CBI का डर, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे अखिलेश!
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मनरेगा घोटाले की जांच सीबीआई से कराने के हाईकोर्ट के फैसले की प्रति ग्राम्य विकास विभाग को मिल गई है।
लग रहा है कि हाईकोर्ट के इस फैसले और जांच पर टिप्पणी ने यूपी सरकार को डरा दिया है।
विभाग इस पर न्याय विभाग की राय लेने के बाद अगला कदम उठाएगा। इस बीच संकेत मिल रहे हैं कि सरकार फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकती है।
हाईकोर्ट ने सीबीआई को 2007-2010 के बीच हुए मनरेगा घोटाले की जांच करने का आदेश दिया है। प्रदेश के सात जिलों में जहां धांधली व शक्ति के दुरुपयोग की जांच की जानी है, वहीं बाकी जिलों में इसके तहत मिली रकम के दुरुपयोग व धांधली की जांच की जानी है।
हाईकोर्ट के फैसले की प्रति मिलने की पुष्टि करते हुए प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास अरुण सिंघल ने बताया कि फैसले पर न्याय विभाग की राय ली जाएगी और उसके अनुरूप ही कदम उठाए जाएंगे।
क्या हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की योजना है? सिंघल ने कहा कि राय आने के पहले कुछ भी कहना उचित नहीं है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि उच्च स्तर पर इस संबंध में विचार-विमर्श शुरू हो गया है।
वजह, मनरेगा में धांधली से जुड़ा एक मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। सरकार सुप्रीम कोर्ट से अपने समक्ष लंबित मामले में फैसला आने तक हाईकोर्ट के निर्णय पर रोक लगाने की अपील कर सकती है।
बताते चलें कि मायावती सरकार के कार्यकाल में मनरेगा में हुई धांधली की जांच के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने मौजूदा सीएम अखिलेश यादव से मिलकर और कई बार पत्र लिखकर सीबीआई जांच की सिफारिश करने का आग्रह किया था।
हालांकि सीएम हर बार सीबीआई जांच की आवश्यकता से इन्कार करते रहे। ऐसे में सरकार सीबीआई जांच को जितना हो सके, टालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील करे तो अचरज नहीं होना चाहिए।