परियोजनाओं की शक्ल में, अखिलेश का चुनावी दांव
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अखिलेश सरकार जनहित के तमाम फैसलों को जारी रखते हुए लोकसभा चुनाव से पहले कुछ और बड़ी योजनाओं का शिलान्यास कर विकास के मुद्दे पर खुद को आगे दिखाने की जुगत में है। आईटी सिटी की नींव रखने के साथ ही मेट्रो ट्रेन चलाने की आधारशिला का ताना-बाना लगभग बुना जा चुका है। बस इंतजार है तो सिर्फ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की हां का। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के साथ प्राविधिक शिक्षा विभाग ने मुख्यमंत्री से 20 फरवरी से पहले का समय मांगा है ताकि, इन योजनाओं का शिलान्यास कराया जा सके। लखनऊ में इन परियोजनाओं की रूपरेखा बहुत पहले तैयार की जा चुकी हैं। बस अब इन्हें अमली जामा पहनाया जाना है। इसमें 100 एकड़ में आईटी सिटी, 50 एकड़ में ट्रिपल आईटी, इतनी ही जमीन पर मेडिसिटी, 50 एकड़ में अंतरराष्ट्रीय स्तर का कैंसर संस्थान, 20 एकड़ में सुपर स्पेशियलिटी कॉर्डियोलॉजी व 25 एकड़ में प्रशासनिक अकादमी प्रमुख हैं।
प्रदेश सरकार की इन कोशिशों को भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी की चुनौती से जोड़कर भी देखा जा रहा है। वे यूपी की रैलियों में गुजरात जैसे विकास के मुद्दे को हवा दे रहे हैं और यहां तक कि इसके लिए 56 इंच का सीना होने की बात कह रहे हैं। वे यह जताने की भी कोशिश करते दिख रहे हैं कि विकास के मामले में गुजरात के मुकाबले यूपी काफी पीछे है। इसीलिए प्रदेश सरकार की कोशिश है कि लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले कई बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास कर उनकी इस चुनौती को फीका बताया जाए।
बहु प्रतीक्षित मेट्रो परियोजना
राजधानी में तो वैसे मेट्रो ट्रेन कुल 39 किलोमीटर चलेगी। इसमें नार्थ-साउथ कॉरिडोर अमौसी एयरपोर्ट से मुंशी पुलिया और ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर चारबाग से बसंत कुंज तक होगा। इस परियोजना पर 12,500 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन (डीएमआरसी) ने इसके लिए सैद्धांतिक सहमति दे दी है। पहले चरण में 23 किमी. का काम शुरू होना है लेकिन, मेट्रो का निर्माण कार्य पहले सिर्फ चार किमी. अमौसी से आलमबाग तक शुरू किया जाएगा। इसके बाद चार और टेंडर होंगे। पहले चार किमी पर करीब 800 करोड़ खर्च होगा। मेट्रो की अधिकत स्पीड 80 किमी प्रति घंटा होगी लेकिन, अधिक स्टेशनों पर रुकने के चलते करीब 34 किमी. प्रति घंटे के हिसाब से ही चल पाएगी। मेट्रो पर होने वाले खर्च में लखनऊ विकास प्राधिकरण, औद्योगिक विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद पहले वित्तीय वर्ष में 90 करोड़ देंगे और अगले वित्तीय वर्ष में 200 करोड़ देंगे। राज्य सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के लिए 20 करोड़ रुपये बजट में प्रावधान किया है।
ट्रिपल आईटी की चमक
चक गजरिया फार्म पर बसने वाले आईटी सिटी में 50 एकड़ जमीन पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (ट्रिपल आई) का निर्माण होगा। इसके निर्माण पर कुल 110 करोड़ रुपये तथा अन्य कार्यों पर 18 करोड़ खर्च होंगे। इसमें 50 प्रतिशत केंद्र सरकार, 35 प्रतिशत राज्य सरकार और 15 प्रतिशत औद्योगिक पार्टनर इलेक्ट्रानिक्स विभाग देगा। ट्रिपल आईटी खोलने का मकसद है कि यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को आईटी सिटी में नौकरी मिल सके। प्राविधिक शिक्षा विभाग ने ट्रिपल आईटी निर्माण के लिए इस वर्ष बजट में 20 करोड़ की व्यवस्था कर रखी है। इसका निर्माण राजकीय निर्माण निगम करेगा और इसके लिए सिग्नेचर बिल्डिंग बनाई जाएगी।
गोमती किनारे रिवर फ्रंट डवलपमेंट
लखनऊ के गोमती नदी के किनारे हनुमान सेतु से नदवा कॉलेज तक 1.7 किमी. सौंदर्यीकरण का काम कराया जाएगा। इस पर करीब 29 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें तटों के किनारे सफाई अभियान चलेगा। कूड़ा डालना पूरी प्रतिबंधित होगा। तटों पर नए सिरे से घास उगाई जाएगी। तट को ग्रीन कॉरपेट का रूप दिया जाएगा। यहां शौच करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगेगा। पांच करोड़ रुपये में बस्ती के घरों में शौचालय बनेंगे। तटों के किनारे टहलने के लिए पाथ-वे बनाए जाएंगे। इसके अलावा तट के लिए रोड भी बनेगा।
137 एकड़ में बनेगा इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम शहीद पद के किनारे 137 एकड़ में बनेगा। इसमें 70 एकड़ में स्टेडियम के साथ स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स होगा तथा 67 एकड़ जमीन पर रियल एस्टेट डवलपमेंट होगा। स्टेडियम के निर्माण पर 400 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है। इसके निर्माण के लिए कंपनी का चयन किया जा चुका है। यूपी में अभी कानपुर में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम ग्रीनपार्क है लेकिन, लखनऊ में बनने वाले स्टेडियम में वह सभी सुविधाएं होंगी जो अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए जरूरी हैं। खेल परिसर में आईसीसी के मानकों का क्रिकेट स्टेडियम, फुटबाल, हाकी स्टेडियम, बैडमिंटन, लॉन टेनिस अकादमी के अलावा अन्य इंडोर गेम्स का इंतजाम होंगे। 35 साल तक रख-रखाव आदि का खर्च विकासकर्ता कंपनी के पास होगा।