{"_id":"5eeed558a7de5346a356093d","slug":"many-services-still-not-in-public-interest-guarantee-act-chief-minister-yogi-gets-angry","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कई सेवाएं अब भी जनहित गारंटी अधिनियम में नहीं, मुख्यमंत्री योगी हुए नाराज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कई सेवाएं अब भी जनहित गारंटी अधिनियम में नहीं, मुख्यमंत्री योगी हुए नाराज
Sun, 21 Jun 2020 09:04 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 21 Jun 2020 09:04 AM IST
विज्ञापन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुख्यमंत्री के बार-बार निर्देश के बावजूद कुछ विभाग कई विभागीय सेवाओं को जनहित गारंटी अधिनियम के दायरे में नहीं ला रहे हैं। हाल में मुख्यमंत्री के निर्देशों पर अमल की समीक्षा की गई तो पता चला कि विद्युत सुरक्षा निदेशालय और पर्यावरण विभाग ने कई सेवाएं अभी तक अधिनियम में अधिसूचित नहीं कराई हैं।
नतीजतन, इनकी सेवाओं को ई-डिस्ट्रिक्ट, निवेश मित्र पोर्टल व मुख्यमंत्री के दर्पण डैशबोर्ड से इंटीग्रेट नहीं कराया जा सका है। इस पर अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल ने अपर मुख्य सचिव ऊर्जा अरविंद कुमार व प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण सुधीर गर्ग को इस संबंध में पत्र लिखकर सीएम की नाराजगी बताई है।
उन्होंने दोनों अफसरों को चिह्नित सेवाएं 15 दिनों में अधिसूचित कर इंटीग्रेट कराने को कहा है। गौरतलब है कि सीएम ने विभिन्न सेवाओं को जनहित गारंटी अधिनियम के दायरे में लाकर लोगों को तय समयसीमा में काम सुनिश्चित कराने को कहा था।
विज्ञापन
अधिसूचित सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन हो जाती है तो मुख्यमंत्री विभिन्न कार्यों में होने वाली प्रगति को सीधे देख सकते हैं। इससे यह पता चल जाता है कि किस काम को होने में कितने दिन लग रहे हैं, या किस अफसर की वजह से देरी हो रही है।
विज्ञापन
नतीजतन, इनकी सेवाओं को ई-डिस्ट्रिक्ट, निवेश मित्र पोर्टल व मुख्यमंत्री के दर्पण डैशबोर्ड से इंटीग्रेट नहीं कराया जा सका है। इस पर अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल ने अपर मुख्य सचिव ऊर्जा अरविंद कुमार व प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण सुधीर गर्ग को इस संबंध में पत्र लिखकर सीएम की नाराजगी बताई है।
विज्ञापन
उन्होंने दोनों अफसरों को चिह्नित सेवाएं 15 दिनों में अधिसूचित कर इंटीग्रेट कराने को कहा है। गौरतलब है कि सीएम ने विभिन्न सेवाओं को जनहित गारंटी अधिनियम के दायरे में लाकर लोगों को तय समयसीमा में काम सुनिश्चित कराने को कहा था।
विज्ञापन
अधिसूचित सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन हो जाती है तो मुख्यमंत्री विभिन्न कार्यों में होने वाली प्रगति को सीधे देख सकते हैं। इससे यह पता चल जाता है कि किस काम को होने में कितने दिन लग रहे हैं, या किस अफसर की वजह से देरी हो रही है।
ऑनलाइन सेवाओं से जुड़े कार्मिकों का प्रशिक्षण भी दें
अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री ने कहा है कि विभागीय ऑनलाइन व्यवस्था व अन्य आवश्यक निर्देशों के अनुपालन से जुड़े कार्मिकों को कोविड-19 महामारी के मद्देनजर आनलाइन प्रशिक्षण दिया जाए। इसके लिए वीडियो व ट्यूटोरियल्स डवलप कर उपलब्ध कराए जाएं।
विद्युत सुरक्षा निदेशालय की इन सेवाओं को अधिसूचित कराने का निर्देश
वन विभाग की इन सेवाओं को अधिसूचित कराने का फरमान
विद्युत सुरक्षा निदेशालय की इन सेवाओं को अधिसूचित कराने का निर्देश
- वाणिज्यिक इंस्टालेशन के लिए प्रारंभिक एनओसी
- औद्योगिक इंस्टालेशन के लिए सिंगल विंडो पोर्टल के जरिए प्रारंभिक एनओसी
- इंस्टालेशन की पाक्षिक जांच
- कांट्रैक्टर, वायरमैन व सुपरवाइजर के लिए लाइसेंस व परमिट
- इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी से छूट, वापसी, समायोजन
- बिजली दुर्घटना पूछताछ
वन विभाग की इन सेवाओं को अधिसूचित कराने का फरमान
- आरा मशीन का नवीनीकरण
- आरा मशीन का नामांतरण व स्थानान्तरण