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आसानी से होगा डायबिटीज रोगियों के मोतियाबिंद का ऑपरेशन
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डायबिटीज से जूझ रहे मरीज अब बगैर परेशानी मोतियाबिंद का ऑपरेशन करा सकेंगे। इसके लिए केजीएमयू में ऑप्टिकल कोहरेंस टोमोग्राफी (ओसीटी) मशीन लगाई गई है। जांच की दर भी तय कर दी गई है। इसके माध्यम से होने वाली जांचों के लिए 500 रुपये फीस तय की गई है। यह व्यवस्था इसी महीने से शुरू होनी है।
इसका सबसे ज्यादा फायदा मोतियाबिंद से जूझ रहे मरीजों को मिलेगा। मोतियाबिंद की वजह से उनकी जांच करना संभव नहीं हो पाता है। ओसीटी मशीन की सहायता से डायबिटीज मरीजों की जांच और ऑॅपरेशन में आसानी होगी। केजीएमयू की ऑपथेल्मोलॉजी विभाग की ओपीडी में रोजाना 200 से ज्यादा मरीज आते हैं। इनमें लगभग आधे मरीज डायबिटीज से पीड़ित होते हैं। आंख में ज्यादा चोट लगने या फिर डायबिटीज वाले मरीजों के मामले में अभी तक कन्वेंशनल फ्लूरेसिन एंजियोग्राफी का उपयोग किया जाता है। इस तकनीक में मरीज की आंखों में आईड्रॉप डालकर फोटोग्राफ लिए जाते हैं। इसके बाद उसे डाई का इंजेक्शन देकर उसकी आंख की फोटोग्राफ लिए जाते हैं। इस प्रक्रिया में समय तो लगता ही है, साथ ही डाई का उपयोग होने से एलर्जी का खतरा भी होता है। डायबिटीज वाले मरीजों में यह समस्या और ज्यादा होती है। ओसीटी एंजियोग्राफी में डाई देने की जरूरत नहीं होती है। सॉफ्टवेयर के माध्यम से ही आंखों के भीतर 10 लेयर की अलग-अलग तस्वीर आने की वजह से किसी भी बीमारी या कमी का तुरंत पता चल जाता है। सॉफ्टवेयर से जांच सिर्फ दो मिनट में ही हो जाती है। विवि के कोष से खरीदी गई इस मशीन की लागत करीब 10 लाख रुपये है।
लीथोट्रिप्सी स्थापित बिना चीरा लगाए होगा गुर्दे की पथरी का इलाज
केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग में अब गुर्दे की पथरी का ऑपरेशन बिना चीरा लगाए हो सकेगा। इसके लिए विभाग में लीथोट्रिप्सी मशीन लगाई गई है। मशीन न होने की वजह से करीब डेढ़ साल से चीरा लगाकर ही ऑपरेशन हो रहे थे। काफी मरीज इसकी वजह से वापस भी हो रहे थे। इसी महीने इसके ऑपरेशन शुरू हो जाएंगे।
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बीएमडी टेस्ट की होगी शुरुआत
केजीएमयू में पिछले डेढ़ साल से बंद चल रही बोन मिनरल डेंसिटी (बीएमडी) की जांच एक बार फिर से शुरू हो सकेगी। इसके लिए केजीएमयू के रेडियोडायग्नोसिस विभाग में बीएमडी मशीन लगाई जाएगी। इस मशीन की लागत करीब डेढ़ करोड़ रुपये है। यह जांच बंद होने की वजह से मरीजों को निजी सेंटर के चक्कर काटने पड़ते थे। इस जांच की सहायता से हड्डियों की मजबूती परखी जाती है।
जांच- शुल्क
एचडी कॉर्निया- 500 रुपये
इंटीरियर चैंबर- 500 रुपये
ओसीटी एंजियोग्राफी- 500 रुपये
मरीजों को होगी सहूलियत
केजीएमयू में हमेशा मरीजों को बेहतर इलाज देने की कोशिश की जाती है। इसके तहत नई मशीनें लगाई गई हैं। इनके लिए जांच शुल्क भी तय कर दिए गए हैं। सीधे तौर पर इससे मरीजों को फायदा होगा। ओसीटी मशीन की वजह से अब सामान्य के साथ ही डायबिटीज से पीड़ित मरीजों की जांच और इलाज में आसानी होगी।
