फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Many decisions approved by cabinet by circulation in cabinet meet in UP.

कैबिनेट के फैसले: वाराणसी में 702 करोड़ रुपये की लागत से चौड़ी होंगी तीन सड़कें, देखें सभी फैसले

Thu, 16 Dec 2021 02:07 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 16 Dec 2021 02:07 PM IST
सार

यूपी सरकार ने वाराणसी में तीन सड़कों के लिए बजट मंजूर करने सहित कई बड़े फैसलों को कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी।

विज्ञापन
Many decisions approved by cabinet by circulation in cabinet meet in UP.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala

विस्तार

वाराणसी में 702.35 करोड़ रुपये की लागत से तीन सड़कों को चौड़ा किया जाएगा। पीडब्ल्यूडी के इन प्रस्तावों को बुधवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है। इनमें से प्रत्येक परियोजना दो सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की है, इसलिए कैबिनेट की स्वीकृति आवश्यक थी।

विज्ञापन


वाराणसी में काली माता मंदिर से आवास विकास कॉलोनी होते हुए वाराणसी-आजमगढ़ रोड तक 2.40 किमी मार्ग दो लेन और पांडेयपुर चौराहे से रिंग रोड तक 4.10 किमी मार्ग फोरलेन किया जाएगा। 6.50 किमी लंबे इस मार्ग पर कुल 218.66 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
विज्ञापन


वाराणसी में ही लहरतारा से बीएचयू व रविंद्रपुरी कॉलोनी होते हुए विजया सिनेमा तक मार्ग का कुछ हिस्सा फोरलेन और कुछ छह लेन किया जाएगा। इस मार्ग की कुल लंबाई 9.512 किमी है। इसके चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण के लिए 241.80 करोड़ रुपये व्यय होंगे। तीसरी सड़क कचहरी से आशापुर चौराहा होते हुए संदहा तक फोरलेन बनेगी। उसकी कुल लंबाई 9.325 किमी है। इस पर कुल 241.89 करोड़ रुपये खर्च आएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि इन तीनों सड़कों के बनने से वाराणसी में जाम की समस्या से काफी मुक्ति मिलेगी। यातायात सुगम होने से कार्बन उत्सर्जन कम होगा, जिससे प्रदूषण की समस्या भी कम होगी। विभाग की शीघ्र ही काम प्रारंभ करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

नोएडा में बिजली लाइन के लिए वन भूमि मिलने का रास्ता साफ
नोएडा में सेक्टर 148 से सेक्टर 123 तक 400 केवी डबल सर्किट मोनोपोल लाइन के निर्माण के लिए वन भूमि मिलने का रास्ता साफ हो गया है। विद्युत लाइन के निर्माण में में 4.7656 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि आड़े आ रही है। इस वन भूमि के गैर वानिकी प्रयोग के लिए वन विभाग के 19 जुलाई 1999 के फैसले के अनुसार वर्तमान बाजार दर पर मूल्य (प्रीमियम) तथा उसके 10 प्रतिशत धनराशि के बराबर वार्षिक लीज रेंट के भुगतान के प्रावधान से छूट देने संबंधी प्रस्ताव को बुधवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई।

31 दिसंबर 2001 तक नियुक्त तदर्थ कर्मचारी होंगे नियमित

प्रदेश में 31 दिसंबर 2001 तक नियुक्त हुए तदर्थ कर्मचारियों के नियमितीकरण का रास्ता साफ हो गया है। ऐसे कर्मचारियों ने यदि तीन वर्ष की सेवा पूरी कर ली है तो उन्हें नियमित किया जाएगा। इसके लिए उप. (लोक सेवा आयोग के क्षेत्र से बाहर) तदर्थ नियुक्तियों का विनियमितीकरण (चतुर्थ संशोधन) नियमावली 2021 को जारी करने के लिए प्रदेश सरकार ने हरी झंडी दे दी है। इससे संबंधित कार्मिक विभाग के  प्रस्ताव को बुधवार कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दी गई।

प्रदेश में तदर्थ, संविदा व वर्कचार्ज कर्मियों को नियमित करने की मांग लंबे समय से चल रही है। इसके लिए इससे संबंधित  नियमावली-1979 में चौथा संशोधन किया गया है। अभी तक तृतीय संशोधन नियमावली प्रभावी थी। इसमें कटऑफ डेट 30 जून, 1998 थी। यानी जो तदर्थ कर्मचारी 30 जून, 1998 को या उससे पहले नियुक्त किए गए हों और तीन वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हों उन्हें नियमित किया जाएगा। वहीं, चतुर्थ संशोधन से यह प्रावधान कर दिया गया है कि 31 दिसंबर 2001 को या उससे पूर्व तदर्थ आधार पर सीधे नियुक्त कर्मचारी जो नियमावली के प्रभावी होने की तिथि को निरंतर सेवारत हों और तीन वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हों उन्हें नियमित किया जा सकेगा। फिलहाल तदर्थ कर्मचारियों को ही इसका फायदा होगा। संविदा व वर्कचार्ज कर्मचारियों को लाभ नहीं मिल पाएगा।

किराएदारी अधिनियम नियमावली में संशोधन को मंजूरी

प्रदेश सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम नियमावली-2021’ को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अध्यादेश के आधार पर पहले नियमावली जारी की गई थी। अब अध्यादेश के स्थान पर अधिनियम शब्द जोड़ दिया गया है और सारी नियम व शर्तें पूर्ववत रहेंगी।

गोरखपुर में सीवर प्रोजेक्ट पर खर्च होगा 223 करोड़
प्रदेश सरकार ने गोरखपुर में सीवरेज समस्या का समाधान करने के लिए सीवरेज योजना को मंजूरी दे दी गई है। गोरखपुर में 223ण्85 करोड़ रुपये से सीवरेज का काम कराया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह काम अटल नवीकरण और शहरी रूपांतरण मिशन ;अमृतद्ध से काम कराया जाएगा। अमृत सैप वर्ष 2015.16 के लिए गोरखपुर में सीवरेज योजना जोन.सी दो ;पार्ट प्रथमद्ध योजना की व्यय वित्त समिति द्वारा अनुमोदित लागत 22385ण्75 लाख के आधार पर यह काम कराया जाएगा।

दंड के मामलों में डीजी हस्तांतरित नहीं कर सकेंगेे अपने अधिकार
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ श्रेणी के पुलिस अधिकारियों की दंड एवं अपील नियमावली में संशोधन के प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए मंजूरी दे दी गई। इसके तहत दंड एवं अपील के मामलों में डीजीपी अपने अधिकार किसी अन्य डीजी को स्थानांतरित नहीं कर सकेंगे। पहले डीजीपी यह अधिकार अपनी ही रैंक के किसी अन्य अधिकारी को हस्तांतरित कर सकते थे।

प्रदेशीय क्रीड़ा संघों को अब मिलेगा दो लाख तक का अनुदान
गांव से लेकर शहर तक के खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा प्रादेशिक खेल संघों को अब प्रतिवर्ष दो लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। अब तक सिर्फ 15 हजार रुपये ही दिए जाते थे। इसके लिए खेल विभाग द्वारा ‘एकलव्य क्रीड़ा कोष (खेल एवं खिलाड़ियों का प्रोत्साहन तथा संवर्धन) नियमावली-2021’ बनाने के प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है। प्रस्ताव में मान्यता प्राप्त प्रादेशिक खेल संघों के बराबर ही दिव्यांग खेल संघों को भी उतनी ही अनुदान राशि देने की व्यवस्था होगी। नियमावली में अनुदान की राशि देने के संबंध में शर्तें और खेल संघों को मान्यता व संबद्धता देने के संबंध में खेल निदेशक के अधिकार भी निर्धारित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त खेल संघों की संबद्धता के बारे में भी नियम बनाए गए हैं।

11 और अधिनियमों को खत्म करने के लिए विधेयक के प्रारूप को मंजूरी

प्रदेश कैबिनेट ने बुधवार को 11 और अनुपयोगी अधिनियमों को खत्म करने के लिए उत्तर प्रदेश (चतुर्थ) निरसन विधेयक 2021 के प्रारूप को मंजूरी दे दी है। इनमें 9 अधिनियमों की संस्तुति उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग ने और दो की संस्तुति औद्योगिक विकास विभाग ने की है। गौरतलब है कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में अब तक 787 अनुपयोगी अधिनियमों को निरस्त किया जा चुका है। अगर समाप्त किए गए 15 केंद्रीय अधिनियमों को भी जोड़ दें तो इनकी कुल संख्या 802 हो चुकी है।

ये अधिनियम होंगे समाप्त
संयुक्त प्रांत फेमिन रिलीफ फंड एक्ट-1936, कुमाऊं एनिमल ट्रांसपोर्ट कंट्रोल (संशोधन) एक्ट-1950, उत्तर प्रदेश फैमीन रिलीफ फंड (संशोधन) अधिनियम-1952, उत्तर प्रदेश फैमीन रिलीफ फंड (संशोधन) एक्ट-1961, उत्तर प्रदेश स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम-1997, उत्तर प्रदेश स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम-1999, किंग जॉर्ज चिकित्सा विवि (संशोधन) अधिनियम-2004, उत्तर प्रदेश किंग जॉर्ज दंत विज्ञान विवि (संशोधन) अधिनियम-2006, उत्तर प्रदेश किंग जॉर्ज दंत विज्ञान विवि (निरसन) अधिनियम-2007, उत्तर प्रदेश ग्रामीण आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान सैफई (संशोधन) अधिनियम-2009, उत्तर प्रदेश ग्रामीण आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान सैफई (संशोधन) अधिनियम-2013

भातखंडे संस्कृत संस्थान अब भातखंडे राज्य संस्कृति विश्वविद्यालय बना

योगी कैबिनेट ने भातखंडे संगीत संस्थान सम विश्वविद्यालय को अब भातखंडे राज्य संस्कृति विश्वविद्यालय के रूप में परिवर्तित करने की मंजूरी दी है। संस्कृति विश्वविद्यालय में अब संस्कृत, संस्कृति के साथ लोक कलाओं, लोक नृत्य पर शोध और पाठ्यक्रम संचालित हो सकेंगे।

संस्कृति विभाग के अधिकारी के अनुसार भातखंडे संगीत संस्थान अभी तक सम  विश्वविद्यालय था। कैबिनेट ने संस्थान को अब पूर्ण विश्वविद्यालय राज्य विश्वविद्यालय का दर्जा दिया है। इसका कार्यक्षेत्र संपूर्ण उत्तर प्रदेश रहेगा। उन्होंने बताया कि अभी तक भारतेंदु नाट्य अकादमी ड्रामा में डिप्लोमा दे पाती है लेकिन अब अकादमी की संस्कृति विश्वविद्यालय से संबद्धता होने पर ड्रामा में डिग्री भी मिल सकेगी।

उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संस्थान को अभी बौद्ध अध्ययन और शोध केलिए लखनऊ विश्वविद्यालय सहित अन्य विश्वविद्यालय पर निर्भर रहना पड़ता था। संस्कृति विश्वविद्यालय के जरिये अब बौद्ध अध्ययन और शोध कार्य भी हो सकेगा। उन्होंने बताया कि अब इनके अतिरिक्त लोक कला, शास्त्रीय संगीत, ग्रामीण कला, संस्कृति और लोक नृत्यों पर भी शोध और अध्ययन किया जा सकेगा। इससे  रोजगार की संभावना बढ़ेगी साथ ही संस्कृत और संस्कृति का विकास होगा।

वाराणसी में कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक पीपीपी मोड पर बनेगा रोपवे

प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की जनता को एक और सौगात देने जा रही है। शहर में सबसे व्यस्तम कैंट रेलवे स्टेशन से सिगरा,रथयात्रा होते हुए गोदौलिया के गिरिजाघर चौराहे तक पीपीपी मोड पर रोपवे चलाने का फैसला किया गया है। सरकार के इस फैसले से शहर के घनी आबादी वाली क्षेत्रों से जहां सुगम यातायात की सुविधा मिलेगी, वहीं पर्यटकों व नागरिकों को आरामदायक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध होगी। पहले चरण में 3.65 किमी. लंबे रोपवे का संचालन किया जाएगा। जिसमें चार स्टेशन बनेंगे। आवास विभाग के इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है।

प्रस्ताव के मुताबिक इस रोपवे के निर्माण से प्रतिदिन करीब 80000 यात्री इसके माध्यम से यात्रा कर सकेंगे। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 410 करोड़ रुपये है। जिसमें वीजीएफ के रूप में 20 प्रतिशत धनराशि केन्द्र और 20 प्रतिशत धनराशि राज्य सरकार देगी। शेष 60 प्रतिशत धनराशि प्राइवेट पार्टनर को खर्च करना पड़ेगा। केन्द्र सरकार ने अपने हिस्से की धनराशि देने की मंजूरी पहले ही दे दी है।

बता दें कि आवास विभाग ने अक्तूबर में ही पीपीपी मोड के मूल्यांकन के लिए कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी के संस्तुति के बाद ही सरकार ने वाराणसी में रोपवे के संचालन की परियोजना को मंजूरी दी है। सरकार का मानना है कि इस परियोजना के संचालन से शहर में लोगों को यात्रा करने में समय की बचत तो होगी ही, साथ ही दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी। साथ ही वाहनों से होने वाले प्रदूषण को भी कम करने में मदद मिलेगी।

