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पीसीएस-जे के सफल अभ्यर्थी
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पीसीएस-जे में छाए लविवि और लॉ यूनिवर्सिटी के मेधावी
परीक्षा में सफलता हासिल करने वाले ज्यादातर अभ्यर्थियों ने यहीं से की है पढ़ाई
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा (सिविल जज) (जूनियर डिवीजन) परीक्षा-2018 में लखनऊ विश्वविद्यालय के साथ ही डॉ. राममनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पूर्व छाए हुए हैं। दोनों संस्थानों से कुल करीब 100 अभ्यर्थियों ने परीक्षा पास की है। इसके अलावा राजधानी के मूल निवासी अभ्यर्थियों ने दिल्ली तथा अन्य विवि से पढ़ाई करते हुए सफलता अर्जित की है।
लविवि के विधि संकाय के डीन प्रो. सीपी सिंह ने बताया कि उन्होंने एलएलबी का पाठ्यक्रम पीसीएस-जे के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर ही डिजाइन किया है। इतने विद्यार्थियों ने परीक्षा में सफलता हासिल कर विवि और लखनऊ का नाम रोशन किया है। डॉ. राममनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसके भटनागर के अनुसार यहां के विद्यार्थी कई मल्टीनेशनल कंपनी में चयनित होते हैं। इस साल पीसीएस-जे में भी सफलता हासिल करके उन्होंने नई इबारत लिखी है।
मीता को सातवीं और अनुजया को आठवीं रैंक
लखनऊ के सरोजनी नगर क्षेत्र में रहने वाली मीता पांडेय ने अपने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की है। उन्हें पीसीएस-जे में सातवीं रैंक मिली है। उनके पिता विंग कमांडर महेश चंद्र पांडेय भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हैं। मीता ने एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई दिल्ली विवि से की है। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश की न्यायिक सेवा में जाना ही उनका लक्ष्य था। इसी तरह आईटी गर्ल्स कॉलेज की शिक्षक डॉ. अनुपमा श्रीवास्तव की बेटी अनुजया कृष्णा ने परीक्षा में आठवीं रैंक हासिल की है। अनुजया ने अपनी पढ़ाई जर्मनी से पूरी की है। इसके बाद सिंगापुर में नौकरी करने के बाद पीसीएस-जे में सफलता हासिल की है।
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छह साल की उम्र में पिता को खोया, जज बनकर पूरी की मां की तमन्ना
डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे अनुराग ने जज बनकर अपनी मां का सपना पूरा कर दिया है। अनुराग के लिए यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि महज छह साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया था। इसके बाद उनकी मां ने नौकरी करके पालन-पोषण किया। अनुराग ने परीक्षा में 66वीं रैंक हासिल की है। अनुराग ने 2017 में दिल्ली न्यायायिक सेवा का एग्जाम भी क्वालीफाई किया था।
इनका हुआ चयन-
नाम- रैंक
मीता पांडेय- 7वीं रैंक
अनुजया कृष्णा- 8वीं रैंक
अणिमा मिश्रा- 13वीं रैंक
सौरभ शुक्ला- 16वीं रैंक
अनुराग- 66वीं रैंक
आयुषी चतुर्वेदी-77वीं रैंक
उमैता शाहनवाज- 100वीं रैंक
अंजिता सिंह चौहान- 195वीं रैंक
नवनीत कुमार- 198वीं रैंक
तारिफ मुस्तफा खान- 241वीं रैंक
सोनल उपाध्याय- 244वीं रैंक
अविरल उमराव- 306वीं रैंक
हर्ष आनंद- 321वीं रैंक
अरोमा रमन- 325वीं रैंक
सोनम शर्मा- 338वीं रैंक
निधि वर्मा- 363वीं रैंक
वर्तिका- 531वीं रैंक
अभय राजवंशी- 557वीं रैंक
वीनस कुमार- 571वीं रैंक
प्रियांशु- 576वीं रैक
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परीक्षा में सफलता हासिल करने वाले ज्यादातर अभ्यर्थियों ने यहीं से की है पढ़ाई
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा (सिविल जज) (जूनियर डिवीजन) परीक्षा-2018 में लखनऊ विश्वविद्यालय के साथ ही डॉ. राममनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पूर्व छाए हुए हैं। दोनों संस्थानों से कुल करीब 100 अभ्यर्थियों ने परीक्षा पास की है। इसके अलावा राजधानी के मूल निवासी अभ्यर्थियों ने दिल्ली तथा अन्य विवि से पढ़ाई करते हुए सफलता अर्जित की है।
लविवि के विधि संकाय के डीन प्रो. सीपी सिंह ने बताया कि उन्होंने एलएलबी का पाठ्यक्रम पीसीएस-जे के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर ही डिजाइन किया है। इतने विद्यार्थियों ने परीक्षा में सफलता हासिल कर विवि और लखनऊ का नाम रोशन किया है। डॉ. राममनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसके भटनागर के अनुसार यहां के विद्यार्थी कई मल्टीनेशनल कंपनी में चयनित होते हैं। इस साल पीसीएस-जे में भी सफलता हासिल करके उन्होंने नई इबारत लिखी है।
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मीता को सातवीं और अनुजया को आठवीं रैंक
लखनऊ के सरोजनी नगर क्षेत्र में रहने वाली मीता पांडेय ने अपने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की है। उन्हें पीसीएस-जे में सातवीं रैंक मिली है। उनके पिता विंग कमांडर महेश चंद्र पांडेय भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हैं। मीता ने एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई दिल्ली विवि से की है। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश की न्यायिक सेवा में जाना ही उनका लक्ष्य था। इसी तरह आईटी गर्ल्स कॉलेज की शिक्षक डॉ. अनुपमा श्रीवास्तव की बेटी अनुजया कृष्णा ने परीक्षा में आठवीं रैंक हासिल की है। अनुजया ने अपनी पढ़ाई जर्मनी से पूरी की है। इसके बाद सिंगापुर में नौकरी करने के बाद पीसीएस-जे में सफलता हासिल की है।
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छह साल की उम्र में पिता को खोया, जज बनकर पूरी की मां की तमन्ना
डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे अनुराग ने जज बनकर अपनी मां का सपना पूरा कर दिया है। अनुराग के लिए यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि महज छह साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया था। इसके बाद उनकी मां ने नौकरी करके पालन-पोषण किया। अनुराग ने परीक्षा में 66वीं रैंक हासिल की है। अनुराग ने 2017 में दिल्ली न्यायायिक सेवा का एग्जाम भी क्वालीफाई किया था।
इनका हुआ चयन-
नाम- रैंक
मीता पांडेय- 7वीं रैंक
अनुजया कृष्णा- 8वीं रैंक
अणिमा मिश्रा- 13वीं रैंक
सौरभ शुक्ला- 16वीं रैंक
अनुराग- 66वीं रैंक
आयुषी चतुर्वेदी-77वीं रैंक
उमैता शाहनवाज- 100वीं रैंक
अंजिता सिंह चौहान- 195वीं रैंक
नवनीत कुमार- 198वीं रैंक
तारिफ मुस्तफा खान- 241वीं रैंक
सोनल उपाध्याय- 244वीं रैंक
अविरल उमराव- 306वीं रैंक
हर्ष आनंद- 321वीं रैंक
अरोमा रमन- 325वीं रैंक
सोनम शर्मा- 338वीं रैंक
निधि वर्मा- 363वीं रैंक
वर्तिका- 531वीं रैंक
अभय राजवंशी- 557वीं रैंक
वीनस कुमार- 571वीं रैंक
प्रियांशु- 576वीं रैक