वाणिज्य कर के अरबों रुपये दबाए बैठे हैं सरकारी विभाग, कई सालों से नहीं चुकाया टैक्स
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यूपी के व्यापारी ही नहीं, बल्कि डेढ़ दर्जन से अधिक सरकारी विभाग भी वाणिज्य कर विभाग का अरबों रुपये टैक्स दबाए बैठे हैं। इनमें ज्यादातर वे कार्यदायी संस्थाएं हैं, जो विकास कार्यों से जुड़ी हैं। इसके अलावा कई ऐसे महकमे हैं जिन पर वाणिज्य कर विभाग का करोड़ों रुपये बकाया है।
इसकी वसूली के कई प्रयास किए गए, लेकिन बकायेदार विभाग टैक्स का भुगतान नहीं कर रहे हैं। अब वाणिज्य कर विभाग इन बकाएदार विभागों को डिमांड नोटिस जारी करने की तैयारी में है। वाणिज्य कर विभाग की एक उच्चाधिकारी ने बताया कि हाल ही मुख्य सचिव के साथ हुई बैठक में बकाएदार विभागों से टैक्स वसूलने का फैसला हुआ था।
इसमें मुख्य सचिव ने निर्देश दिया था कि जिन विभागों पर एक करोड़ से अधिक टैक्स बकाया है, उनके विभागाध्यक्षों को पत्र लिखा जाए और चालू वित्तीय वर्ष में बकाया वसूली की जाए। इसके बाद ऐसे विभागों की प्रारंभिक सूची बना ली गई है।
कुछ और विभाग हैं, जिन पर बकाए टैक्स का आंकड़ा जुटाया जा रहा है। अभी तक 1300 करोड़ रुपये से अधिक बकाए का आकलन हो चुका है। उन्होंने बताया कि एक करोड़ से अधिक के बकाएदार विभागों के लिए डिमांड नोटिस तैयार किया जा रहा है। हालांकि नोटिस भेजने से पहले एक बार फिर मुख्य सचिव के साथ बैठक होनी है।
देखें, एक करोड़ से अधिक बकाया वाले विभाग
इसके बाद ही बकाएदार विभागों की सूची फाइनल होगी। बता दें, वाणिज्यकर विभाग लेन-देन या फिर अन्य मदों में वसूली करने वाले सरकारी विभागों से पहले वैट लेता था और अब जीएसटी वसूल रहा है। मगर सरकारी विभागों की स्थिति यह है कि वे आम लोगों से जीएसटी ले रहे हैं, लेकिन वाणिज्य कर विभाग को इसका भुगतान नहीं कर रहे हैं।
एक करोड़ से अधिक बकाया वाले विभाग
खाद्य एवं रसद, वस्त्रोद्योग एवं हथकरघा, ऊर्जा, लोक निर्माण, राजकीय निर्माण निगम, समाज कल्याण निर्माण निगम, राज्य सेतु निगम, खाद्य निगम, क्षेत्रीय खाद्य नियंत्रक कार्यालय, सहकारिता, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान परिषद, सार्वजनिक उद्यम, कृषि, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग, सिंचाई, जल संसाधन एवं परती भूमि विकास, नगर विकास, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, ग्राम्य विकास, बेसिक शिक्षा और पंचायती राज।