हरिद्वार स्थित कुंभ मेला मैदान की जमीन पर यूपी का स्वामित्व रहेगा

उत्तराखंड के हरिद्वार में कुंभ मेला मैदान के रूप में उपयोग होने वाली उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की 697.576 हेक्टेयर भूमि पर यूपी का ही मालिकाना हक रहेगा। वहीं उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच भूमि एवं भवनों के बंटवारे को लेकर दोनों प्रदेशों के सिंचाई विभाग के अधिकारी संयुक्त सर्वे कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की परिसंपत्तियों के बंटवारे का विवाद सुलझाने के लिए बीते दिनों यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बीच हुए समझौते को बुधवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दी गई।

प्रदेशीय क्रीड़ा संघों को अब मिलेगा दो लाख तक का अनुदान
गांव से लेकर शहर तक के खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा प्रादेशिक खेल संघों को अब प्रतिवर्ष दो लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। अब तक सिर्फ 15 हजार रुपये ही दिए जाते थे। इसके लिए खेल विभाग द्वारा ‘एकलव्य क्रीड़ा कोष (खेल एवं खिलाड़ियों का प्रोत्साहन तथा संवर्धन) नियमावली-2021’ बनाने के प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है। प्रस्ताव में मान्यता प्राप्त प्रादेशिक खेल संघों के बराबर ही दिव्यांग खेल संघों को भी उतनी ही अनुदान राशि देने की व्यवस्था होगी। नियमावली में अनुदान की राशि देने के संबंध में शर्तें और खेल संघों को मान्यता व संबद्धता देने के संबंध में खेल निदेशक के अधिकार भी निर्धारित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त खेल संघों की संबद्धता के बारे में भी नियम बनाए गए हैं।

किराएदारी अधिनियम नियमावली में संशोधन को मंजूरी
प्रदेश सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम नियमावली-2021’ को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अध्यादेश के आधार पर पहले नियमावली जारी की गई थी। अब अध्यादेश के स्थान पर अधिनियम शब्द जोड़ दिया गया है और सारी नियम व शर्तें पूर्ववत रहेंगी।

चित्रकूट को फ्री जोन घोषित करने के लिए विधेयक पेश करने को मंजूरी
राज्य सरकार ने चित्रकूट को धार्मिक पर्यटन फ्री-जोन घोषित करने के लिए जारी अध्यादेश को विधेयक के रूप में विधानमंडल में पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के बीच हुए करार के तहत वाहनों को एक दूसरे के यहां आने-जाने के लिए की सीमा पर स्थित कुछ क्षेत्रों में वाहनों को कर से छूट दिए जाने का फैसला किया गया है।

जुर्माने की राशि जमा न करने पर संपत्ति की नीलामी कर सकेगा रेरा

उप्र भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) जुर्माने की राशि जमा न करने पर बिल्डरों की संपत्ति की ई-नीलामी कराकर वसूली कर सकेगा। इससे संबंधित उप्र राजस्व संहिता नियमावली 2016 में संशोधन के प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दी गई। अब उप्र राजस्व संहिता (चतुर्थ संशोधन) नियमावली 2021 बनाई गई है।

रेरा की ओर से बिल्डर्स के खिलाफ वसूली प्रमाणपत्र (आरसी) जारी की जाती है। नीलामी प्रक्रिया में सामान्यत: बिल्डर्स ही भाग लेते हैं। वर्तमान परिस्थितियों में गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी व राजस्व परिषद ने रेरा से जारी आरसी के परिपेक्ष्य में नीलामी की प्रक्रिया को ई-नीलामी के माध्यम से भी संचालित करने का प्रस्ताव दिया। जिसे राज्य सरकार ने मंजूरी कर लिया। नई नियमावली में प्रावधान किया गया है कि अगर रेरा की ओर से जारी आरसी की धनराशि संबंधित बिल्डर जमा नहीं करता है तो वसूली के लिए उसकी अचल संपत्ति की ई-नीलामी की जा सकती है।

जबकि राजस्व संहिता नियमावली 2016 में भूमि कुर्क करने के लिए ई-नीलामी की व्यवस्था नहीं है। वह कृ षि भूमि की नीलामी को केंद्रित करके बनाई गई है। तहसील में प्रकाशन व अखबारों में विज्ञापन के बाद नीलामी की जाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed