नोएडा, मेरठ और अब लखनऊ, बेगुनाहों के खून से रंगे हैं पुलिस के हाथ
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पुलिसिया कार्यशैली की वजह से हाल के दिनों में कई मौकों पर सरकार की किरकिरी हुई है। ज्यादातर मामलों में छोटे पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई करके अधिकारियों ने पीछा छुड़ा लिया।
हाल ही मेरठ जिले में विपरीत धर्म के एक जोड़े पर पुलिसिया कहर टूटा था।
पुलिस कर्मियों ने लड़की की पिटाई की और उसके ही दोस्त के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज कराने के लिए महिला पुलिसकर्मी तहरीर मांगती रहीं। वीडियो वायरल हुआ तो डीजीपी ऑफिस सक्रिय हुआ और तीन पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया।
इसी तरह अलीगढ़ में एसएसपी ने एनकाउंटर का नाट्य रूपांतरण कराकर पुलिस की भद पिटवा दी थी। मामला तूल पकड़ा तो डीजीपी ने एसएसपी को तलब कर लिया और पूरे मामले की जानकारी ली। हालांकि तब तक मीडिया में सरकार की काफी फजीहत हो चुकी थी।
नोएडा में जिम संचालक जितेंद्र पर फायर करने का मामला हो या मथुरा में एनकाउंटर के दौरान मासूम माधव की जान जाने का, इनमें भी सरकार की जमकर फजीहत हुई थी। सपा एमएलसी संजय लाठर एनकाउंटर के दौरान बेगुनाहों की मौत का मामला विधान परिषद में भी उठा चुके हैं।
आचरण को लेकर अब तक 219 पुलिस कर्मी निलंबित
जिस समय लखनऊ के पॉश इलाके में दो पुलिस कर्मी अपने आपराधिक कृत्य से देश भर में यूपी पुलिस की फजीहत की पटकथा लिख रहे थे, उसी समय प्रदेश के डीजीपी ओमप्रकाश सिंह पुलिस कर्मियों के व्यवहार में सुधार पर लेक्चर देने की तैयारी कर रहे थे।
डीजीपी ने पुलिस कर्मियों को नियम विरुद्ध, अवैधानिक और आपराधिक आचरण न करने के लिए संवेदनशील बनाने के लिए 29 सितंबर को गाजियाबाद में और 30 सितंबर को नोएडा में पुलिस कर्मियों के साथ डीजीपी का संवाद कार्यक्रम था।
इस दौरान डीजीपी ने अवैधानिक और आपराधिक आचरण न करने के निर्देश दिए। डीजीपी ने कहा कि आचरण को लेकर जनवरी से अब तक 219 पुलिस कर्मचारियों को निलंबित और 10 पुलिस कर्मचारियों को बर्खास्त किया जा चुका है।