फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   many KGMU professors may involve in scam

Lucknow News: कई अधिकारियों तक पहुंच सकती है केजीएमयू में दवा घोटाले की आंच

Fri, 25 Nov 2022 09:43 AM IST
लखनऊ ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Fri, 25 Nov 2022 09:43 AM IST
सार

केजीएमयू में पहले वेलफेयर सोसायटी के जरिये हर विभाग में मेडिकल स्टोर खुले थे। वर्ष 2018 में इन्हें एचआरएफ में बदल दिया गया। इन दिनों केजीएमयू में 16 दुकानें चल रही हैं। केजीएमयू एचआरएफ में आपूर्ति होने वाली दवाएं सीधे अमीनाबाद के दवा बाजार में पहुंच जाती थीं।

विज्ञापन
many KGMU professors may involve in scam
केजीएमयू - फोटो : amar ujala

विस्तार

केजीएमयू में हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) की दवाओं को खुले बाजार में भेजवाने के पीछे यूनिवर्सिटी के कई जिम्मेदारों का हाथ होने की आशंका है। केजीएमयू ने इसकी गंभीरता से जांच कराई तो कई प्रोफेसर चपेट में आएंगे। उनकी शह पर ही यह कारोबार लंबे समय से चल रहा है।

विज्ञापन


केजीएमयू में पहले वेलफेयर सोसायटी के जरिये हर विभाग में मेडिकल स्टोर खुले थे। वर्ष 2018 में इन्हें एचआरएफ में बदल दिया गया। इन दिनों केजीएमयू में 16 दुकानें चल रही हैं। केजीएमयू एचआरएफ में आपूर्ति होने वाली दवाएं सीधे अमीनाबाद के दवा बाजार में पहुंच जाती थीं। इसके लिए रैपर पर लिखा एचआरएफ के प्रयोग के लिए मिटा दिया जाता था। अमीनाबाद में संबंधित दवा की एजेंसी लेने वालों के यहां से मांग कम होने से संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों का माथा ठनका।
विज्ञापन


सूत्र बताते हैं कि इस मामले में केजीएमयू से कई बार शिकायत की गई। विभागीय जांच में यह बात सामने आई कि शताब्दी अस्पताल में कैथेटर, कैंसर से जुड़ी दवाओं की जितनी खपत तीन माह में होनी चाहिए, उससे ज्यादा एक माह में ही निकल गईं। इस पर वहां कार्यरत कर्मचारियों को सिर्फ स्थानांतरित कर दिया गया। इससे यह रैकेट सक्रिय रहा। 25 अप्रैल 2022 और तीन मई 2022 को केजीएमयू और मुख्यमंत्री कार्यालय में दवाएं बाजार में बेचने की शिकायत की गई। कुलपति के निर्देश पर जांच के लिए पांच प्रोफेसरों की टीम बनाई गई। जांच के बाद शताब्दी 2 में कार्यरत नौ कर्मचारियों को हटा दिया गया। इसमें तीन फार्मासिस्ट, तीन कैशियर और अन्य कर्मचारी शामिल थे। लेकिन किसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसे चलता था खेल
सूत्रों का कहना है कि कैंसर, लिवर, किडनी, हार्ट सहित विभिन्न गंभीर बीमारियों के मरीजों की दवाएं महंगी आती हैं। एचआरएफ के जरिये ये 50 से 60 फीसदी तक सस्ती मिल जाती हैं। ऐसे में दवा काउंटर पर आने वाले पर्चे की वहां कार्यरत कर्मचारी मोबाइल से फोटो खींच लेते हैं। फिर उसकी यूएचआईडी नंबर पर एक पत्ता दवा के बजाय पांच पत्ता दवा देना अंकित कर देते हैं। फिर इस पर केजीएमयू या एचआरएफ के लिए लिखे शब्द को मिटा देते थे। उनकी टीम इस दवा को दुकानदारों तक पहुंचा देती थी। इसी तरह कुछ दवाएं उन मरीजों की यूएचआईडी पर भी चढ़ा देते थे, जिनके पर्चे पर संबंधित दवा लिखी ही नहीं होती थी।

आखिर कौन है शैलेश
सूत्रों का कहना है कि इस पूरे रैकेट में शैलेश नाम का व्यक्ति भी शामिल है। यह केजीएमयू के कई मेडिकल स्टोरों पर कार्य कर चुका है। इसकी पकड़ केजीएमयू के एचआरएफ टीम के सदस्यों तक है। वह केजीएमयू के एचआरएफ स्टोर में मनमाफिक लोगों की तैनाती करता है। करीब पांच साल पहले यह उस वक्त चलने वाली वेलफेयर सोसायटी की दवा बाजार में ले जाते पकड़ा जा चुका है। केजीएमयू ने उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया, लेकिन उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई। अब वह केजीएमयू के अफसरों से मिलीभगत करके स्टोर में अपने कर्मचारियों की तैनाती कराने लगा। यूरोलॉजी, सीटीवीएस सहित विभिन्न विभागों के मेडिकल स्टोर पर कार्य करने वाला फार्मासिस्ट भी इस कारोबार से जुड़ा है। पकड़े गए रजनीश के साथ वह निरंतर कॉलेज कैंपस में रहता रहा है।

क्यों चहेते रहे दो फार्मासिस्ट
इस मिलीभगत में किसी न किसी रूप में एचआरएफ टीम की मूक सहमति होने की आशंका जाहिर की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि समय-समय पर एचआरएफ चेयरमैन और कमेटी के अन्य सदस्य बदलते रहे, लेकिन दो फार्मासिस्ट ऐसे हैं, जो सभी के चहेते रहे। इन दोनों की तैनाती को लेकर कई बार तत्कालीन एचआरएफ चेयरमैन और कमेटी केसदस्यों के बीच विवाद भी होता रहा।

होगी सख्त कार्रवाई
एसटीएफ ने जिन लोगों को पकड़ा है। उनसे पूछताछ के बाद अन्य लोगों के नाम सामने आएंगे। यूनिवर्सिटी से जुड़े जिस भी व्यक्ति का नाम सामने आया, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. विपिन पुरी, कुलपति केजीएमयू

केजीएमयू के सभी फार्मेसी सेंटर पर चल रहा था दवा का खेल
केजीएमयू की रियायती दावाओं को बाहर की दुकानों पर बेचने में गिरफ्तार रजनीश ने एसटीएफ को बताया है कि यह खेल विवि के लगभग सभी दवा के सेंटरों पर खेला जा रहा था। यह धंधा पिछले तीन-चार सालों से चल रहा था। उसने बताया कि ट्रामा सेंटर में फार्मेसी पर तैनात महेश प्रताप सिंह व अनूप मिश्रा, प्लास्टिक सर्जरी विभाग की फार्मेसी में तैनात देवेश मिश्रा, गांधी वार्ड में फार्मेसी पर तैनात उदय भान और प्रियांशु का बड़ा भाई सूरज मिश्रा भी यही काम करता था। यहां से मिलने वाले पैसे सभी आरोपी आपस में बांट लेते थे। मामले में प्रकाश में आने के बाद से सभी अभियुक्तों की तलाश की जा रही है। इनके खिलाफ कोतवाली चौक में मुकदमा दर्ज कराया गया है।


यह दवाएं बरामद
लाइको डाक्स मार्क, म्यूसिनेक, ए टू जेड गोल्ड, रैपिलिफ डी, जेमकॉल डी 3, सीरप अपराइज, फोराकार्ट 400 रोटोकैप्स, टेलमीकाइंड एएम, सेरोफ्लो 250 इनहेलर, डिरिफा 400 एमजी, मेरोब इंजेक्शन 1 जी, केल्टिन डी 500, कीमोरल फोर्ट, टर्बोवॉस-एफ, कैप्सूल विजिलैक रिच, बिसपेक-5, एचसीक्यूएस 300, फेबुस्टेट आदि दवाएं बरामद हुई हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed