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एसजीपीजीआई में बिजली को लेकर बवाल, जांचें प्रभावित
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कर्मचारियों ने पीजीआई निदेशक आवास का किया घेराव।
- फोटो : ??? ?????
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एसजीपीजीआई में तीन दिन से बिजली को लेकर बवाल चल रहा है। हॉस्पिटल ब्लॉक में जनरेटर का सहारा लिया जा रहा है। फिर भी एमआरआई और सिटी स्कैन प्रभावित हो रहा है।
कई मरीजों को अगले माह की तिथि दी जा रही है। दूसरी तरफ आवासीय इलाका अंधेरे में है। पानी के लिए लोग तरस रहे हैं।
कर्मचारियों की नाराजगी देख वैकल्पिक व्यवस्था के तहत जलापूर्ति शुरू हुई तो लोगों के घरों में गंदा पानी पहुंचने लगा। इससे गुस्साए कर्मचारियों ने निदेशक आवास का घेराव किया।
एसजीपीजीआई में स्थापित विद्युत उपकेंद्र में तीन दिन पहले शॉर्ट सर्किट से ट्रांसमिशन फुंक गया। इससे पूरा परिसर अंधेरे में डूब गया। कर्मचारी आवास में बिजली के साथ पानी की समस्या खड़ी हो गई।
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इस बीच हॉस्पिटल ब्लॉक को जनरेटर के सहारे चलाने का दावा किया गया, लेकिन एमआरआई और सिटी स्कैन जैसी जांचें प्रभावित रहीं। बुधवार को दिनभर बिजली की आवाजाही रही।
ऐसे में कई मरीजों को जांच के लिए अगली तिथि दे दी गई। करीब ढाई माह से नंबर का इंतजार कर रहे मरीज संस्थान प्रशासन को कोसते हुए लौट गए।
दिन भर सर्वर की समस्या रही
साथ ही सर्वर ने भी बुधवार को खूब छकाया। काउंटर पर लाइन लगाए मरीजों को रजिस्ट्रेशन, जांच रिपोर्ट और जांच के लिए शुल्क जमा करने में घंटों ंलाइन में लगे रहना पड़ा। इसी तरह विभिन्न विभागों की ओपीडी भी प्रभावित रही।
गंदा पानी देख गुस्साए कर्मचारी पहुंचे निदेशक आवास
तीन दिन से पानी का इंतजार कर रहे कर्मचारियों ने दोपहर में संस्थान प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताया। इस पर हॉस्पिटल ब्लॉक से वैकल्पिक व्यवस्था के तहत तार खींच कर पानी आपूर्ति शुरू कराई गई, लेकिन पंप चलते ही लोगों के घरों में गंदा पानी आने लगा। इससे गुस्साए तमाम कर्मचारी निदेशक आवास पर पहुंच गए। उन्होंने आक्रोश जताया। कर्मचारियों ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि संकाय सदस्यों के आवास के लिए जनरेटर से कनेक्शन दे दिया गया, जबकि कर्मचारियों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया।
संस्थान परिसर में बने बिजली उपकेंद्र में कुछ समस्या आ गई है। इसे ठीक कराया जा रहा है। यूपीपीसीएल के अधिकारियों से भी लगातार बात हो रही है। परिसर में जनरेटर से काम चल रहा है। कर्मचारी परिसर की समस्या का भी समाधान कराया जा रहा है।
- डॉ. गौरव अग्रवाल, सीएमएस, एसजीपीजीआई
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कई मरीजों को अगले माह की तिथि दी जा रही है। दूसरी तरफ आवासीय इलाका अंधेरे में है। पानी के लिए लोग तरस रहे हैं।
कर्मचारियों की नाराजगी देख वैकल्पिक व्यवस्था के तहत जलापूर्ति शुरू हुई तो लोगों के घरों में गंदा पानी पहुंचने लगा। इससे गुस्साए कर्मचारियों ने निदेशक आवास का घेराव किया।
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एसजीपीजीआई में स्थापित विद्युत उपकेंद्र में तीन दिन पहले शॉर्ट सर्किट से ट्रांसमिशन फुंक गया। इससे पूरा परिसर अंधेरे में डूब गया। कर्मचारी आवास में बिजली के साथ पानी की समस्या खड़ी हो गई।
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इस बीच हॉस्पिटल ब्लॉक को जनरेटर के सहारे चलाने का दावा किया गया, लेकिन एमआरआई और सिटी स्कैन जैसी जांचें प्रभावित रहीं। बुधवार को दिनभर बिजली की आवाजाही रही।
ऐसे में कई मरीजों को जांच के लिए अगली तिथि दे दी गई। करीब ढाई माह से नंबर का इंतजार कर रहे मरीज संस्थान प्रशासन को कोसते हुए लौट गए।
दिन भर सर्वर की समस्या रही
साथ ही सर्वर ने भी बुधवार को खूब छकाया। काउंटर पर लाइन लगाए मरीजों को रजिस्ट्रेशन, जांच रिपोर्ट और जांच के लिए शुल्क जमा करने में घंटों ंलाइन में लगे रहना पड़ा। इसी तरह विभिन्न विभागों की ओपीडी भी प्रभावित रही।
गंदा पानी देख गुस्साए कर्मचारी पहुंचे निदेशक आवास
तीन दिन से पानी का इंतजार कर रहे कर्मचारियों ने दोपहर में संस्थान प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताया। इस पर हॉस्पिटल ब्लॉक से वैकल्पिक व्यवस्था के तहत तार खींच कर पानी आपूर्ति शुरू कराई गई, लेकिन पंप चलते ही लोगों के घरों में गंदा पानी आने लगा। इससे गुस्साए तमाम कर्मचारी निदेशक आवास पर पहुंच गए। उन्होंने आक्रोश जताया। कर्मचारियों ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि संकाय सदस्यों के आवास के लिए जनरेटर से कनेक्शन दे दिया गया, जबकि कर्मचारियों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया।
संस्थान परिसर में बने बिजली उपकेंद्र में कुछ समस्या आ गई है। इसे ठीक कराया जा रहा है। यूपीपीसीएल के अधिकारियों से भी लगातार बात हो रही है। परिसर में जनरेटर से काम चल रहा है। कर्मचारी परिसर की समस्या का भी समाधान कराया जा रहा है।
- डॉ. गौरव अग्रवाल, सीएमएस, एसजीपीजीआई