- डॉ. सुधीर सिंह, प्रवक्ता केजीएमयू
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इसका सबसे ज्यादा फायदा मोतियाबिंद से जूझ रहे मरीजों को मिलेगा। मोतियाबिंद की वजह से उनकी जांच करना संभव नहीं हो पाता है। ओसीटी मशीन की सहायता से डायबिटीज मरीजों की जांच और ऑॅपरेशन में आसानी होगी। केजीएमयू की ऑपथेल्मोलॉजी विभाग की ओपीडी में रोजाना 200 से ज्यादा मरीज आते हैं। इनमें लगभग आधे मरीज डायबिटीज से पीड़ित होते हैं। आंख में ज्यादा चोट लगने या फिर डायबिटीज वाले मरीजों के मामले में अभी तक कन्वेंशनल फ्लूरेसिन एंजियोग्राफी का उपयोग किया जाता है। इस तकनीक में मरीज की आंखों में आईड्रॉप डालकर फोटोग्राफ लिए जाते हैं। इसके बाद उसे डाई का इंजेक्शन देकर उसकी आंख की फोटोग्राफ लिए जाते हैं। इस प्रक्रिया में समय तो लगता ही है, साथ ही डाई का उपयोग होने से एलर्जी का खतरा भी होता है। डायबिटीज वाले मरीजों में यह समस्या और ज्यादा होती है। ओसीटी एंजियोग्राफी में डाई देने की जरूरत नहीं होती है। सॉफ्टवेयर के माध्यम से ही आंखों के भीतर 10 लेयर की अलग-अलग तस्वीर आने की वजह से किसी भी बीमारी या कमी का तुरंत पता चल जाता है। सॉफ्टवेयर से जांच सिर्फ दो मिनट में ही हो जाती है। विवि के कोष से खरीदी गई इस मशीन की लागत करीब 10 लाख रुपये है।
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लीथोट्रिप्सी स्थापित बिना चीरा लगाए होगा गुर्दे की पथरी का इलाज
केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग में अब गुर्दे की पथरी का ऑपरेशन बिना चीरा लगाए हो सकेगा। इसके लिए विभाग में लीथोट्रिप्सी मशीन लगाई गई है। मशीन न होने की वजह से करीब डेढ़ साल से चीरा लगाकर ही ऑपरेशन हो रहे थे। काफी मरीज इसकी वजह से वापस भी हो रहे थे। इसी महीने इसके ऑपरेशन शुरू हो जाएंगे।
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बीएमडी टेस्ट की होगी शुरुआत
केजीएमयू में पिछले डेढ़ साल से बंद चल रही बोन मिनरल डेंसिटी (बीएमडी) की जांच एक बार फिर से शुरू हो सकेगी। इसके लिए केजीएमयू के रेडियोडायग्नोसिस विभाग में बीएमडी मशीन लगाई जाएगी। इस मशीन की लागत करीब डेढ़ करोड़ रुपये है। यह जांच बंद होने की वजह से मरीजों को निजी सेंटर के चक्कर काटने पड़ते थे। इस जांच की सहायता से हड्डियों की मजबूती परखी जाती है।
जांच- शुल्क
एचडी कॉर्निया- 500 रुपये
इंटीरियर चैंबर- 500 रुपये
ओसीटी एंजियोग्राफी- 500 रुपये
मरीजों को होगी सहूलियत
केजीएमयू में हमेशा मरीजों को बेहतर इलाज देने की कोशिश की जाती है। इसके तहत नई मशीनें लगाई गई हैं। इनके लिए जांच शुल्क भी तय कर दिए गए हैं। सीधे तौर पर इससे मरीजों को फायदा होगा। ओसीटी मशीन की वजह से अब सामान्य के साथ ही डायबिटीज से पीड़ित मरीजों की जांच और इलाज में आसानी होगी।
- डॉ. सुधीर सिंह, प्रवक्ता केजीएमयू