सीतापुर में भीषण हादसा: अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहे पांच लोगों की मौत
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सीतापुर के लहरपुर के नेवादा गांव के पास गुरुवार भोर सड़क किनारे खड़े ट्रक में पीछे से जीप जा घुसी। हादसे में बिसवां निवासी हजरत गुलजार शाह मेला कमेटी के अध्यक्ष इशरत अली सिद्दीकी, उनकी पत्नी व बेटी समेत पांच लोगों की मौत हो गई। जबकि एक बेटी व जीप चालक को लखनऊ ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। दुर्घटना के समय जीप में सात लोग सवार थे।
इशरत अपने परिवार व रिश्तेदारों के साथ भांजे के अंतिम संस्कार में शामिल होने लखीमपुर जा रहे थे। बिसवां के मिरदही टोला निवासी हजरत गुलजार शाह कमेटी के अध्यक्ष इशरत अली सिद्दीकी (65) के भांजे शराफत निवासी हिदायत नगर, लखीमपुर की बीमारी से मौत हो गई थी।
इशरत अपनी पत्नी फातिमा (60), बेटी मशीरा उर्फ मोनी (22), दूसरी बेटी कहकशां उर्फ सोनी (30), रिश्तेदार बाबू खां (60) व निसार (55), बिसवां निवासी चालक गुड्डू (35) के साथ भांजे के अंतिम संस्कार में शामिल होने जीप से जा रहे थे।
लहरपुर में नेवादा गांव के पास जीप सड़क पर पहले से ही खड़े ट्रक में पीछे से जा घुसी। हादसे में इशरत, फातिमा व निसार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाबू खां व बेटी मोनी ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। गंभीर रूप से दूसरी बेटी सोनी व जीप चालक गुड्डू को लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है। हादसा इतना वीभत्स था, कि जीप के परखचे उड़ गए। वहीं हादसे के बाद चालक ट्रक लेकर भाग निकला।
जिसने भी खबर सुनी आंसू रोक नहीं पाया
भांजे के अंतिम दर्शन को लखीमपुर जा रहे समाजसेवी इशरत अली सिद्दीकी के लिए भी यह सफर आखिरी साबित हुआ। हादसे में पूरा परिवार बिखर गया। इशरत के साथ उनकी पत्नी व बेटी मोनी ने दम तोड़ दिया। दो रिश्तेदार भी जिंदगी की जंग हार गए। हादसे में दो लोग घायल हो गए।
जिसने भी यह खबर सुनी वह अपने आंसू नहीं रोक पाया। ढांढस बंधाने आए लोगों के मुंह से यही निकल रहा था कि कि परिवार के लिए यह सफर मौत का सफर बन गया।
बताते हैं कि लखीमपुर निवासी उनका भांजा शराफत बिसवां में ही रहता था। कुछ समय पहले वह अपने मां-बाप के साथ गया था। उसकी बीमारी के चलते बुधवार शाम मौत हो गई थी। भांजे की मौत की खबर सुन इशरत बेचैन हो गए थे। खबर मिलते ही इशरत ने वहां जाने की तैयारी शुरू कर दी थी। इशरत की पत्नी फातिमा व बेटियां मोनी व सोनी भी जाने को तैयार हो गईं।
आननफानन रात को ही जाने की तैयारियां हुईं। इशरत के हर सुखदुख में साथ रहने वाले उनके पड़ोसी बाबू खां व निसार भी तैयार हो गए। सभी लोग जीप पर सवार होकर भोर करीब चार बजे ही बिसवां से निकल लिए। घर से चलते वक्त सभी की आंखें नम थीं। अभी आधा रास्ता भी नहीं तय कर पाए थे, कि लहरपुर में ये हादसा हो गया।