यूपी से कई नेता केंद्र में मंत्री पद के दावेदार
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प्रदेश में भाजपा के 71 और अपना दल के दो सांसद निर्वाचित हुए हैं। यह भाजपा की अब तक की सबसे बड़ी जीत है।
इस नाते मंत्रिमंडल में दावेदारों की तादाद बढ़ गई है। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रह चुके कई नेताओं समेत एक दर्जन सांसद मंत्री पद की दौड़ में शामिल हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष। नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कराने में अहम भूमिका।
मोदी उन्हें कैबिनेट में महत्वपूर्ण मंत्रालय देना चाहते हैं। अध्यक्ष की जिम्मेदारी के चलते राजनाथ मंत्री पद की अनिच्छा जता रहे हैं।
कल्याण शामिल हो सकते हैं केंद्रीय मंत्रिमंडल में
कल्याण सिंह : यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री, पिछड़ा वर्ग का बड़ा चेहरा, चुनाव के दौरान काफी सक्रिय रहे। इस बार चुनाव नहीं लड़े। किसी सदन के सदस्य नहीं। केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।
जनरल वीके सिंह : पूर्व थल सेनाध्यक्ष, गाजियाबाद से पहली बार सांसद चुने गए। जनरल जैसे पद पर रहने के बाद कैबिनेट में शामिल करने को लेकर अनिश्चय की स्थिति।
कलराज मिश्र : भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। लोकसभा चुनाव पहली बार जीते हैं। राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। भाजपा का ब्राह्मण चेहरा।
मेनका गांधी : पूर्व केंद्रीय मंत्री, गांधी परिवार की बहू, लंबे समय से भाजपा में। मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना।
पाचवीं बार जीते हैं आदित्य
उमा भारती : पूर्व केंद्रीय मंत्री, भाजपा का भगवा चेहरा, पिछड़े वर्ग से ताल्लुक। झांसी रैली में मोदी दिल्ली में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका का संकेत दे चुके हैं।
संतोष गंगवार : पिछड़े वर्ग का चेहरा, पहले मंत्री रह चुके हैं। रुहेलखंड के निर्विवाद नेता।
योगी आदित्यनाथ : गोरखपुर से पांचवीं बार जीते हैं। कड़क हिंदूवादी छवि। पूर्वांचल की कई सीटों पर असर।
हुकुम सिंह को भी मिल सकता है मंत्री पद
रामशंकर कठेरिया : भाजपा का दलित चेहरा, आगरा से सांसद।
हुकुम सिंह : कैराना से सांसद चुने गए हैं। विधानसभा में नेता विरोधी दल। पिछड़े वर्ग से ताल्लुक। अटल सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री रह चुके हैं।
मंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं। उनका हठधर्मी होना कैबिनेट में मोदी को असहज कर सकता है। इसलिए उन्हें मंत्री पद से अलग कोई सम्मानजनक पद की पेशकश की जा सकती है।