं जुटी हैं। ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाए जाने वाले इस पर्व को मनाने के लिए सुहागिनों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
बाजारों में पूजन सामग्री, बरगद की टहनियों और शृंगार के सामानों की खरीदारी के लिए महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। आचार्य प्रवीण शर्मा ने बताया कि वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। वे पति की दीर्घायु और संतान की रक्षा व सुख-समृद्धि के लिए वट वृक्ष (बरगद) की पूजा-अर्चना कर प्रार्थना करती हैं। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की सात बार परिक्रमा करते हुए उसमें पीले रंग का सूत या कलावा लपेटती हैं। इसके बाद वृक्ष को हल्दी, कुमकुम, चने की दाल और ऋतु फल अर्पित कर विधि-विधान से पूजा करती हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से यह व्रत और पूजा करने से महिलाओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।
पंडित प्रवीण शर्मा के अनुसार शनि अमावस्या भी आज ही पड़ रही है। इस बार की शनि अमावस्या इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इसी दिन शनि जयंती और वट सावित्री व्रत का अद्भुत संयोग बन रहा है, जो इसे आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टिकोणों से बेहद महत्वपूर्ण बनाता है। यह दिन तंत्र-मंत्र की साधना, पितृ तर्पण और विशेष रूप से शनि देव की शांति के लिए सर्वोपरि माना गया है।
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पूजन के शुभ मुहूर्त
- सुबह का मुहूर्तः सुबह 7:12 बजे से लेकर 8:24 बजे तक।
- दोपहर का मुहूर्तः पूर्वाह्न 11:50 बजे से लेकर दोपहर 12:30 बजे तक।
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बाजारों में पूजन सामग्री, बरगद की टहनियों और शृंगार के सामानों की खरीदारी के लिए महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। आचार्य प्रवीण शर्मा ने बताया कि वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। वे पति की दीर्घायु और संतान की रक्षा व सुख-समृद्धि के लिए वट वृक्ष (बरगद) की पूजा-अर्चना कर प्रार्थना करती हैं। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की सात बार परिक्रमा करते हुए उसमें पीले रंग का सूत या कलावा लपेटती हैं। इसके बाद वृक्ष को हल्दी, कुमकुम, चने की दाल और ऋतु फल अर्पित कर विधि-विधान से पूजा करती हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से यह व्रत और पूजा करने से महिलाओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।
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पंडित प्रवीण शर्मा के अनुसार शनि अमावस्या भी आज ही पड़ रही है। इस बार की शनि अमावस्या इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इसी दिन शनि जयंती और वट सावित्री व्रत का अद्भुत संयोग बन रहा है, जो इसे आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टिकोणों से बेहद महत्वपूर्ण बनाता है। यह दिन तंत्र-मंत्र की साधना, पितृ तर्पण और विशेष रूप से शनि देव की शांति के लिए सर्वोपरि माना गया है।
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पूजन के शुभ मुहूर्त
- सुबह का मुहूर्तः सुबह 7:12 बजे से लेकर 8:24 बजे तक।
- दोपहर का मुहूर्तः पूर्वाह्न 11:50 बजे से लेकर दोपहर 12:30 बजे तक।